money lending business

Money Lending business – साहूकारी के बिज़नस से कैसे लाखों कमाए ?

Money Lending business- मनी लेंडिंग बिजनेस जिसे साहूकारी का बिज़नस या ब्याज पर पैसे देने का बिज़नस भी कहते हैं, ये एक बहुत ही आकर्षक बिजनेस है जिसमें आप पैसा उधार देकर इंटरेस्ट के माध्यम से अच्छी ख़ासी Earning कर सकते है। यहां कुछ स्टेप्स बताएँगे जो आपको मनी लेंडिंग बिजनेस शुरू करने में मदद करेंगे। मनी लेंडिंग बिजनेस को शुरू करने के लिए, नीचे दिए गए कुछ जरूरी स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:

बिजनेस प्लान बनाएं (Make Business Plan)-

सबसे पहले आपको एक बिजनेस प्लान तैयार करना होगा आपको तय करना होगा कि आप कितने ब्याज दर पर पैसा उधार देंगे और किस तरह के क्लाइंट से काम करना चाहते हैं। आपको अपने बिजनेस के उद्देश्य तय करना होगा, अपने ग्राहकों को टारगेट करने का प्लान बनाना होगा, वित्तीय अनुमान और मार्केटिंग रणनीतियां इसमे शामिल करनी होंगी।

लोन के नियम और शर्तें (Loan terms and conditions for Money Lending Business) –

आपको अपने Money Leanding Business लेंडिंग बिजनेस के लोन के नियम और शर्तें तय करनी होंगी जैसे लोन राशि, ब्याज दर, लोन चुकाने की अवधि, लेट फीस, प्रीपेमेंट चार्ज इत्यादि।

कानूनी औपचारिकताएं (Legal Formalities )-

सबसे पहले आपको अपने बिज़नस से संबन्धित कानूनों और रुल्स को समझना होगा। इसके लिए आपको लोकल अथॉरिटीज से सलाह लेनी होगी। इसके अलावा आपको अपने बिज़नस को चलाने के लिए लाइसेंस और परमिट की भी जरूरत होगी, जिसको आपको अपने State (राज्य) या देश के कानूनों के अनुसार रजिस्टर करना होगा।

पूंजी निवेश (Capital Investment)

Money Lending Business को सुरू करने के लिए आपके पास पर्याप्त पूंजी का होना बहुत जरूरी है। लोगों को पैसा उधार देने के लिए आपके खुद के पास भी पूंजी होनी चाहिए। इसके लिए आपने जो बचत की है तो उस बचत का उपयोग कर सकते हैं या फिर निवेशकों को अप्रोच करके उनसे फंडिंग प्राप्त कर सकते हैं। मतलब आपको जितनी मनी लेंड करनी है, उतनी राशि आपके पास उपलब्ध हो।

ब्याज दरें (Interest Rate) –

आपको अपने लेंडिंग बिजनेस के लिए ब्याज दरें तय करनी होंगी। आपको ब्याज दरें निर्धारित करते समय अपने प्रतिस्पर्धियों और उद्योग मानकों को भी ध्यान में रखना होगा।

मार्केटिंग रणनीतियां (Marketing Strategies for Money Lending Business) –

अपने बिजनेस को प्रमोट करने के लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्केटिंग स्ट्रैटेजीज का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप सोशल मीडिया चैनल्स और अखबारों के विज्ञापनों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

जोखिम प्रबंधन (Risk Management) –

पैसा उधार देने के बिजनेस में जोखिम भी होते हैं। आपको जोखिम प्रबंधन तकनीकों को लागू करना होगा, जैसे कि ग्राहक के क्रेडिट स्कोरिंग की जांच करना, क्लाइंट्स का बैकग्राउंड चेक करना होगा और अपनी लेंडिंग पॉलिसीज को लागू करना होगा।

प्रोफेशनल हेल्प (Professional Help)-

अगर आपको फाइनेंशियल मार्केट और लीगल एस्पेक्ट्स में नॉलेज नहीं है तो आपको प्रोफेशनल हेल्प लेनी चाहिए। आपके बिजनेस के लिए एक अनुभवी कंसल्टेंट हायर करना चाहिए जो आपके लिए बहुत मददगार हो सकता है।

रिकॉर्ड कीपिंग:

आपको सही तारिके से रिकॉर्ड कीपिंग करने की जरूरत होगी, जिसमें आपको पैसा उधार देने की डेट्स, ब्याज दरें, क्लाइंट डिटेल्स और पेमेंट्स के बारे में डिटेल्स रखनी होंगी।
सभी स्टेप्स में को फॉलो करके आप मनी लेंडिंग बिजनेस शुरू कर सकते हैं। लेकिन, इस बिजनेस में रुकना और अपने पॉलिसी को लागू करना बहुत जरूरी है।
सभी चरणों में को फॉलो करके आप अपना मनी लेंडिंग बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

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Passive Income

Passive Income क्या है? 10 तरीके पैसिव इनकम कमाने के

Active Income

किसी भी प्रकार की नौकरी या काम से हम तब तक पैसे कमाते है जब तक हम काम करते है। यदि आज आप नौकरी छोड़ दे या काम करना बंद कर दे, तो उसी दिन से पैसे आना भी बंद हो जाएगा। तो इसी को एक्टिव इनकम कहेंगे। Passive Income नहीं.
एक्टिव इनकम के सोर्स आप ज्यादा नहीं बना सकते। क्यूंकि Active income करने के लिए आपको लगातार मेहनत करनी होती है। यदि आप एक से ज्यादा Active income स्रोत रखते है तो आपके पास समय की काफी कमी महसूस होगी। क्योकि हम जिस काम को करने लगते हैं उस काम को करने मे ही पूरा समय निकल जाता है। फिर हम दूसरे सोर्स की तरफ ध्यान ही नहीं दे पाते।

