Tax Rebate

Tax Rebate- जानिये उन Rebate के वारे मे जिनसे बचा सकते हैं टैक्स.

सीमित आमदनी में परिवार चलाना बहुत मुश्किल काम है. इस वजह से ज़्यादातर लोग इनकम टैक्स बचाने (TAX Rebate) की कोशिश करते रहते हैं

खुद Income Tax रिटर्न फ़ाइल करते समय मन मे यह सवाल होता है कि टैक्स कैसे वचाया जाये ? ज़्यादातर लोगों को होम लोन, मकान का किराया और कुछ अन्य निवेश पर मिलने वाली छुट कि मोटी मोटी जानकारी तो होती है, लेकिन यह नहीं पता होता कि कुल कितनी तरह कि छुट(Tax Rebate) का लाभ ले सकते हैं?

हम आपको बता दें कि हमे आयकर मे 7 प्रमुख छुट मिल सकतीं हैं जिनका लाभ हम इन come tax रिटर्न फ़ाइल करते वक्त ले सकते हैं। जिनमे एक है।

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Tax Rebate- धारा80 C

इस धारा के तहद करदाता अपनी कुल करयोग्य आय को 1.50 लाख रुपये तक घाटा सकता है। इस धारा की कटौती का लाभ कई तरह के निवेश विकल्पों मे निवेश करके लिया जा सकता है। जैसे

  • अपने नाम से ईपीएफ़,
  • होम लोन के मूलधन का भुगतान,
  • नए मकान की खरीद पर चुकाई गई Stamp Duty,
  • सुकन्या समृद्धि योजना,
  • टैक्स सविंग म्यूचुअल फ़ंड,
  • टैक्स सविंग एफ़डी या बॉन्ड आते हैं।

इसके अतिरिक्त अपने स्वयं के या जीवनसाथी के या बच्चों के नाम पर जीवन बीमा प्रीमियम,
पीएफ़ या ULIP मे निवेश करने पर भी इस धारा मे कटौती मिलती है।
अधिकतम दो बच्चों को स्कूल या कॉलेज की ट्यूशन फीस का भुगतान करने पर भी इस धारा मे कटौती ली जा सकती है।

धारा 80सीसीडी (1बी)

इस धारा के तहत नेशनल पेंशन योजना (NPS) मे निवेश करने पर अधिकतम 50,000 रुपये की कटौती (Tax Rebate) मिलती है। इस तरह 80C एवं 80CCD(1बी) मिला कर अधिकतम 2 लाख रुपये तक की कटौती मिल सकती है।

Tax Rebate- धारा 80डी

धारा 80 D के तहत स्वयं के लिए या जीवन साथी के लिए इसके अलावा आप पर आश्रित बच्चों के , उच्च शिक्षा के लिए चकाए गए मेडिकल बीमा प्रीमियम के लिए अधिकतम 25,000 रुपये की कटौती मिलती है। और आपके माता-पिता के लिए चकाए गए मेडिकल बीमा प्रीमियम के लिए अधिकतम 25,000 रुपए की अतिरिक्त कटौती (Tax Rebate) मिलती है।
यदि माता-पिता की आयु 60 वर्ष से अधिक है तो कटौती 25,000 से बढ़ कर पर अधिकतम 50,000 हो जाती है।

एक बात ध्यान रखें कटौती तभी मिलती है जब प्रीमियम का भुगतान नकद न किया हो।
इस धारा में उपरोक्त लिमिट को ध्यान मे रखते हुए 5000 रुपए तक की प्रिवेटिव हेल्थ चेक अप की भी कटौती मिलती है।

धारा 80 DD

इस धारा के अंतर्गत यदि किसी करदाता पर कोई दिव्याङ्ग (Handicap) आश्रित है इसके लिए उसका जीवनसाथी हो सकता है, उसके बच्चे हो सकते हैं, या उसके माता-पिता व भाई बहन हो सकते हैं। तो उनके इलाज और पालन-पोषण पर हुए खर्च पर 75000 रुपये तक की कटौती का प्रावधान है। और अगर इन सभी मे से किसी की गंभीर बिकलांगता है तब करदाता 125,000 रुपये तक की कटौती का लाभ ( Tax Rebate ले सकता हैं।

धारा 80 DDB

इस धारा के तहद कुछ खास व गंभीर बीमारियाँ के इलाज के खर्च पर ही छुट ली जा सकती है।
जैसे कैंसर होने पर , एड्स होने पर, किडनी फ़ेल होने पर, हीमोफोलिया की बीमारी पर, थेलेसेमिया की बीमारी पर ।

इसके अलावा कुछ और भी बीमारियाँ है लेकिन इनमे गड़बड़ी का स्तर 40 फीसदी या इससे अधिक होना चाहिए। तो वो बीमारियाँ हैं-
डिमेंशिया, डिस्टोनिया मसक्यूलोरम डिफॉर्मेंस, मोटर न्यूरॉन डिजीज, एटैक्सिया, खोरिया, हेमीबैलिसमस, एफेसिया, पार्किंसन इत्यादि।
अब जान लेते है की कितनी कटौती तक ली जा सकती है?
छुट की रकम व्यक्ति की उम्र पर निर्भर करती है. यदि खर्च 60 साल से कम के व्यक्ति पर किया जा रहा है तो 40,000 रुपये तक का डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

