NSC 2023

NSC 2024: पोस्ट ऑफिस की सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली स्कीम, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट, ज्यादा रिटर्न सिर्फ 5 साल में

Market मे बहुत सी सेविंग स्कीम हैं। लेकिन आज जानेगे पोस्ट ऑफिस की बहुत ही पोपुलर सेविंग स्कीम, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट यानि NSC के वारे मे।

NSC क्या है?

NSC 2024: नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट भारत सरकार की एक योजना है जो की Small Income Investors को सेविंग करने के लिए बड़ावा देने के लिए स्टार्ट की गई थी। इसको गवर्नमेंट ने 1989 मे सुरू किया था। यह स्कीम पोस्ट ऑफिस में शुरू की गई थी और आज भी यह पोस्ट ऑफिस में ही मिलती है एनएससी एक लो रिस्क और गारंटीड रिटर्न वाला इन्वेस्टमेंट है।

कौन खुलवा सकता है?

इस स्कीम में कोई भारतीय इन्वेस्ट कर सकता है । इसमें AGE की कोई लिमिट नहीं है।
इसमें अगर कोई माइनर अकाउंट भी ओपन करवाना चाहें तो ओपन करवा सकते हैं। लेकिन इसके लिए कंडीशन यही है कि माइनर अकाउंट को उसके माता-पिता या गार्जियन ही ऑपरेट कर सकते हैं।

Interest Rate (ब्याज) ?

एनएससी में अभी इंटरेस्ट रेट मिल रहा है वह है 7.70% का। सरकार हर क्वार्टर में इसके ब्याज दरों मे बदलाव करती रहती है। यानी हर 3 महीने में इसके ब्याज दर में बदलाव होता रहता है।
अब यहाँ पर ये बात याद रखिए की हम जब भी NSC अकाउंट खुलवाते हैं तो उस टाइम पर जो भी इंटरेस्ट रेट चल रहा होगा वो Maturity तक के लिए Lock कर दिया जाता है।
इसमे मिलने वाला इंटरेस्ट सालाना आधार पर compound होता है। और हमे मेचूरिटि के टाइम पर ही मिलता है।

मेचूरिटि पीरियड (Maturity Period)?

स्कीम मे निवेश किया गया पैसा 5 सालों के लिए Lock हो जाता है। तो इसमे 5 year के लिए इनवेस्टमेंट कर सकते हैं।

मिनिमम और मैक्सिमम निवेश?

देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस से मिनिमम 1000 रु. के NSC सर्टिफिकेट खरीद सकते हैं। इसमे मैक्सिमम की एसी कोई लिमिट नहीं है आप कितने रुपयों के भी सर्टिफिकेट पोस्ट ऑफिस से खरीद सकते है। इसमे एक बात ध्यान रखिएगा कि आप सिर्फ 100 रु. के मल्टिपल मे ही सर्टिफिकेट खरीद सकते हैं। और NSC को हम Cash, Cheque या कार्ड किसी के मधायम से खरीद सकते हैं।

Benefits:

बेसे तो NSC मे Pre Mature Withdrawal Allow नही है। इसमे निवेश किया गया पैसा 5 सालों से पहले नहीं निकाल सकते। 5 साल के पूरे हो जाने के बाद ही हमे पूरा पैसा ब्याज सहित मिलता है। लेकिन कुछ कंडिशन मे इस स्कीम से पैसा समय से पहले निकाल सकते हैं।
जैसे-

  • अकाउंट होल्डर की म्रत्यु हो जाने पर।
  • या फिर अकाउंट होल्डर को कोई गंभीर बीमारी होने पर।
  • बैंक का लोन नहीं चुकाने पर

Features:

  • इस स्कीम मे नॉमिनी बनाने की सुबिधा मिल जाती है। यानि किसी अपने को आप इसमे नॉमिनी बना सकते हैं।
  • इसके अलावा इस अकाउंट को एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे पोस्ट ऑफिस मे ट्रान्सफर कराया जा सकता है।
  • इस स्कीम मे जितने रुपयों की चाहे उतने रुपये के NSC खरीद सकते हैं। तो मैक्सिमम निवेश की इसमे कोई भी लिमिट नहीं है।
  • इसमे हमे जाइंट अकाउंट की भी सुभिधा मिल जाती है। मैक्सिमम 3 लोग मिल कर NSC को Jointly खरीद सकते हैं।
  • NSC के Against मे हम पोस्ट ऑफिस से तो कोई Loan नहीं ले सकते लेकिन किसी भी बेंक से Loan NSC के Against मे ले सकते हैं। जो भी अमौंट की NSC आपने खरीदी हैं उस पर 90% तक का loan बेंक से ले सकते हैं।

NSC मे निवेश के बाद हमे क्या प्रूफ मिलता है?

2016 से पहले NSC खरीदने पर पहले हमे प्रूफ के रूप मे सर्टिफिकेट मिला करते थे लेकिन 2016 के बाद NSC मे निवेश पर अब पासबूक इशू होती है।

कितने रुपयों के NSC खरेदने पर कितना रिटर्न मिलेगा-

NSC मे अभी 7.7% का इंटरेस्ट मिल रहा है

Amount Interest Maturity Amount
10,0004,49014,490
1,00000449001,44,900
10,000004,49,00014,49,000

अगर आपने 1000 रु. के NSC खरीदे हैं तब आपको बता दिया जाएगा की 5 वर्ष बाद आपको 14,49 रु. मिलेंगे।
इसी तरह से अगर आपने 10,000 रु. के खरीदे हैं तब आपको 5 वर्ष बाद 14,490 रु. मिलेंगे।
इसी तरह से अगर आपने 50,000 रु. के खरीदे हैं तब आपको 5 वर्ष बाद 72,450 रु. मिलेंगे।
और अगर एक लाख रुपये के NSC खरीदते है तब आपको 1,44,900 रु. मिलेंगे 5 वर्ष बाद
और अगर इस स्कीम में आप 20 लाख रुपये जमा कराते हैं तब 5 साल बाद मेच्योरिटी होने के बाद आपको 28,25,102 लाख रुपये और 94 पैसे का निश्चित ब्याज मिलेगा.

अवशयक डॉकयुमेंट?

इस स्कीम को भारत के किसी भी पोस्ट ऑफिस से खुलवा सकते हैं।
इसके साथ

  • 2 पासपोर्ट साइज़ के फोटो,
  • इडेंटिटी प्रूफ और
  • एड्रैस प्रूफ देना होगा।

उम्मीद करते हैं NSC से संबन्धित सारी जानकारी आपको इसमे मिल गई होगी। इस लेख से संबन्धित कोई प्रश्न या कोई सुझाव हो तो हमे comments जरूर करें। लेख पड़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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ATM Card एटीएम कार्ड

एटीएम कार्ड पर मिलता है 10 लाख रुपए तक का बीमा बिलकुल फ्री

आज के समय मे हर किसी के पास बेंक का खाता होता है। वो खाता कोई भी हो सकता है। जैसे बचत खाता या फिर चालू खाता या फिर जन धन खाता या और भी कई तरह के खाते जिनके लिए बेंक, अपने ग्राहकों को एक एटीएम कार्ड (ATM Card) की भी सुबिधा देता है, जिसे डेबिट कार्ड भी कहते हैं। इस कार्ड का उपयोग हर व्यक्ती करता है। क्या आपको पता है की आपके इस ATM CARD या कहें डेबिट कार्ड पर बेंक Insurance की भी सुबिधा देती है।
जी हाँ अगर आपके साथ या आपके परिवार के साथ कोई दुर्घटना या कोई हादसा हो जाता है तब आप इस पर क्लैम भी ले सकते हैं।

ATM Card पर Insurance

अगर आपके पास किसी भी बेंक का ATM कार्ड है तो इस पर आपको insurance की सुबिधा मिल जाती है। चाहे किसी भी बेंक का ATM कार्ड हो हर बेंक अपने डेबिट कार्ड पर insurance की सुबिधा देती है। और ये insurance 2 लाख रुपयों से लेकर 10 लाख रुपयों तक का रहता है। लेकिन इस वारे मे हमे पता नहीं होता है और हम इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। खास कर गाँव वालों को या फिर छोटे कस्वों वालों को इस वारे मे कुछ भी नहीं मालूम रहता है की ATM कार्ड पर भी insurance मिलता है।

पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (डेथ)

आपको बता दें की ATM पर जो Insurance मिलता है वह लाइफ Insurance नहीं होता है। वह Accidental Insurance रहता है। Accidental Insurance मे कार्ड धारी यानी जिसके नाम से कार्ड है वह व्यक्ति अगर किसी एक्सिडेंट का शिकार हो जाता है या किसी प्रकार का हादसा हो जाता है।
जैसे आप किसी साइट पर labour का काम कर रहे हो, वहा पर आप गिर जाते हो। इसके अलावा आग से जलकर किसी की मृत्यु हो जाती है या किसी की डूब कर मृत्यु हो जाती है तो ऐसे हादसे या दुर्घटना पर उसके परिवार वाले बेंक मे क्लैम कर सकते हैं। यह क्लैम 2 लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपयों तक का कर सकते है।

Accidental Insurance on ATM Card

एटीएम कार्ड के प्रकार (Types of ATM Card)

वर्तमान मे भारत मे बेंक द्वारा 3 प्रकार के ATM Card Issue होते है।

  • Visa Card– Visa Card एक आम Payment Card है, जो हम लोगों के पास debit या credit card के रूप में मौजूद है। यह Visa Network का उपयोग करता है. इसलिए इसे Visa Card कहा जाता है। तो जिन एटीएम कार्ड या डेबिट कार्ड मे Visa लिखा हुआ है, वो वीसा कार्ड कहलाते हैं।
  • Master Card– दूसरा मास्टर कार्ड होता है Master Card एक विदेशी Payment Gateway है जो कि दुनिया के अधिकांश देशों के बैंक को अपने कार्ड के द्वारा पेमेंट गेटवे की सुविधा उपलब्ध कराता है।
  • और तीसरा Rupay Card होता है। जिसे जन धन खाते के लिए दिया जाता है।

तो ये 3 प्रकार के एटीएम कार्ड को ही सभी तरह के बेंक द्वारा दिये जाते हैं। चाहे आपका खाता SBI मे हो या फिर पुंजाब नेशनल बेंक मे हो या फिर किसी भी सरकारी या प्राइवेट बेंक मे हो सभी मे बस ये 3 प्रकार के ATM Issue किए जाते हैं।

इन cards मे भी अलग अलग प्रकार होते हैं। जैसे –

  • Gold Card
  • Platinum Card
  • Signature Card
  • Premium Business Card होता है।

तो Viewers इसका इन्शुरेंस आपको खुद नहीं कराना होता। जब आपको बेंक से ये कार्ड मिलता है तो बेंक द्वारा ही औटोमेटिक आपके कार्ड पर ये सुबिधा सुरू हो जाती है। यानि अगर आपको कोई दुर्घटना या मृत्यु हो जाती है तो आपके नॉमिनी को क्लैम की राशि दे दी जाती है।

कितना क्लैम कर सकते हैं?