Passive Income

पैसिव इनकम (Passive income ) पैसे कमाने का एक बेहतर तरीका है, जिसमें आपको एक बार मेहनत करनी होती है उसके बाद आप बिना कुछ किये उस काम से लम्बे समय तक पैसे कमा सकते है। Passive income स्रोत आप जितनी चाहे उतनी बना सकते है।
ऐसा कहा जाता है कि सोते-सोते पैसे कमाने को ही पैसिव इनकम कहा जाता है अगर आप सोते सोते पैसा नहीं कमा पाते हैं तो आपको पूरी जिंदगी पैसों के लिए ही काम करना पड़ता है चाहे वो नौकरी हो या बिजनेस हो। बिना Passive इनकम के आप फाइनेंशली फ्री नहीं हो सकते हैं। अगर आप फाइनेंशियल फ्रीडम चाहते हैं तो आपको ज्यादा से ज्यादा पैसिव इनकम के जो सोर्स हैं उन्हें बनाना ही होगा।

आपको 10 ऐसे तरीकों बताएँगे जिससे आप प्रैक्टिकली पैसिव इनकम जनरेट कर सकते हैं।
इनमे 5 तरीके आपको ऑफलाइन वाले बताएँगे और 5 तरीके आपको ऑनलाइन वाले बताएँगे, जिनसे आप passive income बना सकते हो।

Offline Passive Income

ऑफलाइन में सबसे पहला है-

1. इंटरेस्ट से इनकम (INCOME FROM INTEREST) –

अगर आपको ब्याज का इंकम मिलता है, यानी आपके पास थोड़ा बहुत जो भी पैसा है तो इस पैसे को आप बैंक में डिपॉजिट करते हैं तो यहां पर भले ही आप को कम इंटरेस्ट मिलता है लेकिन पैसा पूरी तरह से सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न यहा से आपको मिलता रहता है। तो यह रिटर्न भी एक तरह से पैसिव इनकम ही होता है ।

इसके अलावा अगर आप और ज्यादा ब्याज कमाना चाहते हैं तो आप अपने पैसे को कॉरपोरेट bonds मे लगा सकते हो यहाँ पर आपको बैंक से ज्यादा ब्याज मिल जाता है।

और अगर आपको बहुत ज्यादा ब्याज अपने पैसे से कमाना है तो इसके लिए आप पियर टू पियर लेंडिंग यानी कि आप आसपास के पहचान के लोगों को ब्याज पर पैसे दे सकते हैं।यहां से भी आप जो ब्याज कमाते हैं तो यह भी एक तरह का पैसिव इनकम ही है। लेकिन इस तरह का आप ब्याज कमाते हैं तो यह असुरक्षित है या फिर काफी रिस्क है इसमे। आपका पैसा डूब भी सकता है।
बेहतर है अगर आप इस तरह की रिस्क उठा सकते हैं तो ही इस तरह का काम आप करें। और अगर आप नहीं कर सकते हैं तो बैंक में ही आप पैसा जमा करके के कम इंटरेस्ट से पैसिव इनकम ले सकते हैं।

2. Rental Income-

यदि आपका कोई घर या कमरा खाली हो तो आप उसे किराये पर दे सकते है। यह आपका एक Passive income source बन जाएगा। कई सारे लोगों के पास फालतू जगह पड़ी रहती है जिसका उपयोग वो किसी काम के लिए नहीं कर पाते। तो इस तरह की जगह को अगर आप दुकान, होटल, शादी – समारोह भवन के लिए तैयार कर करके उसे किराए पर दे दें या फिर खुद ही इन्हे किराए पर लगा दें तो आपको हर महीने अच्छी ख़ासी passive इंकम हो सकती है।

3. वाहन को किराए पर देना ➡

यह काम भी हमारे देश में काफी अच्छा चलता है। यदि आपके पास साइकिल, बाइक, कार या कोई भी वाहन हो तो आप इसे किराए पर दे कर पैसे कमा सकते है। GPS सिस्टम आने के बाद यह काम भी काफी सरल हो गया है। यदि आप शहर या इसके आस- पास रहते है तो ओला उबर जैसे कंपनी को अपना वाहन दे सकते है। इसके अलावा कई सारे सरकारी या प्राइवेट offices है जहां पर अपने कर्मचारी या अधिकारियों के लिए गाड़ी की जरूरत होती है, तो वो वाहरी लोगों से एक दो साल के लिए गाड़ी किराए से लेते हैं। तो आप भी अपनी गाड़ी को इन offices मे किराए से लगा सकते हो, और अपने लिए passive income generate कर सकते हो।

4. स्टॉक मार्केट में पैसे लगाना (STOCK MARKET INCOME) ➡

शेयर मार्केट में पैसे लगाकर पैसे कामना पुराने समय में पहले बहुत कठिन हुआ करता था, लेकिन अब इंटरनेट आने के बाद यह पूरी तरह से बदल गया। अब लोग इसकी बारीकियों को समझने लगे हैं। शेयर मार्केट से पैसे कामना भी एक बेहतरीन पैसिव इनकम है। यहाँ आपको बस बेहतर कंपनी तलाश करनी होती है। यदि आप बेहतर कंपनी चुनना सीख लेते है तो आप यहाँ से ढेर सारे पैसे कमा सकते है। शेयर मार्केट में बहुत ताकत है। इसमें आपको एक बेहतर कंपनी का चुनाव करके उसके शेयर खरीदने होते है। जब कंपनी के शेयर की कीमत बढ़ जाए तो उसे बेच कर मुनाफा कमाया जाता है।
कई सारी Companies तो अपने share के ऊपर हर महीने या साल मे 2 से 4 बार तक Dividend भी देतीं हैं, जिससे हमे अतरिक्त की कमाई हो जाती है। लेकिन किसी भी कंपनी के शेयर में पैसे लगाने से पहले उसे अच्छी प्रकार से जान लेना चाहिए समझ लेना चाहिए।