यदि बीमार व्यक्ति की उम्र 60 साल से ज्यादा है तो एक लाख रुपये तक का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है।

सेक्शन 80E:

बच्चों के एजुकेशन लोन पर आयकर कानून के सेक्शन 80E के तहत TAX मे छूट मिलेगी. आयकर की धारा 80E के तहत उच्च शिक्षा हेतु लिए कर्ज पर चुकाए गए ब्याज पर भी TAX छूट मिलती है.
एजुकेशन लोन किसी भी पाठ्यक्रम के लिए लिया जा सकता है. पति, पत्नी या बच्चे के एजुकेशन लोन पर यह छूट मिलती है. तो उच्च शिक्षा के लिए छुट आप धारा 80E के तहद ले सकते है।

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सेक्शन 80G :

चैरिटेबल ट्रस्ट या मंदिर को दान
कुछ लोग सामाजिक कल्याण से जुड़े चैरिटेबल ट्रस्ट को दान देते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अपनी आय के 10 फीसदी हिस्से तक पर आयकर कानून के सेक्शन 80G के तहत टैक्स छूट ले सकते हैं.

यह टैक्स छूट इस बात पर निर्भर करेगी कि आप किस संस्था को दान कर रहे हैं. संस्था के अनुरूप ही दान की गई राशि पर 50 फीसदी या 100 फीसदी टैक्स छूट मिलेगी. इसके लिए आप दान करने के बाद संस्थान से रसीद लें और आयकर छूट का सर्टिफिकेट भी लें.

धारा 80 GG

काफी लोग होम लोन पर टैक्स बेनिफिट के बारे में तो जानते हैं| जैसा अभी हमने बताया था की मूल भुगतान (principal repayment) के लिए धारा 80C के तहत टैक्स बेनिफिट मिलता है|
अब घर लेना तो सबके बस की बात नहीं| आपको पता है आजकल मकानों के दाम आसमान छू रहे हैं| इसीलिए हम में से काफी लोग किराये पर भी रहते हैं|

तो अच्छी बात यह है की किराए पर रहने पर भी आपको कुछ टैक्स बेनिफिट मिलते हैं| इसका मतलब अगर आप किराए पर रहते हैं, तो दिए गए किराए पर कुछ टैक्स बेनिफिट पा सकते हैं|
इस धारा मे किराए के घर के भुगतान पर अधिकतम 60,000 रुपये तक की कटौती का लाभ ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको HRA नहीं मिलना चाहिए। इसके लिए आपका स्वयं का या जीवन साथी का या बच्चों का उस सहर मे मकान नहीं होना चाहिए, जहां आप नौकरी कर रहे हैं।

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Windows OS

विंडोज क्या है ? – What is Windows

माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज क्या है ?

What is Windows माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज का पूरा नाम है- “माइक्रोसॉफ्ट-वर्ड इंटरएक्टिव नेटवर्क डेवलपमेंट फॉर ऑफिस वर्क सॉल्यूशन”, माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज, पर्सनल कम्प्यूटर के लिए माइक्रोसॉफ्ट द्वारा विकसित ऑपरेटिंग सिस्टम है। माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स तथा पॉल एलेन हैं। विश्व के लगभग 90% पर्सनल कम्प्यूटर में माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज क्या है विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोग हो रहा है। यह ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI), मल्टीटास्किंग, वर्चुअल मेमोरी की सुविधा देता है।

(Windows)

विंडोज 32/64 बिट मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसकी शुरूआत 1985 में एम एस-डॉस पर रन करने वाले एक ऑपरेटिंग एनवायरमेण्ट सिस्टम के रूप में हुई थी। माइक्रोसॉफ्ट विंडोज का प्रथम स्वतन्त्र संस्करण 1.0, 20 नवम्बर, 1985 में आया, जिसे इंटरफेस मैनेजर के नाम से जाना जाता था। परन्तु माइक्रोसॉफ्ट के मार्केटिंग प्रमुख रॉलण्ड हरन्सन (Rowland Hanson) ने विण्डोज नाम का सुझाव दिया, जो उपभोक्ताओं को ज्यादा आकर्षक लगा।

विडोज डेस्कटॉप Windows Desktop

जब कम्प्यूटर सिस्टम में बूटिंग की प्रक्रिया सम्पन्न हो जाती है तब जो स्क्रीन हमारे सामने दिखता है वह डेस्कटॉप है। यह सभी कार्यक्रमों (Programs) तथा उन तक पहुँचने के लिए आवश्यक निर्देशों (Commands) की पृष्ठभूमि है। डेस्कटॉप हर ऑपरेटिंग सिस्टम तया हर संस्करण में बदलता रहता है। डेस्कटॉप के ग्राफिक पृष्ठभूमि को वॉल पेपर कहते हैं। बॉल पेपर को ‘कन्ट्रोल पैनल’ में डिस्पले प्रोपर्टीज के ‘डेस्कटॉप’ ऑसन में जाकर फोटो या चित्र या विभिन्न पैटर्न में बदला जा सकता है। कम्प्यूटर स्क्रीन पर ब्लिंक (Blink) करने वाले प्रतिक को कर्सर कहते है।