यहाँ पर हम आपको SBI बेंक के कार्ड का Example देकर समझा रहा हूँ। बाँकी के बेंकों मे भी वही नियम और कानून होता है।

  • RuPay कार्ड पर 2 लाख रुपए तक का क्लैम कर सकते है।
  • Platinum Card पर पर 5 लाख रुपयो तक का insurance claim कर सकते है।
  • Signature Card पर 10 लाख रु. तक का Accidental Claim कर सकते हैं।
  • Business Card पर भी आप 5 लाख रु. तक का accidental क्लैम कर सकते हैं।

खरीददारी मे भी कर सकते हैं क्लैम (Shopping / Purchase protection Claim on ATM Card)

किसी मोल या ऑनलाइन या फिर किसी जगह से शॉपिंग करने के बाद उसका पेमेंट अपने ATM Card से करते हैं, और उसी टाइम आपका सामान अगर चोरी हो जाता है तो उस स्थिती मे भी आप इस पर क्लैम कर सकते हैं।

  • गोल्ड कार्ड है तो आप 5 हजार रु. तक का क्लैम कर सकते हैं।
  • Platinum Card है तब 50 हजार रु. तक क्लैम कर सकते हैं।
  • Signature card होने पर 1 लाख रु. तक क्लैम कर सकते हैं।
  • Premium Business Card पर भी आप 50 हजार रु. तक क्लैम कर सकते हैं।

पर्सनल एयर एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (डेथ):

अगर कोई कार्ड धारक By Air किसी Flight से कहीं यात्रा कर रहा है। चाहे वो एक ही देश मे यात्रा कर रहा है या फिर International किसी दूसरे देश की यात्रा पर जा रहा है। और अगर वो फ्लाइट क्रेश हो जाता है, उसमे उस कार्ड धारी की मृत्यु हो जाती है। तो उस स्थिती मे उसको डबल क्लैम मिलता है।

  • RuPay कार्ड पर normally 2 लाख तक का क्लैम मिलता है, लेकिन यहाँ पर उसको 2 की जगह 4 लाख रुपये तक का क्लैम मिलेगा।
  • सिग्नेचर कार्ड पर 10 लाख की जगह 20 लाख रुपए तक का क्लैम किया जा सकता है।
  • प्रीमियम business card पर 5 लाख की जगह 10 लाख रुपए तक का क्लैम किया जा सकता है।
  • प्लैटिनम कार्ड है तब 5 लाख की जगह 10 लाख रुपए तक का क्लैम किया जा सकता है।

लेकिन इसमे कुछ शर्त है। और वो शर्त ये है की एयर यात्रा से पहले कार्ड को 45 दिन के अंदर मे उसे Use किया जाना चाहिए।

लेकिन Normally Accident हो जाने पर क्लैम के लिए कार्ड मे 90 दिन पहले किसी भी तरह का Transaction हो जाना चाहिए। तो अगर एक्सिडेंट से 3 महीने पहले तक कार्ड मे किसी भी तरह की शॉपिंग या ट्रैंज़ैक्शन हुआ है तो आप नियम के अनुसार इस पर क्लैम कर सकते हैं।

अगर आपने एटीएम कार्ड को ले लेने के बाद इसका उपयोग कहीं पर नहीं किया है तो आप क्लैम तो कर सकते हैं, लेकिन आपको insurance नहीं मिलेगा।
तो हमेशा आप कहीं किसी फ्लाइट से या ट्रेन से यात्रा करें तो आप कोशिश करें की टिकिट का भुगतान अपने एटीएम कार्ड से ही करें। इससे कार्ड पर क्लैम लेने मे आसानी हो जाती है।

एटीएम कार्ड पर क्लैम कैसे और कहाँ पर करें?

  • अगर दुर्घटना या हादसा हो जाता है तो सबसे पहले उस घटना की FIR पास के ही थाने मे करानी होगी।
  • अगर कार्ड धारक की पहले या बाद मे मृत्यु हो जाती है तो उसके पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी भी चाहिए होगी।
  • इसके अलावा नॉमिनी की भी पूरी डीटेल की जरूरत पड़ेगी जैसे उसके आधार कार्ड, उसका एड्रैस प्रूफ, उसका पैन कार्ड इत्यादि की जरूरत पड़ेगी।
    ये सभी डॉकयुमेंट लेकर कार्डधारक के बेंक मे जाना होगा।
  • वहाँ पर एक क्लैम फोरम भरना पड़ेगा। इसी क्लैम फोरम मे ये सभी डॉकयुमेंट भी सबमिट करना है जो अभी हमने आपको बताए थे.

अब बेंक इस प्रक्रिया को आगे बड़ाएगा, और 90 दिन के अंदर नॉमिनी को insurance का पैसा मिल जाता है।

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ESC Key

Esc Key और उसके महत्वपूर्ण कार्य (The Esc key and its most important functions)

आपको कीबोर्ड की एक मत्वपूर्ण Key वारे मे बताना चाहूँगा जिसे “ESC key” कहते हैं। इस key को हम लोग ज्यादा नोटिस ही नहीं करते है, फिर भी कई सारे उपयोग होते हैं इसके।

तो आज हम इस ESC key के कुछ shortcuts के वारे मे जानेंगे की कौन कौन से काम इसके द्वारा कर सकते हैं? बैसे तो इसके shortcuts काफी लोग जानते होंगे, लेकिन कई सारे ऐसे लोग भी हैं जिनको इस key के shortcuts के वारे मे बिलकुल भी मालूम।

ESC Key क्या है (What is the Esc key)?

Esc Key भी कीबोर्ड मे Alt, Ctrl, Shift key की तरह कंट्रोल key है। जब हम कीबोर्ड से कुछ टाइप करते हैं तो इसके द्वारा कोई अच्छर (Character) टाइप नहीं होता। Esc Key, पहले के ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होती थी जिनमे कमांड का उपयोग होता था। जैसे DOS, Unix इत्यादि।

कीबोर्ड पर Esc Key (कुंजी) कहाँ पर स्थित होती है?

कीबोर्ड (Keyboard) मे लेफ्ट साइड मे ये एक बटन होता है जिसे “ESC Key” कहते हैं। ये key Functions Keys के ठीक बगल मे होती है।

Esc Key on Keyboard

The Esc key is located in the upper-left corner on a standard Windows keyboard

Escape key के कार्य (Functions)

इसका ज़्यादातर उपयोग किसी कमांड को कैन्सल(Cancel) करने के लिए किया जाता है। जैसे

  • किसी खुले हुए Dialog Box को बगैर माऊस के उपयोग से Escape key से भी बंद (Close) करा सकते है।
  • किसी ब्राउज़र मे लोड की जा रही वैबसाइट को Escape key के द्वारा Cancel कर सकते है। अर्थात वैबसाइट को लोड ही नहीं होने देते है।
  • कई सारे गेम्स मे भी इसका उपयोग कारी को कैन्सल करने के लिए उपयोग करते हैं।
  • मीडिया प्लेयर द्वारा फूल स्क्रीन मे दिख रही वेदियो को Escape Key द्वारा Normal Mode मे Open करवा सकते हैं।
  • किसी Input Field मे गलत की गई Entry को Cancel करने के लिए भी इसका उपयोग करते हैं।
  • Esc Key द्वारा खुले हुए Start Menu या Pull Down Menu को तेजी से बंद किया जा सकता है।

उपयोगी संयोजन ESC Key के साथ (Useful key Combinations with the Esc key)

विंडोज 10 के साथ, दो शॉर्टकट हैं जिनमें एस्केप कुंजी शामिल है:

  • [Ctrl] + [Esc] विंडोज स्टार्ट मेनू को Open करते हैं। इसको “विंडोज लोगो” Key Press करके भी ऐसा ही किया जा सकता है।
  • [Ctrl] + [Shift] + [Esc] इसके द्वारा Task Manager को Open कर सकते हैं।
  • Function key + ESC Key इसके द्वारा Laptop से Fn Key + ESC Key प्रैस करके सिस्टम इन्फॉर्मेशन विंडो को खोल सकते हैं।

तो ये थीं ESC key के द्वारा Use होने वाली कुछ Shortcuts जिंका उपयोग करके आप स्मार्ट Users बन सकते हैं।

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Application Software

एप्लीकेशन सॉफ्टवेर क्या है? What is Application Software in Hindi

Application Software जो यूजर के लिए खास काम को पूरा करते है, “Application Software” या एप्लीकेशन कहलाते हैं। यानी हार्डवेर पर चलने वाले प्रोग्राम को Software कहते हैं। बिना सॉफ्टवेर के हार्डवेर किसी काम के नहीं होते, चाहे वो कम्प्युटर का हार्डवेर हो या फिर मोबाइल हार्डवेर। इसको Workable बनाने के लिए Software की जरूरत होती है।

तो Software को दो कैटेगरी मे बांटा गया है। 1. System Software और दूसरा 2. Application Software। तो यहाँ आपको एप्लिकेशन सॉफ्टवेर के वारे मे विस्तार से बताएँगे।

What is Application Software ? एप्लिकेशन सॉफ्टवेर क्या है ?