5. Silent Partner-

ये भी एक अच्छा साधन है Passive Income कमाने के लिए। अगर आपके नज़र मे है कोई ऐसा व्यक्ति या दोस्त या कोई रिसतेदार जिसके पास अच्छा हुनर है किसी व्यापार को या फिर कंपनी को चलाने का, लेकिन पैसे की कमी के कारण वह उसे सुरू नहीं कर पा रहा।
तो ऐसे लोगों के साथ आप silent partner बनकर उसके काम को सुरू करवा सकते हैं और उस व्यापार या कंपनी की बचत मे से हर महीने अपना हिस्सा ले सकते हैं। इस तरह के काम मे खास बात यह होती है की आपको उस व्यापार या कंपनी मे जाना नहीं पड़ता है। आपको समय नहीं देना पड़ता है। बस Silent पार्टनर बन कर आप passive income कमाते रहते हैं।

Online Passive Incomes-

1.यूट्यूब से :

अगर आपमे कोई एसी स्किल है जिससे आप ऑनलाइन दूसरों को कुछ सीखा सकते हैं या कोई जानकारी दे सकते हैं तो YouTub प्लैटफ़ार्म इसके लिए सबसे अच्छा है। आज के समय में यूट्यूब पर करोड़ो लोग वीडियो देखते है और लाखों लोग उसी यूट्यूब से पैसा कमा रहे है। यदि आपके मन में भी प्रश्न है की यू ट्यूब से पैसा कैसे कमाए जाता है? तो आपको बता दे यूट्यूब से आज ज्यादातर लोग तीन तरह से पैसे कमा रहे है। Youtube के विडियो पर जो add आता है उससे पैसे मिलते हैं, इसके अलावा affiliate मार्केटिंग की लिंक को अपने चैनल पर डाल कर पैसे कमाते हैं। और sponsorship से भी पैसे कमाते हैं।

Passive Income From Youtube Channel

2. E-book और ऑनलाइन कोर्स बना कर बेचना

यदि आप किसी क्षेत्र में माहिर है और उसे दूसरो को सीखा सकते है, तो यह एक पैसिव इनकम सोर्स बन सकता है। आपको बस एक बार मेहनत करके इसे लिखना है या फिर वीडियो कोर्स के रूप मे इसे बनाना है और उसके बाद आप इसे अमेज़न और अन्य जगह से बेच कर जीवन भर पैसे कमा सकते है।

3. Affiliate marketing से:

सभी कंपनी अपना सामान बेचना चाहती है और यदि आप इसमें थोड़ी मदद कर दो तो कंपनी आपको अच्छा खासा कमीशन देती है, इसे ही एफिलिएट मार्केटिंग कहते है।
Amezon, Flipcart और Meesho जैसे कई सारे ऑनलाइन platform है, जहा से अगर आप अपनी website या फिर अपने youtube चैनल पर इनके products की लिंक देते हैं जिसे एफिलिएट लिंक कहते हैं, और उस लिंक को click करके अगर कोई व्यक्ति कोई सामान खरीदता है तो उसके एवज मे आपको इन कंपनी द्वारा अच्छा खासा commission मिल जाता है। तो इस तरह से जितनी मेहनत आप इनके products को बिकवाने के लिए करते हैं तो उतने ही पैसे आपको महीने के अंत मे आपके अकाउंट मे आते रहते हैं जो की लाखों मे भी हो सकते हैं।

4. Blog वेबसाइट से पैसे कामना

आप भी अपनी जानकारी या सर्विसेस को ब्लॉग वेबसाइट बना कर लोगों के साथ साझा कर सकते है और पैसे कमा सकते है। आपको जिस किसी फील्ड के बारे में अच्छी जानकारी हो आप उसी फील्ड मे अपना ब्लॉग लिख सकते है। या फिर कोई सर्विसेस देना चाहते है, या फिर कोई प्रॉडक्ट बेचना चाहते हैं तो इसके लिए भी वैबसाइट अच्छा माध्यम है पैसा कमाने के लिए।


ब्लॉग वेबसाइट बनाने के कई तरीक़े है लेकिन सबसे सरल वर्डप्रेस होता है। वर्डप्रेस वेबसाइट बनाने के लिए आपको एक अच्छा होस्टिंग और डोमेन लेना होता है। होस्टिंग और डोमेन के लिए आपको कुछ पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यदि आप फ्री में ब्लॉग वेबसाइट बनाना चाहते है तो blogger.com आपके लिए बेस्ट होगा। एक बार वेबसाइट सेटअप हो जाए तो आप इस पर अपना जानकारी एक- एक पोस्ट लिख कर अपना जानकारी साझा कर सकते है।
यह भी एक बेहतरीन Passive income idea है। जिससे अनेक लोग अच्छा पैसा बना रहे है।

