Computer and Health

Computer and Health- लगातार कंप्यूटर पर बैठने से हो सकती हैं यह बीमारियां, जानें इनसे बचने के उपाय

Computer and Health: आज का युग विज्ञान का युग है। विज्ञान ने हम लोगों को बहुत से एसे यंत्र और व उपकरण दिये हैं जिनसे हमारे जीवन में सरलता व सहजता का विस्तार हुआ है। इस प्रकार ये यंत्र हमारे जीवन के लिये वरदान सिद्ध हुए हैं। इन्हीं वरदान-स्वरूपी यंत्रों में एक यंत्र है कम्प्यूटर।

जब कभी भी कम्प्यूटर के विषय में किसी से कोई चर्चा करते हैं, तो वह तकनीकी ज्ञान अर्थात् हार्डवयर व सॉफ्टवेयर तक ही सीमित रह जाती है, किन्तु कभी भी हम इस विषय पर कोई चर्चा नहीं करते कि हम लोगों की सेहत पर इस नयी तकनीक का कोई असर होता है अथवा नहीं। कम्प्यूटर का हमारी सेहत पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े इस बात पर ध्यान देना आवश्यक है।

यह एक महान् आश्चर्य का विषय है कि कम्प्यूटर पर काम करने की धुन में हम इतना मग्न हो जाते हैं कि स्वयं को लगभग भूल ही जाते हैं। जिसके परिणामस्वरूप Computer पर काम करने के कारण अपना स्वास्थ्य ( Health) गवा देने वालों की संख्या निरन्तर बढ़ती जा रही है।

कम्प्यूटर से होने वाली बीमारियाँ – Computer Diseases (Computer and Health):

कम्प्यूटर से होने वाली बीमारियों को ‘कारपल टेनल सिंड्रोम’ रिपीटेटिव स्ट्रेन इन्जरी सिंड्रोम नाम दिया गया है। ये नयी-नयी प्रकार की बीमारियाँ कम्प्यूटर पर कार्य करते समय की-बोर्ड पर तेजी से दौड़ती हमारी उंगलियों व हाथ के एक ही स्थिति बार-बार संचलित होने और मस्तिष्क में लम्बी एकाग्रता से उत्पन्न होने वाली स्ट्रेन केकारण होती है।

इन सबके कारण कुछ समय में ही हमारे गले, कंधे, कलाई व हाथों में दर्द और अकड़नें होने लगती हैं जिसके कारण आगे चलकर बांहें कमजोर होने लगती हैं। इसके साथ ही रीढ़ की हड्डी में अकड़न व स्पांडी लाइटिस की बीमारी हो सकती है।

आँखों पर प्रभाव :

कम्प्यूटर मॉनीटर से निकलने वाली टाक्सीन व कुछ अन्य जहरीली गैसें जो गंधहीन होने के कारण नोटिस में नहीं आती, अपनी अधिक मात्रा के कारण शरीर में कैंसर उत्पन्न कर सकती हैं। स्क्रीन पर टकटकी लगाकर काफी देर तक देखते रहने के कारण आँखों का तनाव, नजर की कमी व ड्राई आई सिंड्रोम जैसी बीमारियाँ हो जाती हैं जिसके फलस्वरूप आँखें झपकना भूल जाती हैं।

Tenosynovitis:

इस बीमारी का सीधा असर कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता की हथेली पर पड़ता है। उसकी हथेली की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है। इसके परिणामस्वरूप उसकी हथेली में भयंकर दर्द होने लगता है।

कंधों में जकड़न (Rotator Cuff Injury):

यह बीमारी कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता के कंधों को अपने असर में लेती है। कंधों में जकड़न व अकड़न की स्थिति आ जाती है जिसके परिणामस्वरूप कंधों में असहनीय दर्द होने लगता है।

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हाथ के स्नायुओं में जलन (Tendinitis):

किसी कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता के हाथ के स्नायुओं को प्रभावित करती है यह बीमारी। इस बीमारी के कारण हाथ के स्नायुओं में जलन होने लगती है व दर्द का अहसास होता है।