Application Software को खास उद्देश्य के लिए बनाया जाता है जो की सिस्टम सॉफ्टवेर के ऊपर Run होता है। जैसे हमे कम्प्युटर पर अकाउंट से संबन्धित कार्य करना है तो इसके लिए Tally Application Software पर काम करते हैं, ट्यपिंग से संबन्धित कार्य के लिए MS Word Application को खोलते हैं। एप्लीकेशन के काम कुछ इस प्रकार है:

  • यह एक प्रोडेक्टिविटी बिजनेस टूल है।
  • यह ग्राफिक और मल्टीमीडिया की सहायता करता है।
  • यह घरेलू और पर्सनल बिजनेस की गतिविधियों को स्पोर्ट करता है।
  • यह कम्यूनीकेशन टूल्स भी प्रदान करता है।

एप्लीकेशन के उपरोक्त चार यूटीलिटीज परस्पर विशिष्ट नहीं हैं। उदाहरण के लिए सभी ई-मेल प्रोग्राम्स, कंप्यूनिकेशन प्रोडक्टिविटी प्रोग्राम्स हैं। होम और बिजिनेस यूजर दोनो वैध सॉफ्टवेयर रखते हैं।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर की वैरायटी, पैकेज्ड सॉफ्टवेयर की तरह उपलब्ध है। आप इन सॉफ्टवेयर को रिटेल स्टोर के संबंधित विक्रेता या वैब पर खरीद सकते हैं। एक सॉफ्टवेयर पैकेज माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस जैसा एक सॉफटवेयर प्रोडकर होता है। शेयरवेयर, फ्रीवेयर और पब्लिक-डोमेन सॉफ्टवेयर जैसे कई सॉफ्टवेयर पैकेजेज भी उपलब्ध हैं। तो भी ये पैकेजेज रिटेल सॉफ्टवेयर पैकेजेज के मुकाबले कम क्षमता रखते हैं।

प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर (Productivity Software)

डेली एक्टिविटीज करते समय प्रोडक्टिविटी सॉफ्टवेयर ज्यादा एफिसिएंसी और इफेक्टिवनेस पाने के लिए लोगों की मदद करते हैं। इनमें वर्ड प्रोसेसिंग, स्प्रेडशीट, डाटाबेस, प्रेजेंटेशन, ग्राफिक्स, पर्सनल इन्फोर्मेशन मैनेजर, सॉफ्टवेयर सूट, एकाउंटिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट जैसे एप्लीकेशंस शामिल हैं।

वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर (Word Processing Software)

जब हमे कोई टेक्स्ट से संबन्धित कार्य करने होते हैं तब वर्ड प्रोसेसिंग एप्लिकेशन का उपयोग करते हैं। इसमे किसी भी प्रिंट होने वाले मैटीरियल की कंपोजीशन, एडीटिंग, फोमेंटिंग और प्रिंटिंग इत्यादि करते हैं । इसमे किसी भी फ़ाइल को सेव करके कंप्यूटर मैमरी मे या डिस्क मे रख सकते हैं।

वर्ड प्रोसेसिंग फंक्शंस में स्पेल चैकिंग, ग्रामर चैकिंग और थिसारस पर्यायवाची शब्दकोश शामिल हैं। थिसारस समान और विपरीत अर्थों वाले शब्द ढूंढ़ता है। Word Processor टेक्स्ट एडीटर जैसे सॉफ्टवेयर और अन्य सॉफ्टवेयर से अलग हो सकता है।

नोटपैड भी एक टेक्स्ट एडीटर वर्ड प्रोसेसर एप्लिकेशन है। एमएस वर्ड से भी पहले Notepad आ चुका था, इसमे भी कंपोजिंग और एडीटिंग के लिए सुविधा होती है । पहले डॉक्यूमेंट का फोरमेट ज्यादा अच्छे से नहीं करते थे। प्रोग्रामर्स, वेबवसाइट डिजायनर्स और कंप्यूटर सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा इस टेक्स्ट एडीटर का मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर (Spreadsheet Software)

स्प्रेडशीट एक एस सॉफ्टवेयर है, जो आपको रो और कॉलम में डाटा ऑर्गेनाइज करने की अनुमति देता है। ये रोज (Rows) और कॉलम्स (Columns) को सामूहिक रूप से वर्कशीट कहते हैं। सालों तक लोग कागज और पेंसिल से रोज और कॉलम्स में डाटा ऑर्गेनाइज करने जैसा मैन्युअल तरीका अपनाते थे। इलैक्ट्रॉनिक वर्कशीट में डाटा उसी तरह आर्गेनाइज किया जाता है, जैसे ये मैन्युअल वर्कशीट पर किया जाता है।

वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर के साथ ज्यादातर स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर में आपको वर्कशीट बनाने, एडिट और फोर्मेट करने वाले बेसिक फीचर्स होते हैं।

डाटाबेस सॉफ्टवेयर (Database Software)

डाटाबेस इस तरह आर्गेनाइज्ड डाटा का कलेक्शन होता है कि वह डाटा को एक्सेस, रीट्रीवल, सुधारने और प्रयोग करने की अनुमति देता है। मैन्युअल डाटाबेस में आप पेपर पर डाटा रिकार्ड करते होंगे और फाइलिंग केबिनेट में रखते होंगे। डाटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम डी.बी.एम.एस. कहलाने वाला डाटाबेस सॉफ्टवेयर ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो आपको डाटाबेस क्रिएट, एक्सेस और मैनेज करने की अनुमति देता है। डाटाबेस सॉफ्टवेयर का प्रयोग करके आप डाटाबेस में डाटा एड, चेंज और डिलीट कर सकते हैं, सॉर्ट और रीट्रीव कर सकते हैं तथा डाटाबेस के डाटा इस्तेमाल करते हुए फॉर्म्स और रिपोर्टस को बना सकते हैं।

पर्सनल कंप्यूटर के ज्यादातर लोकप्रिय डाटाबेस सॉफ्टवेयर पैकेजेज रोज और कॉलम्स में ऑर्गेनाइज्ड होते हैं। डाटाबेस टेबल के समूह में बने होते हैं। एक टेबल की एक रो रिकार्ड होती है, जिसमें पर्सन, प्रोडक्ट या इवेंट के बारे में जानकारी होती है। एक टेबल में एक कॉलम फील्ड होता है, जिसमें रिकार्ड के अंदर की जानकारी होती है।

प्रेजेंटेशन ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर (Presentation Graphics Software)

प्रेजेंटेशन ग्राफिक्स आपको ऐसे डाक्यूमेंट क्रिएट करने की अनुमति देते है, जो आइडियाज, मैसेजेस और अन्य इन्फोर्मेशन किसी ग्रुप को कम्युनिकेट करने में प्रयुक्त होते हैं। प्रेजेंटेशंस स्लाइड की तरह दिख सकते हैं, जो किसी बड़े मॉनीटर या किसी प्रोजेक्शन स्क्रीन पर डिसप्ले होते हैं। प्रेजेंटेशन का एक पेज स्लाइड कहलाता है। स्लाइड में विजय दर्शक को समझाने के लिए टेक्स्ट, ग्राफिक्स, मूवीज, साउंड आदि हो सकता है।

जब आप प्रेजेंटेशन बनाते हैं, तो आप स्लाइड टाइमिंग भी सैट कर सकते हैं, ताकि प्रेजेंटेशन बिना किसी देरी के अगली स्लाइड को स्वतः ही प्रदर्शित करे। हर स्लाइड के बीच अंतर के लिए विशेष इफेक्ट एप्लाई किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए एक स्लाइड धीरे-धीरे डिसाल्व हो और अगली स्लाइड देखने में आती जाए।
एक बार आपने प्रेजेंटेशन क्रिएट कर ली, तो उसे आप स्लाइड या विभिन्न अन्य फोर्मेट्स में देख और प्रिंट कर सकते हैं। प्रेजेंटेशन ग्राफिक्स में स्पेलिंग चैकर, फोंट फोर्मेटिंग केपेबिलिटीज, मौजूदा स्लाइड शो को वर्ल्ड वाइड वैब के लिए स्टैंडर्ड डाक्यूमेंट फोरमेट में बदलने की क्षमता जैसे वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर में पाए जाने वाले कुछ फीचर्स भी जुड़े होते हैं।

एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर (Accounting Software)

अकाउंटिंग एप्लिकेशन मे कंपनियां एकाउंटिंग से संबन्धित अपनी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शंस रिकार्ड या रिपोर्ट को रख सकती हैं। सॉफ्टवेयर से छोटे और बड़े बिजिनेस यूजर्स जनरल लेजर, एकाउंट रिसीवेबल, एकाउंट पेयेबल, परचेजिंग, इनवॉइस जॉब कोस्टिंग और पेरोल फंक्शंस संबंधी एकाउंटिंग एक्टिविटीज कर सकते हैं। आप भी चैक राइट व प्रिंट करने ट्रेक चेकिंग एकाउंट एक्टिविटी के लिए एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर का प्रयोग कर सकते हैं। डायरेक्ट डिपॉजिट और पेरोल सर्विसेस, नए एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर पैकेजेज द्वारा ऑन लाइन सपोर्टेड होते हैं। इन सर्विसेस के प्रयोग से कंपनी में पे चैक कर्मचारी के चैकिंग एकाउंट में सीधा डिपॉजिट हो सकता हैं और कर्मचारी के टैक्स इलैक्ट्रॉनिकली पेड किए जा सकते हैं।

केड (CAD)

कंप्यूटर एडिड डिजायन (CAD) का प्रयोग प्रोडक्ट्स को डिजायन, डेवलप और ऑप्टिमाइज करने के लिए होता है, एंड-कज्यूमर द्वारा प्रयोग की जाने वाली वस्तुएं हो सकती हैं या अन्य प्रोडक्ट्स में प्रयोग की जाने वाली इंटरमीडिएट वस्तुएं हो सकती हैं। पुर्जी के निर्माण में प्रयुक्त होने वाले टूल्स और मशीनरी की डिजाइन बनाने में विस्तृत केड का प्रयोग किया जा रहा है। छोटे रेजीडेंशियल टाइप्स (हाउसेस) से बड़े कमर्शियल और इंडस्ट्रियल स्ट्रक्चर्स (हॉस्पिटल्स और फैक्टरीज) तक सभी प्रकार के भवनों की ड्राफ्टिंग और डिजाइन में केड का प्रयोग किया जा रहा है।