Passive Income from Website or blogg

5. वीडियो अपलोड करके पैसे कैसे कमाए

यदि आप अच्छे वीडियो क्रिएटर है तो आप इसे अपना एक Passive income source बना सकते है। आप अपनी वेबसाइट या किसी सोशल मीडिया से अपना वीडियो बेच सकते है।
इंटरनेट पर फोटो की तरह वीडियो भी बिकते है। आप उन वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाए, उसके बाद अपना स्टॉक वीडियो अपलोड करें। यदि कोई आपके वीडियो को डाउनलोड करता है तो वेबसाइट की तरफ से आपको पैसे मिलते है। मैं आपको नीचे कुछ वेबसाइट के नाम बता रहा जहाँ आपको आपके वीडियो को सही कीमत पर खरीदते है:

  • Uscreen.tv
  • Shutterstock.com
  • Adobestock.com
  • Vimeo.com

जिस तरह से आप किसी पेड़ को लगाते हैं, उसमे खाद पानी देते हैं, फिर धीरे धीरे पेड़ बड़ा होता है फिर जाके उसमे फल लगते हैं। तो काफी समय लग जाता है।
ठीक बेसे ही है passive income, इसको बनाने मे काफी समय लग जाता है, लेकिन एक बार बन जाये तो आपकी लाइफ काफी ईज़ी हो जाती है और आप financially फ्री हो जाते हैं।

स ब्लॉग का विडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें-

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ATM Card एटीएम कार्ड

एटीएम कार्ड पर मिलता है 10 लाख रुपए तक का बीमा बिलकुल फ्री

आज के समय मे हर किसी के पास बेंक का खाता होता है। वो खाता कोई भी हो सकता है। जैसे बचत खाता या फिर चालू खाता या फिर जन धन खाता या और भी कई तरह के खाते जिनके लिए बेंक, अपने ग्राहकों को एक एटीएम कार्ड (ATM Card) की भी सुबिधा देता है, जिसे डेबिट कार्ड भी कहते हैं। इस कार्ड का उपयोग हर व्यक्ती करता है। क्या आपको पता है की आपके इस ATM CARD या कहें डेबिट कार्ड पर बेंक Insurance की भी सुबिधा देती है।
जी हाँ अगर आपके साथ या आपके परिवार के साथ कोई दुर्घटना या कोई हादसा हो जाता है तब आप इस पर क्लैम भी ले सकते हैं।

ATM Card पर Insurance

अगर आपके पास किसी भी बेंक का ATM कार्ड है तो इस पर आपको insurance की सुबिधा मिल जाती है। चाहे किसी भी बेंक का ATM कार्ड हो हर बेंक अपने डेबिट कार्ड पर insurance की सुबिधा देती है। और ये insurance 2 लाख रुपयों से लेकर 10 लाख रुपयों तक का रहता है। लेकिन इस वारे मे हमे पता नहीं होता है और हम इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। खास कर गाँव वालों को या फिर छोटे कस्वों वालों को इस वारे मे कुछ भी नहीं मालूम रहता है की ATM कार्ड पर भी insurance मिलता है।

पर्सनल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (डेथ)

आपको बता दें की ATM पर जो Insurance मिलता है वह लाइफ Insurance नहीं होता है। वह Accidental Insurance रहता है। Accidental Insurance मे कार्ड धारी यानी जिसके नाम से कार्ड है वह व्यक्ति अगर किसी एक्सिडेंट का शिकार हो जाता है या किसी प्रकार का हादसा हो जाता है।
जैसे आप किसी साइट पर labour का काम कर रहे हो, वहा पर आप गिर जाते हो। इसके अलावा आग से जलकर किसी की मृत्यु हो जाती है या किसी की डूब कर मृत्यु हो जाती है तो ऐसे हादसे या दुर्घटना पर उसके परिवार वाले बेंक मे क्लैम कर सकते हैं। यह क्लैम 2 लाख रुपए से लेकर 10 लाख रुपयों तक का कर सकते है।

Accidental Insurance on ATM Card

एटीएम कार्ड के प्रकार (Types of ATM Card)

वर्तमान मे भारत मे बेंक द्वारा 3 प्रकार के ATM Card Issue होते है।

  • Visa Card– Visa Card एक आम Payment Card है, जो हम लोगों के पास debit या credit card के रूप में मौजूद है। यह Visa Network का उपयोग करता है. इसलिए इसे Visa Card कहा जाता है। तो जिन एटीएम कार्ड या डेबिट कार्ड मे Visa लिखा हुआ है, वो वीसा कार्ड कहलाते हैं।
  • Master Card– दूसरा मास्टर कार्ड होता है Master Card एक विदेशी Payment Gateway है जो कि दुनिया के अधिकांश देशों के बैंक को अपने कार्ड के द्वारा पेमेंट गेटवे की सुविधा उपलब्ध कराता है।
  • और तीसरा Rupay Card होता है। जिसे जन धन खाते के लिए दिया जाता है।

तो ये 3 प्रकार के एटीएम कार्ड को ही सभी तरह के बेंक द्वारा दिये जाते हैं। चाहे आपका खाता SBI मे हो या फिर पुंजाब नेशनल बेंक मे हो या फिर किसी भी सरकारी या प्राइवेट बेंक मे हो सभी मे बस ये 3 प्रकार के ATM Issue किए जाते हैं।

इन cards मे भी अलग अलग प्रकार होते हैं। जैसे –

  • Gold Card
  • Platinum Card
  • Signature Card
  • Premium Business Card होता है।

तो Viewers इसका इन्शुरेंस आपको खुद नहीं कराना होता। जब आपको बेंक से ये कार्ड मिलता है तो बेंक द्वारा ही औटोमेटिक आपके कार्ड पर ये सुबिधा सुरू हो जाती है। यानि अगर आपको कोई दुर्घटना या मृत्यु हो जाती है तो आपके नॉमिनी को क्लैम की राशि दे दी जाती है।

कितना क्लैम कर सकते हैं?