कोहनियों पर सूजन (EP Code Deltitis Tendon ):

यह बीमारी कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता की बगलों व कोहनियों को अपनी गिरफ्त में लेती है। प्रयोगकर्ता की बगलों व कोहनियों पर सूजन आ जाती है और उसकी बगलों व कोहनी में दर्द होने लगता है।

हथेली की मांसपेशियों में सूजन (Carpal Tunnel Syndrome):

इस बीमारी के कारण कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता की हथेली की मांसपेशियों में सूजन आ जाती है और दर्द होना प्रारम्भ हो जाता है।

बचाव के उपाय:

कम्प्यूटर द्वारा होने वाले रोगों का शिकार वे ही लोग होते हैं जो अपना ज्यादातर समय कम्प्यूटर पर कार्य करते हुए बिताते हैं, इन लोगों में प्रमुखता से डी०टी०पी० ऑपरेटर, शेयर दलाल, चार्टड एकाउन्टेन्ट व वे लोग हैं जिनका काम मॉनीटर स्क्रीन पर बैठे रहना है। वैज्ञानिकों व डॉक्टरों के अनुसार कम्प्यूटर द्वारा होने वाले ये रोग कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता द्वारा कम्प्यूटर के गलत ढंग से प्रयोग के फलस्वरूप होते हैं।

इन समस्याओं से बचने का एक ही तरीका है और वह यह है कि कम्प्यूटर व इसके सहायक उपकरणों को सही ढंग से लगाया जाये तथा स्वास्थ्य संबन्धी नियमों का पालन किया।

  • कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व सबसे पहले अपनी सीट पर ध्यान दें। सीट की ऊँचाई सीट का झुकाव व पीठ के सहारे को एडजस्ट करें। ये सब इस प्रकार व्यवस्थित होने चाहिये कि आप आरामदायक ढंग से बैठकर कार्य कर सकें। सीट की ऊँचाई को बढ़ाने के लिये सल वस्तु के स्थान पर गद्दी का प्रयोग करना चाहिये।
  • पाँव फर्श पर समतल रखे होने चाहिये, साथ ही शरीर से थोड़े से आगे होने चाहिये।
  • घुटने आरामदायक तरीके से मुड़े होने चाहियें तथा जांघे फर्श के समानांतर होनी चाहिये। पीठ को सहारा देने वाले कुर्सी के हिस्से का पीछे की तरफ झुकाव मामूली होना चाहिये, ताकि पीठ पूरी तरह से इस पर टिकी रहे।
  • कार्य करते समय एक पैर को दूसरे पैर पर चढ़ाने अथवा मोड़कर कुर्सी से सटाने से रक्त प्रवाह में रुकावट आती है जिससे बहुत जल्दी थकान आ अनुभव होता है।
  • कार्य करने के लिये की-बोर्ड व माऊस हमेशा करीब होना चाहिये ताकि इनका प्रयोग आरामदायक ढंग से किया जा सके। ऐसा नहीं होना चाहिये कि माऊस व की-बोर्ड को प्रयोग करने के लिये आपको बार-बार झुकना पड़े अथवा हाथों को आगे बढ़ाना पड़े।
  • कार्य करते समय मस्तिष्क को बिल्कुल तनाव-मुक्त रखना चाहिये। तनाव होने से थकान जल्दी होती है। र कार्य करते समय अपने पास बैठे लोगों से न तो स्वयं बात करें और ना ही दूसरों को बातें करने दें। यदि आवश्यक हो, कार्य रोककर बातें करें। इससे काम करते समय होने वाली गलतियों से बचाव तो होता ही है, साथ ही समय भी बचेगा।
  • मॉनीटर का स्तर आँखों के स्तर से थोड़ा नीचा ही होना चाहिये ताकि कार्य करते समय बार-बार गर्दन को ऊपर-नीचे न करना पड़े।
  • मॉनीटर हमेशा ऐसे स्थान पर रखा होना चाहिये कि पीछे से आने वाली रोशनी उस पर न पड़े, क्योंकि ऐसा न होने पर रोशनी की चमक आँखों पर पड़ेगी जिससे कार्य करने में तो दिक्कत होगी ही, साथ ही आँखों पर भी गलत असर पड़ेगा।
  • मॉनीटर को छाती की ऊँचाई तक ही रखना चाहिये तथा मॉनीटर व आपकी आँखों के बीच कम-से-कम 15 इंच से 18 इंच तक की दूरी होनी चाहिये।
  • लगातार टकटकी बाँधकर कम्प्यूटर की ओर नहीं देखना चाहिये वरन् बीच-बीच में कहीं दूर या दूसरी तरफ देखने की कोशिश करें। लंच अथवा किसी समय 5 से 10 मिनट के लिये पीठ टिकाकर आँखें बंद करके बैठने से आँखों को अत्यधिक राहत प्राप्त होती है।
  • माऊस को प्रयोग करते समय उसे कसकर नहीं पकड़ना चाहिये। माऊस को हल्के हाथ से पकड़कर रखें व चलाते समय कलाई को सीधा रखना चाहिये। एक विशेष बात, माऊस को चलाते समय पूरी बाँह का प्रयोग करना चाहिये केवल कलाई का नहीं।
  • कार्य करते समय स्थिति को ठीक रखते हुए थोड़ी-थोड़ी देर के लिये अपनी मुद्रा भी बदलते रहें। लगातार एक ही मुद्रा में बैठे रहने से थकान तो होती ही है, साथ ही कमर, गर्दन व सिर में दर्द भी हो सकता है।
  • कार्य करते समय थोड़ी-थोड़ी दर में उठते रहना चाहिये। साथ ही कुछ देर टहलना भी चाहिये। लगातार एक जैसा कार्य बार-बार करने से बचना चाहिये। बीच-बीच में आँखों को आराम देने के लिये आँख-मिचौली करनी चाहिये जिससे आँखें बुरे असर से दूर रहें।
  • काम करते समय कलाई को मुड़ी हुई अवस्था में नहीं रखना चाहिये। टाइपिंग करते समय कलाई में खिंचावन हो अथवा उसे झटके न लगें इसका भी विशेष ध्यान रखना चाहिये। कलाइयों को बाँहों की सीध में रखना चाहिये।
  • आँखों में सूखापन महसूस होने पर उन्हें पानी डालकर गीला करने की कोशिश न करें। क्योंकि स्वच्छ पानी के अभाव में आँखों में इन्फैक्शन भी हो सकता है। पानी के स्थान पर चिकनाई अथवा गुलाब जल का प्रयोग बेहतर है। किन्तु डॉक्टर की सलाह लेकर उपचार करना अधिक श्रेयस्कर है।
  • कार्य के दौरान, कार्य की अधिकता के कारण थूक, छींक व पेशाब आदि को ज्यादा देर तक रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिये। ऐसा करने से संवदेनशील बीमारी होने का खतरा रहता है।
  • आठ घन्टे से अधिक समय तक कार्य करने वाले व्यक्ति के लिये आवश्यक है कि वह कम-से-कम तक पैदल चले तथा हर एक-दो घन्टे में पाँच मिनट का विश्राम ले।
  • कम्प्यूटर एक आश्चर्यजनक उपकरण है किन्तु प्रत्येक फायदेमंद उपकरण की तरह इसमें भी कुछ ऐसी बातें हैं जिनका ख्याल न रखने पर नुकसान हो सकते हैं और अनेक बीमारियों की चपेट में आकर व्यक्ति अपाहिज हो सकता है।
  • यदि एक कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता ध्यान दे और ऊपर लिखी सावधानियों पर ध्यान दे तो इन साधारण सावधानियों को बरतकर नुकसानों व बीमारियों से बच सकता है और कम्प्यूटर नामक इस वरदान को अभिशाप बनने से रोक सकता है।
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तो अगर आप COMPUTER and HEALTH के संबंध मे इन ऊपर दिये गए बिन्दुओ पर ध्यान दोगे तो आप Computer का भी उपयोग ज्यादा समय और सुरक्षित रूप से कर सकते हैं। आपको ये लेख कैसा लगा कमेंट मे जरूर लिखे। धन्यवाद!

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