पेंट/इमेज एडीटिंग सॉफ्टवेयर (Paint/ Image Editing Software)

इमेज एडीटिंग सॉफ्टवेयर पेंट सॉफ्टवेयर की सारी खूबियां देता है, ये इलस्ट्रेशन सॉफ्टवेयर भी कहलाते है जो स्केन की हुई इमेज में बदलाव करने और सुन्दर बनाने की अनुमति देता है। यूजर्स पेन, ब्रश, आईड्रॉपर और पेंट बकेट जैसे विभिन ऑन-स्क्रीन टूल्स से पिक्चर्स, शेप्स और अन्य ग्राफिकल इमेज ड्रा कर सकते हैं। आप फोटोग्राफ्स को रीटच, इमेज को कलर्स एडजस्ट व एनहांस और शैडो व ग्लो जैसे विशेष इफेक्ट्स दे सकते हैं। कुछ फुल-फीचर्ड इमेज एडीटर्स एडोब फोटोशॉप, पिक्चर पब्लिशर और फेक्टल डिजायन पेंटर हैं।

वीडियो व ऑडियो एडीटिंग सॉफ्टवेयर (Audio/ Video Editing Software)

वीडियो एडीटिंग सॉफ्टवेयर से. आप क्लिप कहलाने वाली वीडियो के एक हिस्से को मोडिफाई कर सकते हैं। उदाहरण के लिए आप वीडियो क्लिप की लंबाई घटा सकते हैं, क्लिप्स को रीऑर्डर कर सकते हैं या स्क्रीन के आर-पार हॉरीजेंटली जाने वाले शब्दों जैसे विशेष इफेक्ट्स दे सकते हैं। ऑडियो एडीटिंग सॉफ्टवेयर में साधारणतया फिल्टर होते हैं, जो ऑडियो क्वालिटी बढ़ाने के लिए बने होते हैं। ऑडियो क्लिप से डिस्ट्रेक्टिंग और बैकग्राउंड के शोर को फिल्टर हटा सकता है।

ई-मेल (E-Mail)

ई-मेल (इलैक्ट्रॉनिक मेल) पर्सनल और बिजिनेस यूजर दोनों के द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मुख्य कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी है। ई-मेल लोकल एरिया नेटवर्क या वाइड एरिया नेटवर्क जैसे कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए मैसेज का ट्रांसमिशन) है। आप ई-मेल सॉफ्टवेयर को ई-मेल मैसेज क्रिएट, सेंड, रिसीव, फोरवर्ड, स्टोर, प्रिंट और डिलीट करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

ई-मेल मैसेज, साधारण टैक्स्ट हो सकता है या वर्ड प्रोसेसिंग डाक्यूमेंट, ग्राफिकल इमेज या ऑडियो ।। वीडियो क्लिप जैसा अटैचमेंट हो सकता है।

वैब ब्राउसर्स (Web Browser)

वैब ब्राउसर, इंटरेट पर वैब पेज को एक्सेस और देखने के लिए इंटरफेस की तरह काम करता है। आज ब्राउसर्स । ग्राफिकल यूजर इंटरफेस है और सीखने व प्रयोग करने में काफी आसान है। ब्राउसर्स में वैब साइट के जरिए आपक नेवीगेट करने में मदद देने के लिए बटन सहित कई विशेष फीचर्स होते हैं।

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World Wide Web

What is World Wide web? | वर्ल्ड वाइड वेब क्या है? और क्या है इसका इतिहास ?

करीब 50 वर्षों से लोग एक ऐसे डाटाबेस का सपना देख रहे थे जो कि यूनीवर्सल ज्ञान एवं सूचनाओं (Information) को रखता हो तथा जिसके माध्यम से विश्व के लोगों को आपस में जोड़ा जा सके। विश्व का प्रत्येक व्यक्ति ऐसी जानकारी हासिल कर सके जो उसके लिये महत्वपूर्ण हो। यह सपना अब पूरा हो चुका है, इस तकनीक की खोज की जा चुकी है। इस तकनीक का नाम है World Wide Web (WWW).

www. Introduction (सामान्य परिचय):

वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) एक प्रकार का डाटाबेस है जो पूरे विश्व में फैला हुआ है। कोई भी यूजर इस के माध्यम से सूचनाओं को प्राप्त करता है। इसमें यूजर के द्वारा सूचना से सम्बन्धित शीर्षक दिया जाता है, इस शीर्षक से सम्बन्धित सभी सूचनाओं का वह उपयोग कर सकता है। पहले www में सिर्फ लिखित सूचनाएँ ही उपलब्ध थीं किन्तु अब चित्र(Picture), ध्वनि(Sound), कार्टून या कोई भी ऐसी सामग्री, जिसकी आप कल्पना कर सकते हैं, इसमें भी उपलब्ध हो जाती है।
वर्ल्ड वाइड वेब का अधिकांश प्रयोग इंटरनेट पर होता है, वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) इंटरनेट का एक भाग भी है। वर्ल्ड वाइड वेब को हम सूचनाओं की संरचना के रूप में भी परिभाषित कर सकते हैं। यह सारे ज्ञान को संक्षिप्त रूप में दर्शाता है।

वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) लचीला, आसानी से परिचालित करने योग्य तथा यूजर फ्रेन्डली (Friendly) गुण (Features) का मिला जुला रूप है। यह सेवायें इंटरनेट के माध्यम से प्रदान की जाती हैं। वर्ल्ड वाइड वेब और इंटरनेट, दोनों एक समान नहीं हैं परन्तु वे एक दूसरे से सम्बन्धित तथा एक दूसरे पर आश्रित हैं। वास्तव में वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट का सुपरसेट है, जिसको हम इंटरनेट का ग्राफिकल-इंटरफेस (Graphical Interface) कह सकते हैं। यह हमको सूचनाओं को ऐक्सेस करने के नये नये तरीकों के बारे में जानकारी प्रदान करता है जिसके द्वारा लोग आपस में एक दूसरे से जुड़ सकते हैं।

वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web)एक सिस्टम है जो संगठन तथा सम्बन्ध स्थापित करने के लिये प्रयोग में लाया जाता है। इसके माध्यम से इंटरनेट फाइल्स, स्रोत तथा सुविधाओं का उपयोग किया जा सकता है। वेब एक इंटरनेट आधारित संचालन सिस्टम है जो सूचना वितरण एवं प्रबन्धन के लिये परम आवश्यक है। वेब इंटरनेट पर यह सुविधा प्रदान करता है जिसमें Clients अपनी सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकें। वेब’ तकनीकी अन्य इंटरनेट सुविधाओं से भिन्न है। यह एक इंटरनेट स्रोत है जहाँ कोई किसी दूसरे विषय पर सूचनाओं तथा सूचनाओं से सम्बन्धित ज्ञान प्राप्त करता है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वेब पर सारी सूचनाएँ एक अच्छे तरीके से प्रदर्शित होती हैं। वेब अपने यूजरों को कम्प्यूटर नेटवर्क के माध्यम से मीडिया को ऐक्सेस करने के तरीके हैं । वेब एक प्रकार का इंटरफेस है जिसके माध्यम से यूजर कठिन से कठिन स्रोतों (Source) व सूचनाओं (Information) का आसानी से प्रयोग कर सकता हैं। इसको हम www, w3 और साधारण वेब के नाम से भी जानते हैं। वेब एक पेज होता है जिसमें सारी सूचनायें स्पष्ट रूप से एक दूसरे से जुड़ी रहती हैं।

वर्ल्ड वाइड वेब का इतिहास – History of the World Wide Web (www):

वर्ल्ड वाइड वेब से पहले इंटरनेट को संचालित करना, सूचनाओं को प्राप्त एवं उनका उपयोग करना अत्यन्त कठिन था। फाइलों को लोकेट (Locate) तथा डाउनलोड (Download) करने के लिये कुछ UNIX SKILLS का सहारा लेना पड़ता था जो कि www के बाद आसान हो गया।

टिम बर्नर ली (Tim Berners Lee) को हम वर्ल्ड वाइड वेब के पिता के रूप में पहचानते हैं। बर्नर, स्विटजरलैण्ड में स्थित, European organization Nuclear Research नामक प्रयोगशाला में भौतिकशास्त्री थे। टिम, इंटरनेट के संचालन तथा उसके प्रयोग में आने वाली कठिनाइयों के कारण निराश हो चुके थे। टिम ने European organization for Nuclear Research (CERN) में अपनी खोज, साझेदारी तथा अपने साथियों के साथ कम्यूनिकेशन के माध्यम से इंटरनेट पर लगातार कार्य किया। टिम पहले से ही समस्या को जानते थे इसलिये उन्होंने कार्य को आसान करने के लिये एवं इंटरनेट को आसानी से संचालित करने के लिये एक सिस्टम का निर्माण किया। सन् 1989, में उन्होंने www सिस्टम के प्रस्ताव को European organization for Nuclear Research के इलेक्ट्रोनिक्स एवं कम्प्यूटिंग विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया तथा इस प्रस्ताव पर फीड बैक (Feed Back) प्राप्त करने के बाद अपने सहयोगी राबर्ट कैलियो (Rabert Cailliao) के साथ Rewised कर इस प्रस्ताव को दोबारा प्रस्तुत किया। यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया एवं व्यापारिक रूप से यह प्रोजेक्ट शुरू हो गया।