यहाँ पर हम आपको SBI बेंक के कार्ड का Example देकर समझा रहा हूँ। बाँकी के बेंकों मे भी वही नियम और कानून होता है।

  • RuPay कार्ड पर 2 लाख रुपए तक का क्लैम कर सकते है।
  • Platinum Card पर पर 5 लाख रुपयो तक का insurance claim कर सकते है।
  • Signature Card पर 10 लाख रु. तक का Accidental Claim कर सकते हैं।
  • Business Card पर भी आप 5 लाख रु. तक का accidental क्लैम कर सकते हैं।

खरीददारी मे भी कर सकते हैं क्लैम (Shopping / Purchase protection Claim on ATM Card)

किसी मोल या ऑनलाइन या फिर किसी जगह से शॉपिंग करने के बाद उसका पेमेंट अपने ATM Card से करते हैं, और उसी टाइम आपका सामान अगर चोरी हो जाता है तो उस स्थिती मे भी आप इस पर क्लैम कर सकते हैं।

  • गोल्ड कार्ड है तो आप 5 हजार रु. तक का क्लैम कर सकते हैं।
  • Platinum Card है तब 50 हजार रु. तक क्लैम कर सकते हैं।
  • Signature card होने पर 1 लाख रु. तक क्लैम कर सकते हैं।
  • Premium Business Card पर भी आप 50 हजार रु. तक क्लैम कर सकते हैं।

पर्सनल एयर एक्सीडेंटल इंश्योरेंस (डेथ):

अगर कोई कार्ड धारक By Air किसी Flight से कहीं यात्रा कर रहा है। चाहे वो एक ही देश मे यात्रा कर रहा है या फिर International किसी दूसरे देश की यात्रा पर जा रहा है। और अगर वो फ्लाइट क्रेश हो जाता है, उसमे उस कार्ड धारी की मृत्यु हो जाती है। तो उस स्थिती मे उसको डबल क्लैम मिलता है।

  • RuPay कार्ड पर normally 2 लाख तक का क्लैम मिलता है, लेकिन यहाँ पर उसको 2 की जगह 4 लाख रुपये तक का क्लैम मिलेगा।
  • सिग्नेचर कार्ड पर 10 लाख की जगह 20 लाख रुपए तक का क्लैम किया जा सकता है।
  • प्रीमियम business card पर 5 लाख की जगह 10 लाख रुपए तक का क्लैम किया जा सकता है।
  • प्लैटिनम कार्ड है तब 5 लाख की जगह 10 लाख रुपए तक का क्लैम किया जा सकता है।

लेकिन इसमे कुछ शर्त है। और वो शर्त ये है की एयर यात्रा से पहले कार्ड को 45 दिन के अंदर मे उसे Use किया जाना चाहिए।

लेकिन Normally Accident हो जाने पर क्लैम के लिए कार्ड मे 90 दिन पहले किसी भी तरह का Transaction हो जाना चाहिए। तो अगर एक्सिडेंट से 3 महीने पहले तक कार्ड मे किसी भी तरह की शॉपिंग या ट्रैंज़ैक्शन हुआ है तो आप नियम के अनुसार इस पर क्लैम कर सकते हैं।

अगर आपने एटीएम कार्ड को ले लेने के बाद इसका उपयोग कहीं पर नहीं किया है तो आप क्लैम तो कर सकते हैं, लेकिन आपको insurance नहीं मिलेगा।
तो हमेशा आप कहीं किसी फ्लाइट से या ट्रेन से यात्रा करें तो आप कोशिश करें की टिकिट का भुगतान अपने एटीएम कार्ड से ही करें। इससे कार्ड पर क्लैम लेने मे आसानी हो जाती है।

एटीएम कार्ड पर क्लैम कैसे और कहाँ पर करें?

  • अगर दुर्घटना या हादसा हो जाता है तो सबसे पहले उस घटना की FIR पास के ही थाने मे करानी होगी।
  • अगर कार्ड धारक की पहले या बाद मे मृत्यु हो जाती है तो उसके पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी भी चाहिए होगी।
  • इसके अलावा नॉमिनी की भी पूरी डीटेल की जरूरत पड़ेगी जैसे उसके आधार कार्ड, उसका एड्रैस प्रूफ, उसका पैन कार्ड इत्यादि की जरूरत पड़ेगी।
    ये सभी डॉकयुमेंट लेकर कार्डधारक के बेंक मे जाना होगा।
  • वहाँ पर एक क्लैम फोरम भरना पड़ेगा। इसी क्लैम फोरम मे ये सभी डॉकयुमेंट भी सबमिट करना है जो अभी हमने आपको बताए थे.

अब बेंक इस प्रक्रिया को आगे बड़ाएगा, और 90 दिन के अंदर नॉमिनी को insurance का पैसा मिल जाता है।

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Tax Rebate

Tax Rebate- जानिये उन Rebate के वारे मे जिनसे बचा सकते हैं टैक्स.

सीमित आमदनी में परिवार चलाना बहुत मुश्किल काम है. इस वजह से ज़्यादातर लोग इनकम टैक्स बचाने (TAX Rebate) की कोशिश करते रहते हैं

खुद Income Tax रिटर्न फ़ाइल करते समय मन मे यह सवाल होता है कि टैक्स कैसे वचाया जाये ? ज़्यादातर लोगों को होम लोन, मकान का किराया और कुछ अन्य निवेश पर मिलने वाली छुट कि मोटी मोटी जानकारी तो होती है, लेकिन यह नहीं पता होता कि कुल कितनी तरह कि छुट(Tax Rebate) का लाभ ले सकते हैं?

हम आपको बता दें कि हमे आयकर मे 7 प्रमुख छुट मिल सकतीं हैं जिनका लाभ हम इन come tax रिटर्न फ़ाइल करते वक्त ले सकते हैं। जिनमे एक है।

पैसे से पैसा बनाने के 10 टिप्स [How do I invest Money to make Money]

Tax Rebate- धारा80 C

इस धारा के तहद करदाता अपनी कुल करयोग्य आय को 1.50 लाख रुपये तक घाटा सकता है। इस धारा की कटौती का लाभ कई तरह के निवेश विकल्पों मे निवेश करके लिया जा सकता है। जैसे

  • अपने नाम से ईपीएफ़,
  • होम लोन के मूलधन का भुगतान,
  • नए मकान की खरीद पर चुकाई गई Stamp Duty,
  • सुकन्या समृद्धि योजना,
  • टैक्स सविंग म्यूचुअल फ़ंड,
  • टैक्स सविंग एफ़डी या बॉन्ड आते हैं।

इसके अतिरिक्त अपने स्वयं के या जीवनसाथी के या बच्चों के नाम पर जीवन बीमा प्रीमियम,
पीएफ़ या ULIP मे निवेश करने पर भी इस धारा मे कटौती मिलती है।
अधिकतम दो बच्चों को स्कूल या कॉलेज की ट्यूशन फीस का भुगतान करने पर भी इस धारा मे कटौती ली जा सकती है।

धारा 80सीसीडी (1बी)

इस धारा के तहत नेशनल पेंशन योजना (NPS) मे निवेश करने पर अधिकतम 50,000 रुपये की कटौती (Tax Rebate) मिलती है। इस तरह 80C एवं 80CCD(1बी) मिला कर अधिकतम 2 लाख रुपये तक की कटौती मिल सकती है।

Tax Rebate- धारा 80डी

धारा 80 D के तहत स्वयं के लिए या जीवन साथी के लिए इसके अलावा आप पर आश्रित बच्चों के , उच्च शिक्षा के लिए चकाए गए मेडिकल बीमा प्रीमियम के लिए अधिकतम 25,000 रुपये की कटौती मिलती है। और आपके माता-पिता के लिए चकाए गए मेडिकल बीमा प्रीमियम के लिए अधिकतम 25,000 रुपए की अतिरिक्त कटौती (Tax Rebate) मिलती है।
यदि माता-पिता की आयु 60 वर्ष से अधिक है तो कटौती 25,000 से बढ़ कर पर अधिकतम 50,000 हो जाती है।

एक बात ध्यान रखें कटौती तभी मिलती है जब प्रीमियम का भुगतान नकद न किया हो।
इस धारा में उपरोक्त लिमिट को ध्यान मे रखते हुए 5000 रुपए तक की प्रिवेटिव हेल्थ चेक अप की भी कटौती मिलती है।

धारा 80 DD

इस धारा के अंतर्गत यदि किसी करदाता पर कोई दिव्याङ्ग (Handicap) आश्रित है इसके लिए उसका जीवनसाथी हो सकता है, उसके बच्चे हो सकते हैं, या उसके माता-पिता व भाई बहन हो सकते हैं। तो उनके इलाज और पालन-पोषण पर हुए खर्च पर 75000 रुपये तक की कटौती का प्रावधान है। और अगर इन सभी मे से किसी की गंभीर बिकलांगता है तब करदाता 125,000 रुपये तक की कटौती का लाभ ( Tax Rebate ले सकता हैं।

धारा 80 DDB

इस धारा के तहद कुछ खास व गंभीर बीमारियाँ के इलाज के खर्च पर ही छुट ली जा सकती है।
जैसे कैंसर होने पर , एड्स होने पर, किडनी फ़ेल होने पर, हीमोफोलिया की बीमारी पर, थेलेसेमिया की बीमारी पर ।

इसके अलावा कुछ और भी बीमारियाँ है लेकिन इनमे गड़बड़ी का स्तर 40 फीसदी या इससे अधिक होना चाहिए। तो वो बीमारियाँ हैं-
डिमेंशिया, डिस्टोनिया मसक्यूलोरम डिफॉर्मेंस, मोटर न्यूरॉन डिजीज, एटैक्सिया, खोरिया, हेमीबैलिसमस, एफेसिया, पार्किंसन इत्यादि।
अब जान लेते है की कितनी कटौती तक ली जा सकती है?
छुट की रकम व्यक्ति की उम्र पर निर्भर करती है. यदि खर्च 60 साल से कम के व्यक्ति पर किया जा रहा है तो 40,000 रुपये तक का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

यदि बीमार व्यक्ति की उम्र 60 साल से ज्यादा है तो एक लाख रुपये तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

सेक्शन 80E:

बच्चों के एजुकेशन लोन पर आयकर कानून के सेक्शन 80E के तहत TAX मे छूट मिलेगी. आयकर की धारा 80E के तहत उच्च शिक्षा हेतु लिए कर्ज पर चुकाए गए ब्याज पर भी TAX छूट मिलती है.
एजुकेशन लोन किसी भी पाठ्यक्रम के लिए लिया जा सकता है. पति, पत्नी या बच्चे के एजुकेशन लोन पर यह छूट मिलती है. तो उच्च शिक्षा के लिए छुट आप धारा 80E के तहद ले सकते है।

पैसे से पैसा बनाने के 10 टिप्स [How do I invest Money to make Money]

सेक्शन 80G :

चैरिटेबल ट्रस्ट या मंदिर को दान
कुछ लोग सामाजिक कल्याण से जुड़े चैरिटेबल ट्रस्ट को दान देते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अपनी आय के 10 फीसदी हिस्से तक पर आयकर कानून के सेक्शन 80G के तहत टैक्स छूट ले सकते हैं.