प्रोजेक्ट के विकास के लिये वित्त प्रदान किया गया एवं सन् 1991 में इसकी Hint जनता के लिये प्रदान की गयी ताकि जनता इंटरनेट पर नये विकास को समझ सके।
फरवरी, 1993 में नेशनल सेन्टर फॉर सुपर कम्प्यूटिंग एप्लीकेशन द्वारा www का पहला संस्करण मोजेक (Mosaic) (Type of web browser) जनता के लिये प्रदान किया गया। यह एक आधारभूत सॉफ्टवेयर उत्पाद था जिसने www को नयी उँचाई प्रदान की। यह एक यूजर फ्रेंडली ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI) प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त मोजेक माउस (Mouse) के प्रयोग की अनुमति देता है, अर्थात् कोई यूजर बिना Keyboard के भी इसका प्रयोग कर सकता है।
अंत में एक साल बाद April 1994 में National Science Foundation (NSF) ने यह महसूस किया कि web ने सफलता की नई ऊँचाई प्राप्त कर ली है तथा लोगों ने वर्ल्ड वाइड वेब का उपयोग युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया है।

होम पेज ( Home Page) –

कोई भी संगठन, संस्था, कम्पनी या व्यक्ति इस सुविधा का उपयोग कर सकता है। इसमें अपने बारे में एवं अपने उत्पाद से सम्बन्धित दी जाने वाली सुविधाओं तथा अपनी शाखाओं में सम्बन्धित जानकारी दी जा सकती है, यह प्रचार का सबसे सस्ता व आसान उपाय है।

होम पेज पर लिखित सामग्री के अलावा ग्राफ, तस्वीरें, कार्टून, यहाँ तक कि ध्वनि भी उपलब्ध की जा सकती है। आजकल तो होमपेज पर मल्टीमीडिया (गाने, पिक्चर) आदि की सेवा भी उपलब्ध है। होम पेजों को एक साथ एक श्रेणी में रखा जा सकता है.
इंटरनेट से जुड़े अनेक कम्प्यूटरों में सूचनाओं का भंडार है। नेट पर ये सूचनायें आसानी से उपलब्ध हैं। इसमें विश्वकोष, पुरानी और नई लोकप्रिय किताबें, विशेष लेख, अखबारी कतरन, दुनियाभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधपत्र आदि शामिल हैं। पूरी पत्रिकायें व अखबार भी इस पर उपलब्ध हैं। सूचनाओं का यह इतना बड़ा भंडार है कि उपयोग करने वाले को यह पता नहीं रहता है कि उससे सम्बन्धित सूचना कहाँ पर होगी ?

वेब पेज (Web Page) –

वेब पेज एक वर्ल्ड वाइड document से ज्यादा कुछ भी नहीं होता है, एक वेब Page एक वर्ड प्रोसेसिंग डॉक्यूमैन्ट (Word Processing document) होता है।

इस तरह हम कह सकते हैं कि Weg page, web पर उपलब्ध एक hypertext document होता है। या hypertext या hypermedia की वह यूनिट जो वर्ल्ड वाइड वेब पर उपलब्ध रहती है उसे Web Page कहते हैं। इसको बनाने के लिये हमें HTML (Hypertext Markup language) का इस्तेमाल करना पड़ता है।

पेज की संरचना (Structure of a Webpage)

एक वेब पेज दो भागों से मिलकर बना होता है

1 Head, 2. Body.

Head – यह किसी वेब पेज का पहला हिस्सा होता है, इसमें पेज का शीर्षक तथा अन्य Parameter उपलब्ध रहते हैं जिन्हें Browser द्वारा प्रयोग में लाया जाता है।
Body – किसी पेज के वास्तविक contents पेज के इस हिस्से में रहते हैं और वह content, Text व Tag को शामिल रखते हैं।

वेब साइट (Website)

वेब साइट साधारण रूप से वेब पेजों (Web pages), से मिलकर बनी होती है। अपने व्यवहार के अनुसार वेब एक दूसरे के मध्य link प्रदान करता है जो कि चाहे अलग-अलग पेजों में ही क्यों न हो। एक पेज दूसरे अलग पेजों से link बना सकता है चाहे उनमें फोटो, कार्टून या कोई अन्य सामग्री हो।

इस प्रकार, हम कह सकते हैं कि web site एक दूसरे से जुड़े हुए पेजों से मिलकर बना होता है। इसके कुछ उदाहरण निम्न हैं :

(1) http://www.google.com
(2) http://www.youtube.com
(3) http://www.msn.com
(4) http://www.hotmail.com

Working of the web (वेब कैसे काम करता है)?

वेब सॉफ्टवेयर, Client-server संरचना को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। वेब क्लाइंट एक प्रोग्राम है जो documents के लिये किसी सर्वर पर अपनी request भेजता है।

वेब सर्वर भी एक प्रोग्राम है जो request 1 को प्राप्त करके मांगे गये document का विवरण client को वापस भेजता है। वितरित संरचना (Distributed structure) का अर्थ यह है कि कोई भी क्लाइंट प्रोग्राम किसी भी सर्वर से जुड़े अन्य कम्प्यूटर पर क्रियान्वित हो सकता है, संभवतः दूसरे कमरे या दूसरे देश में। सारे प्रोग्राम अपने-अपने कार्यों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं तथा स्वतन्त्र रूप से कार्यों को आगे बढ़ाते हैं क्योंकि सर्वर सिर्फ उस समय कार्य करता है जब कोई क्लाइंट किसी डाक्यूमेंट की मांग करता है।

वेब प्रक्रिया का कार्य निम्नलिखित है-

(1) किसी प्रोग्राम पर कार्य करते समय यूजर किसी hyperlink के माध्यम से किसी दूसरे डॉक्यूमेंट से जुड़ सकता है।

(2) वेब क्लाइंट किसी hyperlink के माध्यम से किसी Address का उपयोग करता है जो हमें किसी निश्चित नेटवर्क पर स्थित वेब सर्वर से जोड़ता है तथा हमें History of computer document के बारे में बताता है।

3) सर्वर अपनी प्रतिक्रिया किसी Text को भेजकर तथा उस टेक्स्ट में पिक्चर, साउन्ड या मूवी को क्लाइंट तक भेजकर व्यक्त करता है और वह क्लाइंट उसको यूजर स्क्रीन पर भेजकर व्यक्त करता है।

वर्ल्ड वाइड वेब
World wide web
www
knowledge4utech.com

वेब इस तरह के हजारों लेन-देनों को प्रति घंटा सारे विश्व में क्रियान्वित करता है।

वेब ब्राउजर (Web Browser)

यह एक ऐसा प्रोग्राम है जिसका प्रयोग इंटरनेट पर उपलब्ध सारी सुविधाओं तथा स्रोतों को वर्ल्ड वाइड वेब के माध्यम से ऐक्सेस करने में किया जाता है। वेब ब्राउजर, एक वर्ल्ड वाइड वेब क्लाइंट एप्लीकेशन है जिसका उपयोग hypertext documents तथा वेब पर उपलब्ध अन्य HTML प्रलेखों को Link के माध्यम से प्राप्त करने में किया जाता है। इस तरह हम कह सकते हैं कि वेब ब्राउजर एक ऐसा प्रोग्राम है जिसके माध्यम से हम www.website से contact करते हैं।

वर्ल्ड वाइड वेब यह मांग नहीं करता है कि अपना एक जैसा ही वेब ब्राउजर उपयोग में लायें। कुछ प्रचलित वेब ब्राउज़र निम्नलिखित हैं :

(1) Mosaic (2) क्रोम (Chrome)

(3) Opera (4) Internet Explorer.

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INTERNET VS INTRANET

Internet VS Intranet | इन्टरनेट व इन्ट्रानेट में अन्तर

ज़्यादातर लोग Internet VS Intranet मे भ्रमित रहते है, उन्हे नहीं मालूम होता की इन दोनों मे क्या अंतर है? कहाँ कहाँ पर इंका उपयोग होता है। सामान्यतः इंटरनेट का प्रयोग सभी जगहों पर होता है । सभी User इसका उपयोग घरों मे, ऑफिस मे या मोबाइल और कम्प्युटर पर आसानी से कर सकते हैं, जबकि इन्टरानेट का उपयोग निजी तोर पर ही किया जा सकता है।

Internet VS Intranet -जैसा कि हम जानते हैं कि इन्टरनेट एक नेटवर्कस का नेटवर्क है, जो कि सम्पूर्ण विश्व को आपस में जोड़ता है।
इसी प्रकार इन्ट्रानेट (Intranet) किसी कंपनी का आंतरिक नेटवर्क है जो कि इंटरनेट मापका (Standards) का उपयोग करता है।
इन्ट्रानेट, इन्टरनेट सॉफ्टवेयर व इन्टरनेट प्रोटोकॉल का प्रयोग करता है परन्तु यह हमेशा इन्टरनेट से स्थाई कनेक्शन नहीं रखता है।

इन्टरनेट व इन्ट्रानेट में अन्तर (Difference between Internet & Intranet)

Internet VS Intranet
  • इन्ट्रानेट के माध्यम से किसी लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) को जोड़ा जा सकता है। जबकि इन्टरनेट लोकल एरिया नेटवर्क व वाइड एरिया नेटवर्क (WAN) दोनों को स्थापित कर सकता है।
  • इन्ट्रानेट, इन्टरनेट मापकों का प्रयोग करता है, परन्तु किसी एक निश्चित जगह या संगठन में जबकि इंटरनेट इन मापकों (प्रोटोकॉल, टूल आदि) का प्रयोग विश्वव्यापी रूप में करता है।
  • इंट्रानेट mail server व सूचनाओं का प्रयोग निजी न्यूजग्रुप बनाने में करता है, जबकि इंटरनेट Mail server व सूचनाओं का प्रयोग सार्वजनिक न्यूजग्रुप बनाने में करता है।
  • हम किसी इंटरनेट साइट को बिना इंट्रानेट साइट के बना सकते हैं, जबकि इंट्रानेट साइट को बिना इंटरनेट साइट की सहायता के नहीं बनाया जा सकता। परन्तु हम इंट्रानेट साइट को इंट्रानेट की सहायता के बिना लागू कर सकते हैं।
  • इंटरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या इंट्रानेट प्रयोग करने वालों से बहुत अधिक होती है। अत: इंटरनेट से जुड़ा हार्डवेयर, इंट्रानेट के साथ जुड़े हार्डवेयर की तुलना में बहुत अधिक क्षमता वाला होता है। इसका अर्थ यह है कि इंटरनेट के माध्यम से हम सूचनाओं, विचारों का आदान-प्रदान विश्व में कहीं भी कर सकते हैं, पर इंट्रानेट के माध्यम से यह आदान-प्रदान कुछ सीमित क्षेत्र तक ही होता है।