यह टैक्स छूट इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस संस्था को दान कर रहे हैं. संस्था के अनुरूप ही दान की गई राशि पर 50 फीसदी या 100 फीसदी टैक्स छूट मिलेगी. इसके लिए आप दान करने के बाद संस्थान से रसीद लें और आयकर छूट का सर्टिफिकेट भी लें.

धारा 80 GG

काफी लोग होम लोन पर टैक्स बेनिफिट के बारे में तो जानते हैं| जैसा अभी हमने बताया था की मूल भुगतान (principal repayment) के लिए धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है|
अब घर लेना तो सबके बस की बात नहीं| आपको पता है आजकल मकानों के दाम आसमान छू रहे हैं| इसीलिए हम में से काफी लोग किराये पर भी रहते हैं|

तो अच्छी बात यह है की किराए पर रहने पर भी आपको कुछ टैक्स बेनिफिट मिलते हैं| इसका मतलब अगर आप किराए पर रहते हैं, तो दिए गए किराए पर कुछ टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं|
इस धारा मे किराए के घर के भुगतान पर अधिकतम 60,000 रुपये तक की कटौती का लाभ ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको HRA नहीं मिलना चाहिए। इसके लिए आपका स्वयं का या जीवन साथी का या बच्चों का उस सहर मे मकान नहीं होना चाहिए, जहां आप नौकरी कर रहे हैं।

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National Song and the National Anthem

Difference between the National Song and the National Anthem

Difference between the National Song and the National Anthem (राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के अंतर ) :

किसी भी देश की धरोहर में से सबसे खास होता है उस देश का 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रीय गीत'. इनके जरिए ही हर देश की अपनी एक अलग ही पहचान होती है. 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रीय गीत' में बहुत अंतर होता है लेकिन ये दोनों ही गीत मन में देशभक्ति की भावना को बढ़ा देते है।
राष्‍ट्रीय गीत और राष्‍ट्रीय गान तो हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं पर क्‍या आपने कभी सोचा है कि इन दोनों में क्‍या अंतर है जबकि दोंनों को गाया जाता है तो एक को राष्‍ट्रीय गीत और दूसरे को राष्‍ट्रगान क्‍यों कहते हैं अगर नहीं तो आइये जानें राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के अंतर के बारे में –

तो यहाँ पर सबसे पहले जानते है राष्ट्रगीत यानी National song के वारे मे

राष्‍ट्रीय गीत (National anthem):