संक्षिप्त रूप में हम यह कह सकते हैं कि इंट्रानेट इंटरनेट से भिन्न नहीं है, पर दोनों में केन्द्रण का अन्तर’ होता है अर्थात् इंटरनेट किसी कंपनी के अन्दर व बाहर दोनों पर केन्द्रित. होता है, जबकि इन्ट्रानेट किसी कंपनी या क्षेत्र के भीतर।

इंटरनेट और इंट्रानेट की कुछ समानताएं – Similarities Internet and Intranet


इंटरनेट और इंट्रानेट दोनों एक नेटवर्क ही हैं. इसलिए जाहिर हैं इंटरनेट एवं इंट्रानेट की कार्यप्रणाली में भी समानताएं होगी।

  • इंटरनेट और इंट्रानेट दोनों में समान तकनीक Internet Technology का इस्तेमाल होता हैं।
  • दोनों को वेब ब्राउजर द्वारा Access किया जा सकता हैं।
  • इंटरनेट और इंट्रानेट दोनों किसी नेटवर्क को Represent करते हैं।

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कुसुम योजना

कुसुम योजना 2021: Kusum Yojana kya hai? | PM Kusum Scheme

आज जानेंगे सिचाई कार्य मे किसानों को आत्म-निर्भर बनाने के लिए सुरू की गई योजना कुसुम योजना। यानी किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महा अभियान के वारे मे। ये योजना किसानों की सिचाई समस्या का समाधान तो बनेगी ही, आमन्दनी बड़ाने का बेहतर विकल्प भी साबित होगी।
कुसुम यानीकि किसान ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महा अभियान योजना का ऐलान केंद्र सरकार ने आम बजट 2018-19 मे किया था। देश के अलग अलग हिस्सों मे सिचाई सुबीधाओ के बाद भी खेत बिजली कटौती के चलते सूखे रह जाते हैं। ऐसे मे ये योजना दोहरी समस्याओं का हल साबित होगी।

योजना का उद्देश्य:

इस योजना का उदेश्य बिजली और सिचाई की समस्या से जूझ रहे किसानों को राहत देना है। बिजली संकट से जूझ रहे इलाकों को ध्यान मे रखते हुए देश भर मे सिचाई के लिए स्तेमाल होने वाले सभी पंपों को सोलर ऊर्जा से चलाने के लिए इस योजना की सुरुवात की गई है। इससे किसान के बिजली खर्च मे भी बचत होगी, और जो किसान Diesel से पम्प चलाते हैं उन्हे भी थोड़ी राहत मिलेगी, साथ ही समय पर फसलों की सिचाई भी संभव होगी।

क्या है कुसुम योजना:

कुसुम योजना के तहद केंद्र सरकार की ओर से किसानो को subsidy पर सोलर कृषी पम्प मुहाइया कराये जा रहे हैं। योजना के तहद गरीबों व जरूरत मंदों को कम मूल्य पर सोलर पम्प दिये जाएँगे, ताकि गरीब व छोटे वर्ग के किसानो को फायदा पहुँच सके। देश के ऐसे क्षेत्र जहां आज भी किसान की फसले वक्त पर सिचाई नहीं ले पाती और सिचाई न मिलने के चलते किसान की फसलें खराब हो जाती हैं। कुसुम योजना उन सभी किसानों के लिए संजीवनी का काम करेगी।

Kusum Yojana (Solar Pumps)
Solar Pumps

योजना के तहद मोजूदा कृषी पंपों को सौर ऊर्जा पम्प मे परिवर्तित किया जाएगा। किसानो को नए सोलर पम्प दिये जाएंगे। साथ ही खेती के लिए सोलर Tubewel भी मुहैया कराये जाएंगे।

कुसुम योजना से क्या लाभ मिलेगा:

कुसुम योजना के अंतर्गत 7.5 HP लोड तक के किसानो को इसमे सामिल किया गया है। ये किसान अपनी जमीन पर सोलर पैनल लगवा कर इससे बनाने वाली बिजली का उपयोग सिचाई पम्प चलाने के लिए और खेती के कामों के लिए कर सकते हैं।
इसके अलावा खर्च करने के बाद बची हुई बिजली यानि ज्यादा उत्पादन अगर बिजली का होगा तो इसे किसान ग्रिड को भी बेच सकते हैं। इससे उन्हे अतरिक्त आमन्दनी होगी। इससे किसान को तो फायदा होगा ही, देश के ऐसे गाँव जहां बिजली की भारी समस्या है, वहाँ अतरिक्त बिजली भी उपलब्ध होगी।

कहाँ पर सुरू कर सकते हैं व कितनी सब्सिडि मिलेगी कुसुम योजना मे:

इस योजना के तहद ऐसे किसानों के यहाँ सोलर पैनल लगवाए जाएंगे जिनके सिचाई पम्प डीजल से चलते हैं। इससे डीजल की खपत कम होगी, किसान के खेत मे लगने वाली लागत भी कम होगी और इस पर खर्च आयेगा वो आयेगा 1.40 लाख करोड़ रुपये का। योजना पर लागने वाले कुल खर्च मे 48 हजार करोड़ केंद्र सरकार और 48 हजार करोड़ रुपये देगी राज्य सरकार, इसके अलावा करीब 45 हजार करोड़ रुपये कृषि उपभोक्ताओ को लोन के रूप मे नावार्ड स्थानीय बंकों के माध्यम से finance करेगा। इस तरह कुल 90 फीसदी रकम का इंतजाम किया जाएगा। और बचा हुआ 10% वहन करना होगा किसान को।

केंद्र व राज्य सरकारो की ओर से किसानों को subsidy के रूप मे दी जाने वाली 60 फीसदी रकम सीधे किसानों के खातों मे ट्रान्सफर कर दी जाएगी। बेंक से जो लोन मिलेगा उसका भुगतान किसान उस आमन्दनी से करेगा जो उसे सोलर ऊर्जा बेचकर ग्रिड से मिलेगी।
लोन की अबाधि अधिकतम 7 साल इसमे रक्खी गई है। अभी तक 3.5 KV का सोलर फनेल लगवाने पर किसान को 10% की सब्सिडि मिलती थी, और उसको करीब 2.5 लाख रुपये अपने जेब से चुकाने पड़ते थे। लेकिन अब 3.5KV का सोलर पेनल लगवाने पर किसान को अब सिर्फ 40 हजार रुपये अपने जेब से भरने होंगे।

ये सोलर पेनल लगवाना ऐसे किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा जिनकी भूमि बंजर है और खेती के लायक नहीं है। सोलर पेनल लगवा कर ऐसे किसान बिजली ग्रिड को सप्लाइ कर सकते हैं या फिर जमीन को बिजली उत्पादन के उदेश्य से किराये पर भी देकर वो कमाई कर सकते हैं।

कितना फायदा होगा इस योजना से:

योजना के तहद अगर कोई डेवलपर किसान की जमीन पर सोलर पेनल लगवाना चाहता है तो उसे किसान को 30 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से किराया भरना होगा। इससे किसान को हर महीने 6600 रुपये की हर महीने आमंदनी होगी यानि साल का 80,000 रु. । और जमीन पर मालिकाना हक किसान का ही रहेगा। वो चाहे तो सोलर पेनल लगने के बाद भी अपनी जमीन पर छोटी मोटी खेती कर सकता है।

जिन इलाकों मे बिजली ग्रिड नहीं है वहाँ कुसुम योजना के पहले चरण मे किसानों को 17.5 लाख सोलर पम्प सेट दिये जाएँगे। और जिन जगहों पर बिजली ग्रिड मौजूद हैं वहाँ किसानों को 10 लाख पम्प सेट दिये जाने की प्लानिंग है। इस तरह पहले चरण मे देश भर मे 27.5 लाख सोलर पेनल लगवाए जाएंगे।
योजना के अगले चरण मे किसानों के खेतों के ऊपर या फिर खेतों के मेड़ों पर सोलर पेनल लगवाने की प्लानिंग है। और 10 हजार मेगा वाट की सोलर एनर्जि प्लांट किसान की बंजर भूमि पर लगवाए जाएंगे।

कुसुम योजना के जरिये सरकार देश के 3 करोड़ सिचाई पम्पो को सोलर एनर्जि से चलाने की प्लानिंग कर रही है। सरकार का कहना है की देश के सभी सिचाई पम्पो के लिए अगर सोलर एनर्जि का स्तेमाल किया जाता है तो बिजली की बचत तो होगी ही साथ ही सोलर फेनल से 28 मेगा वाट आतरिक्त बिजली का उत्पादन भी होगा।

कुसुम योजना के लिए कहाँ पर करें आवेदन

सोर्य ऊर्जा को बड़ावा मिलेगा और प्रदूषण कम होगा वो अलग। कुसुम योजना की ज्यादा जानकारी के लिए एक official वैबसाइट भी बनाई गई है www.mnre.gov.in जहां जाकर आप इस योजना की ज्यादा जानकारी प्रपट कर सकते हैं। अगर आप किसान हैं और अगर आप कुसुम योजना के लिए आवेदन करना चाहते हैं तो अपने नजदीकी कार्यालय मे जाकर संपर्क कर सकते हैं।
आशा है की किसान भाई इस योजना का लाभ जरूर उठाएंगे।

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Database

डाटाबेस क्या है? तथा उनकी विशेषताएँ | What is Database Explain its Features in Hindi?

प्रश्न-1 डाटाबेस क्या है? कुछ डाटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम के नाम लिखिए तथा उनकी विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। What is a database? Write the name of some database management systems and mention their features.

What is Database? डाटाबेस क्या है?