  • भारत का राष्‍ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” है। वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी। उन्होंने 7 नवंबर, 1876 को बंगाल के कांतल पाडा नामक गांव में इस गीत की रचना की थी। वंदे मातरम् गीत के प्रथम दो पद संस्कृत में तथा शेष पद बांग्ला में थे।
  • 1870 के दौरान अंग्रेज हुक्मरानों ने ‘गॉड सेव द क्वीन’ गीत गाया जाना अनिवार्य कर दिया था। अंग्रेजों के इस आदेश से बंकिमचंद्र चटर्जी को, जो तब एक सरकारी अधिकारी थे, बहुत ठेस पहुंची और उन्होंने 1876 में इसके विकल्प के तौर पर संस्कृत और बांग्ला के मिश्रण से एक नए गीत की रचना की और उसका शीर्षक दिया ‘वंदेमातरम्’। शुरुआत में इसके केवल दो पद रचे गए थे, जो केवल संस्कृत में थे।
  • इस गीत का प्रकाशन 1882 में बंकिमचंद्र के उपन्यास आनंद मठ में अंतर्निहित गीत के रूप में हुआ था। इस उपन्यास में यह गीत भवानंद नाम के संन्यासी द्वारा गाया गया है। इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाई थी।
  • बंगाल में चले आजादी के आंदोलन में विभिन्न रैलियों में जोश भरने के लिए यह गीत गाया जाने लगा। धीरे-धीरे यह गीत लोगों में लोकप्रिय हो गया। ब्रिटिश हुकूमत इसकी लोकप्रियता से सशंकित हो उठी और उसने इस पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना शुरू कर दिया।
  • रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत को स्वरबद्ध किया और पहली बार 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में यह गीत गाया गया। अरबिंदो घोष ने इस गीत का अंग्रेजी में और आरिफ मोहम्मद खान ने उर्दू में अनुवाद किया।
  • ‘वंदेमातरम्’ का स्थान राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर है। यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्ररेणा का स्रोत था।
  • 1901 में कलकत्ता में हुए एक अन्य अधिवेशन में चरनदास ने यह गीत पुनः गाया।
  • 1905 में बनारस में हुए अधिवेशन में इस गीत को सरला देवी ने स्वर दिया। बैठक में गीत को राष्ट्रगीत का दर्ज़ा प्रदान किया गया। बंग-भंग आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय नारा बना।
  • 1906 में ‘वंदे मातरम्’ देवनागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका संशोधित रूप प्रस्तुत किया।
  • कांग्रेस के अधिवेशनों के अलावा भी आजादी के आंदोलन के दौरान इस गीत के प्रयोग के काफी उदाहरण मौजूद हैं। लाला लाजपत राय ने लाहौर से जिस जर्नल का प्रकाशन शुरू किया, उसका नाम ‘वंदेमातरम’ रखा।
  • अंग्रेजों की गोली का शिकार बनकर दम तोड़ने वाली आजादी की दीवानी मातंगिनी हजारा की जुबान पर आखिरी शब्द ‘वंदे मातरम’ ही थे।
  • 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जब जर्मनी के स्टटगार्ट में तिरंगा फहराया तो उसके मध्य में ‘वंदे मातरम्’ ही लिखा हुआ था।
  • 1920 तक सुब्रह्मण्यम भारती तथा दूसरों के हाथों विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित होकर यह गीत राष्ट्रगान की हैसियत पा चुका था।
  • 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम् के विरोध में स्वर उठे। लोग इस गीत की मूर्ति-पूजकता को लेकर आपत्ति उठाने लगे। तब पंडित जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव की समिति ने 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में पेश अपनी रिपोर्ट में इस राष्ट्रगीत के गायन को अनिवार्य बाध्यता से मुक्त रखते हुए कहा था कि इस गीत के शुरुआती दो पद ही प्रासंगिक हैं, इस समिति का मार्गदर्शन रवींद्र नाथ टैगोर ने किया। इस गीत के उन अंशों को छांट दिया, जिनमें बुतपरस्ती के भाव ज़्यादा प्रबल थे और गीत के संपादित अंश को राष्ट्रगान के रूप में अपना लिया।
  • 14 अगस्त 1947 की रात संविधान सभा की पहली बैठक का प्रारंभ ‘वंदे मातरम’ के साथ और समापन ‘जन गण मन’ के साथ हुआ।
  • 15 अगस्त, 1947 को प्रातः 6:30 बजे आकाशवाणी से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर का राग-देश में निबद्ध ‘वंदेमातरम’ के गायन का सजीव प्रसारण हुआ था।
  • आजादी की सुहानी सुबह में देशवासियों के कानों में राष्ट्रभक्ति का मंत्र फूंकने में ‘वंदेमातरम’ की भूमिका अविस्मरणीय थी। ओंकारनाथ जी ने पूरा गीत स्टूडियो में खड़े होकर गाया था; अर्थात उन्होंने इसे राष्ट्रगीत के तौर पर पूरा सम्मान दिया। इस प्रसारण का पूरा श्रेय सरदार बल्लभ भाई पटेल को जाता है। पंडित ओंकारनाथ ठाकुर का यह गीत ‘दि ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया’ के रिकॉर्ड संख्या STC 048 7102 में मौजूद है।
  • 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा ने निर्णय लिया कि स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदेमातरम’ गीत की उल्लेखनीय भूमिका को देखते हुए इस गीत के प्रथम दो अंतरों को ‘जन गण मन’ के समकक्ष मान्यता दी जाए। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा का यह निर्णय सुनाया।
  • ‘वंदेमातरम’ को राष्ट्रगान के समकक्ष मान्यता मिल जाने पर अनेक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसरों पर ‘वंदेमातरम’ गीत को स्थान मिला। आज भी ‘आकाशवाणी’ के सभी केंद्र का प्रसारण ‘वंदेमातरम’ से ही होता है। कई सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं में ‘वंदेमातरम’ गीत का पूरा-पूरा गायन किया जाता है।
  • 15 सितंबर 1959 को जब दूरदर्शन शुरू हुआ तो सुबह-सुबह शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से ही होती थी।
  • 2003 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा आयोजित एक सर्वे में, जिसमें उस समय तक के सबसे मशहूर दस गीतों का चयन करने के लिए दुनिया भर से लगभग 7000 गीतों को चुना गया था और बीबीसी के अनुसार 155 देशों/द्वीप के लोगों ने इसमें मतदान किया था उसमें वन्दे मातरम् शीर्ष के 10 गीतों में दूसरे स्थान पर था!
  • 2005 में वंदेमातरम के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक साल के समारोह का आयोजन किया गया। 7 सितंबर, 2006 में इस समारोह के समापन के अवसर पर ‘मानव संसाधन मंत्रालय’ ने इस गीत को स्कूलों में गाए जाने पर बल दिया। हालांकि इसका विरोध होने पर उस समय के ‘मानव संसाधन विकास मंत्री’ अर्जुन सिंह ने संसद में कहा कि ‘गीत गाना किसी के लिए आवश्यक नहीं किया गया है, यह स्वेच्छा पर निर्भर करता है।

राष्‍ट्रीय गान (National Anthem)

  • भारत का राष्‍ट्रीय गान “जन-गण मन” है
  • इसकी रचना राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ टैगोर जी ने की थी
  • रविंद्रनाथ टैगोर जी ने राष्ट्रगान की रचना
  • वर्ष 1911 में की थी
  • इसके सबसे पहली बार 7 दिसंबर, 1911 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था
  • भारत के संविधान द्वारा राष्ट्रगान को 24 जनवरी, 1950 को इसे स्वीकार किया गया था
  • राष्ट्रगान के पूरे संस्करण को गाने में कुल 52 सेकेंड का समय लगता है
  • राष्ट्रगान को मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया था
  • इसके बाद में इसका अनुवाद हिंदी और अंग्रेजी में भी कर दिया गया था
  • पहले इसमें सिंध का भी नाम था लेकिन बाद में इसमें संशोधन कर सिंध की जगह सिंधु कर दिया गया
    क्योंकि देश के विभाजन के बाद सिंध पाकिस्तान का एक अंग हो चुका था
  • राष्‍ट्रगान को गाने के लिए कुछ नियम बनाये गये हैं

o नियम के अनुसार जब कहीं भी राष्‍ट्रगान बजाया या गाया जा रहा हो तो देश के प्रत्येक नागरिक का ये कर्तव्य होता है कि वो अगर कहीं बैठा हुआ है तो उस जगह पर खड़ा हो जाए
o साथ ही नागरिकों से ये भी अपेक्षा की जाती है कि वो भी राष्ट्रगान को दोहराएं

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