Database- परस्पर सम्बन्धित डाटा और इस डाटा को प्रयुक्त करने वाले प्रोग्राम्स का समुच्चय डाटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम (DBMS) कहलाता है। डाटा के संकलन को डाटाबेस (Database) कहते हैं। डाटाबेस में किसी संस्था या प्रणाली की सम्पूर्ण सूचना संग्रहित (Store) रहती है। डाटाबेस को निश्चित उद्देश्य की पूर्ति के लिए तैयार किया जाता है। डाटाबेस तैयार करते समय इसके एप्लिकेशन और एण्ड यूजर (End User) की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाता है। डाटाबेस को एक सॉफ्टवेयर पैकेज ‘डाटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम (DBMS)’ की सहायता से मैनेज किया जाता है।

डाटाबेस सूचना के संग्रहणऔर प्राप्ति को प्रभावशाली (Efficient) और सुगम (Convenient) बनाना ही DBMS का प्रमुख उद्देश्य होता है।

DBMS एक सॉफ्टवेयर है जिसकी सहायता से यूजर डाटाबेस को रिकॉर्ड और मेन्टेन करते हैं। यह एक ऐसा एनवायरनमेन्ट (Environment) प्रदान करता है जिसमें डाटा को सरलता और प्रभावशाली रूप से स्टोर और रिट्रीव (प्राप्त) किया जा सकता है। वृहद सूचना संकलन का प्रबन्धन करने के लिए डाटाबेस सिस्टम तैयार किया जाता है।

What is Database?
What is Database?

डाटा के इस प्रबन्धन में निम्नलिखित का समावेश रहता है

(i) सूचना संग्रहण के स्ट्रक्चर की परिभाषा (Definition),

(ii) सूचना को सुव्यवस्थित (Manipulation) करने की कार्यविधि का प्रावधान,

(iii) सिस्टम क्रैश और अवैध घुसपैठ से सूचना की सुरक्षा प्र प्रणाली आदि।

DBMS सॉफ्टवेयर के नाम (Name of Some DBMS Software’s)

निम्नलिखित डाटाबेस मैनेजमेन्ट सिस्टम सॉफ्टवेयर मार्केट में पाये जाते हैं

(i) माई एस.क्यू.एल. (My SQL)

(ii) माइक्रोसॉफ्ट एक्सैस (Microsoft. Access),

(iii) फॉक्स-प्रो (FoxPro)

(v) डी.बी. 2 (DB 2)

(vi) सीबेस (Sybase)

(iv) ओरेकल (Oracle)

माई एस.क्यू.एल. की विशेषताएँ (Features of My SQL) –

निम्न सूची My SQL डाटाबेस सॉफ्टवेयर की महत्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन करता है

(i) इन्टर्नल और पोर्टेबिलिटी (Internal or Portability)

  • सी और सी++ में लिखा गया।
  • विभिन्न कम्पाइलर्स के साथ परीक्षण किया गया।
  • कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर काम करता है।
  • पोर्टेबिलिटी के लिए GNU Automatic, Autocut और Live tool का उपयोग।

(ii) स्तंभ प्रकार (Column Type)

  • कई कॉलम (Column) टाइप का उपयोग (जैसे साइन्ड और अन्साइन्ड इन्टीजर्स)
  • फिक्स्ड लम्बाई और वैरिएबल (Variable) लम्बाई रिकॉर्ड।

(iii) स्टेटमेन्ट और फंक्शन (Statement and Function)

  • पूर्ण ऑपरेटर और फंक्शन का चयन (Select) तथा कहाँ (Where) खण्ड (Clause) में समर्थन।
  • टेबल और कॉलम के उपनाम (Aliases) का समर्थन।

(iv) सिक्योरिटी (Security)

(v) स्कैलेबिलिटि और सीमाएँ (Scalability and Limit)

(vi) Connectivity

(vii) क्लाइन्ट्स और टूल्स (Clients and Tools)

माइक्रोसॉफ्ट एक्सैस की विशेषताएँ (Features of Microsoft Access) –

(i) डाटाबेस (Database) –

डाटाबेस एक फाइल है जिसमें डाटा तथा उससे सम्बन्धित ऑब्जैक्ट को स्टोर किया जाता है।

(ii) टेबल (Table) –

प्रत्येक टेबल कस्टमर से सम्बन्धित सूचना को स्टोर करती है।

(iii) क्वैरी (Query)-

क्वैरी टेबल स्टोर डाटा के विभिन्न स्वरूपों के देखने के काम आती है।

(iv) रिपोर्ट (Report) –

क्वैरी द्वारा चयनित डाटा के प्रिन्ट होने से पहले रिपोर्ट के द्वारा देखा जाता है।

(v) डाटा एक्सैस पेज (Data Access Page) –

यह एक ऑब्जैक्ट है।

(vi) मैक्रो (Macro) –

मैक्रो किसी घटना के लिए एक या एक से अधिक कार्यों का समूह है।

(vii) मॉडयूल (Module) –

यह कस्टम प्रक्रियाओं (Custom Procedures) से बना एक ऑब्जैक्ट है।

फॉक्स-प्रो की विशेषताएँ (Features of Foxpro) –

  • लोकल डाटाबेस (Local Database)
  • लेन डाटाबेस (LAN Database)
  • SQL डाटाबेस सर्वर (SQL Database Server)

(i) टाईप (Type)

  • Window
  • DOS

(ii) टेबल व्यू (Table/View)

  • लोकल (Local)
  • रिमोट (Remote)

ओरेकल की विशेषताएँ (Features of Oracle) –

(i) स्कैलेबिलिटि और परफॉर्मेंस (Scalability and Performance)

  • कॉनकरैन्सी (Concurrency)
  • रीयल कनसिसटेन्सी (Real Consistency)
  • पोर्टेबिलिटि (Portability)

(ii) मैनेजेबिलिटि (Manageability)

  • सेल्फ मैनेजिंग डाटाबेस (Self Managing Database)
  • SQL Plus
  • ASM
  • रिसोर्स मैनेजर (Resource Manager)
  • शैड्यूलर (Scheduler)

(iii) बैकअप और रिकवरी (Backup and Recovery)

(iv) हाई एवेलेबिलिटि (High Availability)

(v) बिजनेस इन्टैलीजेन्स (Business Intelligence)

(vi) सिक्योरिटी (Security)

(vii) डाटा इंटेग्रिती (Data Integrity)

DB2 की विशेषताएँ (Features of DB2)

(i) इनोवेटिव मैनेजेबिलिटी (Innovative Manageability)

  • कॉन्फिग्युरैशन एडवाइजर (Configuration Advisor)
  • हैल्थ सेन्टर (Health Center)
  • मैमोरी विजुअलाइजर (Memory Visualizer)

(ii) इनफॉर्मेशन इन्टीग्रेशन फाउन्डेशन (Information Integration Foundation)

  • कन्ज्यूमर को सपोर्ट करता है व वेन सर्विस प्रोवाइड करता है।
  • स्टोर कम्पोज, वैलिडेट, XML data

(ii) ई-बिजनेस फाउन्डेशन (E-Business Foundation)

  • कनैक्शन कॉन्सेन्ट्रेटर फॉर यूजर स्कैलेबिलिटी (Connection Concentrator for User Scalability)
  • डायनामिक कॉन्फिग्युरैशन (Dynamic Configuration)
  • ऑनलाइन लोड (Online Load)
  • न्यू क्लाइन्ट आर्किटेक्चर (New Client Architecture)

(iv) यूजर मेन्टेन्ड् सारांश या समरी टेबल (User Maintained Summary Table)

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How to Create Save and Open a File in MS- Word?

Create Save Open a File in Word: एमएस वर्ड मे फ़ाइल को कैसे बनाते है, उसके बाद कैसे उसे Save करते हैं? और सेव की हुई फ़ाइल को कैसे फिर से स्क्रीन पर खोलते है? जाने Shortcuts के साथ।

वर्ड में नई फ़ाइल कैसे बनाएँ? How to Create a New Document File?

वर्ड में नया डॉक्यूमेन्ट तीन तरीकों से बनाया जा सकता है-

  • फाइल मेन्यू में New ऑप्शन को क्लिक करके
  • Access Toolbar में New आइकन को क्लिक करके
  • की-बोर्ड से Ctrl + N बटन के Shortcut को दबा कर।

एक्सैस टूलबार में New आइकन क्लिक करने पर नया डॉक्यूमेन्ट खुल जाता है और उसमें टाइप किया जा सकता है।

फाइल मेन्यू में New ऑप्शन को क्लिक करने पर एक विण्डो खुलती है, जिसमें एक टैम्प्लेट में कई फॉर्मेट (सामान्य, फैक्स, मैमो, रिपोर्ट, पब्लिकेशन, वेब पेज आदि) सैट होते हैं, इनमें से जरूरत के अनुसार किसी का भी चयन किया जा सकता है

और की (Key) के माध्यम से टाइप करके नया डॉक्यूमेन्ट तैयार किया जाता है। नए डॉक्यूमेन्ट के लिए ‘Blank Document’ का चयन किया जाता है।

create a Document in Word
Create a New Document

MS-Word मे डॉक्यूमेन्ट को सेव कैसे करते हैं? (How to Save a Document in Word)?

नया डॉक्यूमेन्ट बनाने के बाद उसे पुनः उपयोग करने के लिए Save करना जरूरी है।

पुराने डॉक्यूमेन्ट को खोलकर उसमें परिवर्तन करने के बाद उस परिवर्तन को दर्ज करने के लिए भी उसे Save करना जरूरी होता है।
इस कार्य को निम्न तीन तरीकों से किया जा सकता है

  • माउस की सहायता से फाइल मेन्यू में से Save ऑप्शन क्लिक करके
  • एक्सैस टूलबार में से Save आइकन पर क्लिक करके
  • की-बोर्ड से Ctrl + S बटन दबा कर।

किसी सेव किए गए डॉक्यूमेन्ट को नाम बदलकर भी सेव किया जा सकता है।
इसके लिए Save As ऑप्शन का उपयोग किया जाता है
फ़ाइल मेनू मे Save As को सिलैक्ट करने के बाद डॉयलॉग बॉक्स खुलता है उसमें नया फाइल नाम टाइप करके उसे सेव कर दिया जाता है।

Save a Document in Word
Save a Document in Word

वर्ड मे पुराना डॉक्यूमेन्ट कैसे खोलते हैं? (How to Open a Document in Word )?

MS Word (वर्ड) में यदि किसी पुराने डॉक्यूमेन्ट को देखना हो या उसमें कोई परिवर्तन करना हो तो उस पुराने डॉक्यूमेन्ट को खोला जाता है, जो निम्न तरीकों से किया जा सकता है

  • फाइल मेन्यू में Open ऑप्शन को क्लिक करके
  • Open आइकन को क्लिक करके,
  • की-बोर्ड पर Ctrl + O बटन दबा कर।
  • Access Toolbar से Open आइकॉन को क्लिक करके

फाइल मेन्यू में से Open ऑप्शन को सिलैक्ट करने पर या स्टैण्डर्ड टूलबार में से Open आइकन को क्लिक करने पर विण्डो स्क्रीन पर एक डायलॉग बॉक्स खुलता है, जिसमें सारी फाइल्स की सूची होती है। इसमें से वांछित फाइल या फोल्डर को सिलैक्ट करके Open क्लिक करके पुराने डॉक्यूमेन्ट को खोला जा सकता है और उसमें वांछित परिवर्तन किया जा सकता है।

Open A Document
Open A Document

Create Save Open :

तो आपने जाना की कैसे एमएस वर्ड मे फ़ाइल को Create Save Open कर सकते हैं अलग अलग तरीकों से।

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File Management in Windows

File Management in Windows OS | File और Folder क्या है

File Management in Windows – विण्डोज एक्सपी में फाइल एवम् फोल्डर का प्रबन्धन विण्डोज एक्सप्लोरर प्रोग्राम की सहायता से किया जाता है। जबकि विंडोज 10 मे इसे This PC से खोलते हैं।

कम्प्युटर फ़ाइल क्या है (What is File)?

कम्प्यूटर के हार्डडिस्क पर डाटा को स्टोर करने की इकाई फ़ाइल (File) कहलाती है। फाइल्स की पहचान के लिए उन्हें अलग-अलग नाम दिये जाते हैं।

कम्प्युटर फोंल्डर क्या है (What is Computer Folder)-

फाइल्स एवं डाटा को सुनियोजित तरीके में व्यवस्थित करने के लिए फोल्डर्स (Folders) का प्रयोग किया जाता है। एक फोल्डर में अनेकों फाइल्स व फोल्डर्स को रखा जा सकता है। पहचान के लिए प्रत्येक फोल्डर का एक निश्चित नाम रखा जाता है।

फाइल मैनेजमेन्ट (File Management in Windows) –

विण्डोज एक्सपी में फाइल एवम् फोल्डर का प्रबन्धन विण्डोज एक्सप्लोरर प्रोग्राम की सहायता से किया जाता है। जबकि विंडोज 10 मे इसे This PC से खोलते हैं। Explorer को खोलने के लिए निम्नलिखित विधि का प्रयोग करते हैं

(a) Start – All Programs – Accessories पर क्लिक कीजिए।

(b) अब Windows Explorer/ This PC पर क्लिक कीजिए।

(c) वैकल्पिक रूप से विण्डोज एक्सप्लोरर को खोलने के लिए Start बटन पर राइट क्लिक करेंगे व प्राप्त लिस्ट में Explorer पर क्लिक करेंगे।

 File Management in Windows
File Management in Windows

फाइल/फोल्डर को खोलना (Opening the File/Folder) –

एक्सप्लोरर में बनी हुई फाइल या फोल्डर को ढूंढ कर उसे डबल क्लिक (Double Click) करने पर वह फाइल/फोल्डर खुल जाता है।

फोल्डर तैयार करना (Creating Folder) –

किसी भी ड्राइव में फोल्डर तैयार करने के लिए अग्रलिखित विधि का प्रयोग किया जाता है

(a) एक्सप्लोरर में उस ड्राइव या फोल्डर को क्लिक कर चयन (Select) करें, जिसमें नया फोल्डर बनाना है।

(b) File मेन्यू पर क्लिक कर प्राप्त लिस्ट में New पर क्लिक करें।

(c) अब प्राप्त लिस्ट में Folder विकल्प पर क्लिक करें।

(d) इससे New Folder बन जाता है, जिसमें आवश्यकतानुसार नाम टाइप करें।

Folder in Windows
Folders in Windows

फाइल तैयार करना (Creating File) –

किसी फोल्डर अथवा ड्राइव पर फाइल तैयार करने के लिए निम्नलिखित विधि का प्रयोग किया जाता है

(a) एक्सप्लोरर में उस ड्राइव या फोल्डर को क्लिक कर चयन करें, जिसमें नई फाइल बनानी है।

(b) File मेन्यू को क्लिक कर प्राप्त लिस्ट में New विकल्प पर क्लिक करें।

(c) अब प्राप्त लिस्ट में उपलब्ध विकल्पों में से जिस तरह की फाइल बनानी है, उस विकल्प पर क्लिक करें, जैसे- Text Document, Word Document आदि।

(d) फाइल का नाम टाइप करें।

फाइल/फोल्डर का नाम परिवर्तित करना (Renaming of File/Folder) –

बन्द फाइल/फोल्डर का नाम परिवर्तित करना सम्भव है। इसके लिए निम्नलिखित विधि का प्रयोग करते हैं

(a) एक्सप्लोरर में उस फाइल या फोल्डर को क्लिक कर चयन (Select) करें, जिसका नाम बदलना चाहते हैं।

(b) उस फाइल/फोल्डर पर माउस रखे हुए Right Click करें। (c) अब प्राप्त लिस्ट में Rename को क्लिक करें।

(d) फाइल या फोल्डर का नया नाम टाइप कर Enter करें।

फाइल/फोल्डर को कॉपी करना (Copying File/Folder)-

फाइल को कॉपी करने के लिए निम्नलिखित विधि का प्रयोग करते हैं

(a) एक्सप्लोरर में उस फाइल या फोल्डर का चयन करें, जिसे कॉपी करना चाहते हैं।

(b) Edit मेन्यू पर क्लिक कर प्राप्त लिस्ट में Copy पर क्लिक करें।

(c) अब उस ड्राइव या फोल्डर को क्लिक कर Select करें, जहाँ फाइल या फोल्डर को कॉपी किया जाना है।

(d) Edit मेन्यू को क्लिक कर प्राप्त लिस्ट में Paste पर क्लिक करें।

फाइल/फोल्डर को फ्लॉपी डिस्क में कॉपी करना (Copying File/Folder to Floppy Disk)-

फाइल/फोल्डर को फ्लॉपी डिस्क में कॉपी करने के लिए निम्नलिखित विधि का प्रयोग करते हैं

(a) जिस फ्लॉपी डिस्क में फाइल या फोल्डर को कॉपी करना चाहते हैं उसे फ्लॉपी ड्राइव में डालें।

(b) एक्सप्लोरर विण्डो में उस फाइल/फोल्डर को क्लिक कर चयन करें, जिसे फ्लॉपी में कॉपी करना चाहते हैं।

(c) उस फाइल या फोल्डर पर माउस रखे हुए Right Click करें।

(d) प्राप्त लिस्ट में Send to पर क्लिक करें।

(e) अब प्राप्त लिस्ट मे 3% Floppy (A) पर क्लिक करें। इससे चयनित फाइल/फोल्डर Floppy Disk में कॉपी हो जाता है।

फाइल/फोल्डर स्थानान्तरित करना (Moving the File/Folder) –

इसकी विधि निम्न प्रकार है

(a) एक्सप्लोरर में उस फाइल या फोल्डर को Select करें, जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना चाहते हैं।

(b) उस फाइल या फोल्डर पर माऊस रखे हुए Right Click करें।

(c) प्राप्त लिस्ट में Cut पर क्लिक करें।

(d) अब एक्सप्लोरर में उस ड्राइव या फोल्डर क्लिक कर चयन करें, जिसमें पूर्व चयनित फाइल या फोल्डर को लाना है।

(e) उसी ड्राइव या फोल्डर पर माउस रखे हुए Right Click कर प्राप्त लिस्ट में Paste पर क्लिक करें।

फाइल/फोल्डर का डेस्कटॉप पर शॉर्टकट बनाना (Creating Shortcut of File/Folder on Desktop) –

शॉर्टकट तैयार करने के लिए निम्नलिखित विधि का प्रयोग किया जाता है

(a) उस फाइल या फोल्डर को क्लिक कर चयन (Select) करें, जिसका Short Cut बनाना है।

(b) उसी फाइल या फोल्डर पर माउस रखे हुए Right Click करें।

(c) प्राप्त लिस्ट में Send To पर क्लिक करें।

(d) अब प्राप्त लिस्ट में Desktop as Shortcut पर क्लिक करें। इससे चयनित फाइल या फोल्डर का Shortcut डेस्कटॉप पर बन जाता है। इसी प्रक्रियानुसार किसी भी एप्लिकेशन का Shortcut बनाया जा सकता है।

फाइल/फोल्डर को मिटाना (Deleting the File/Folder) –

विण्डोज में बंद फाइल को ही डिलीट किया जा सकता है। जिसकी विधि निम्नलिखित है

(a) उस फाइल या फोल्डर को क्लिक कर चयन करें, जिसे मिटाना चाहते हैं।

(b) उसी फाइल या फोल्डर पर माउस रखे हुए Right Click करें।

(c) प्राप्त लिस्ट में Delete पर क्लिक करें। (

d) अब प्राप्त लिस्ट में Confirm Folder Delete में Yes पर क्लिक करें। इससे चयनित फाइल या फोल्डर मिट कर Recycle Bin में चला जाता है। इसे पुनः प्राप्त करना हो तो Recycle Bin में जाकर इसे Restore किया जा सकता है।

तो आपने जाना File Management in Windows के वारे मे विस्तार से। उम्मीद है की आपको ये लेख जरूर पसंद आया होगा। अपने प्रश्न व सुझाव के लिए कृपया हमे Comment जरूर करें।

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