Windows 10 Desktop

अन्य महत्त्वपूर्ण सुविधा (Feature) जो डेस्कटॉप पर प्राप्त है वो आइकन हैं इस आइकन पर डबल क्लिक करने पर प्रोग्राम रन (Run) होता है या वह फाइल खुलता है। यूजर अपनी सुविधा के लिए प्रोग्राम का शार्टकट बना कर Desktop पर रख सकते हैं तथा तीव्रता से उसे चला सकते हैं। आइकन को क्लिक और ड्रैग एंड ड्राप के द्वारा डेस्कटॉप पर कहीं भी ले जाया जा सकता है।

डेस्टॉकटॉप पर कुछ महत्वपूर्ण आइकन

माई कम्प्यूटर (My Computer):

यह डेस्कटॉप पर एक महत्वपूर्ण आइकन है जो Drives, प्रिन्टर्स, कंट्रोल पैनल और दूसरे सिस्टम अनुप्रयोग (System application) का करने में सक्षम बनाता है। दूसरे सर्पोटिंग अनुप्रयोग, जैसे- ‘Add New Hardware’, Add Remove Program’, ‘Accessibility option एवं कंट्रोल पैनल के द्वारा की गई, ম प्रिन्टर, मॉडम, मॉनीटर डिस्पले और साउन्ड के सेटिंग में परिवर्तन कर सकते हैं।

रीसायकल बीन (Recycle Bin);

जब हम किसी फाइल तथा फोल्डर को हटाते (Delete) तो यह रिसाईकल बीन में जाता है। वहाँ तब तक रहता है जबतक रिसाईकल बीन को खाली कर दिया जाये! यहाँ स्टोर फाइल या फोल्डर को रिस्टोर द्वारा वापस अपने जगह लाया जा जाना है। जब रिसाईकल थीन खाली किया जाता है तो सभी deleted files स्थायी रूप से हट जाता है .

माय नेटवर्क प्लेसेस (My Network Places):

इसके अन्तर्ग नेटवर्क कनेक्शन दर्शाया जाता है। जो सिस्टम को इंटरनेट से जोड़ना संभव बनाता है। जिससे दूसरे कम्प्यूटर के साथ संचार स्थापित करने तथा दूसरे के संसाधनों का उपयोग कर सकते है।

माय डॉक्यूमेंट (My Document):

यह कम्प्यूटर के हाई डाइट में एक विशेष फोल्डर है, जिसका उपयोग यूजर अपनी पर्सनल डॉक्यूमेंट संगीत, पित्र डाउनलोड और दूसरे फाइतों को महीन करने के लिए करना है।

Task Bar:

डेस्कटॉप के नीचे किनारे पर एक पतली पट्टी जैसा बॉक्स होता है जिसके एक छोर पर स्टार्ट बटन तथा दूसरे छोर पर घडी (clock) रहता है। टास्कबार पर घड़ी की तरफ कुछ और छोटे छोटे आइकॉन रहते हैं, जिसे Quick Launch कहते हैं। यह अक़्सर उपयोग होने वाले प्रोग्राम को एक क्लिक में खोलता है।

टास्क बार में कोई परिवर्तन करने के लिए स्टार्ट मेन्यू में सेटिंग विकल्प को चुना जाता है। सेटिंग के सब मेन्यू में Taskbar and Start Menu विकल्प पर क्लिक करने पर Taskbar and Start Menu प्रोपर्टीज विंडो खुल जाता है। इस विंडों में कई सारे विकल्प होते हैं, जिनको हम अपने अनुसार चयन कर सकते हैं।

स्टार्ट मेन्यू Start Menu

Windows XP, Windows 7 में टास्कबार के स्टार्ट बटन पर क्लिक करने पर एक मेन्यू खुलता है जिसे स्टार्ट मेन्यू कहते हैं। इस मेन्यू में कई ऑप्सन आते हैं। कुछ ऑप्सन के साथ छोटा सा तीर का निशान रहता जो किसी और मेन्यू को दर्शाता है या उस निशान पर माउस के प्वाइंटर ले जाने पर एक और मेन्यू खुल जाता है। स्टार्ट मेन्यू में निम्नलिखित ऑप्सन होते हैं।

प्रोग्राम (Program):

यह कंप्यूटर में इंस्टाल्ड (installed) प्रोग्रामों की सूची है।

फेवरिट (Favorites):

यह बुक मार्कड (Book Marked) वेब पेज का सूची है।

डॉक्यूमेंट (Documents) :

सबसे वर्तमान में उपयोग किये गये दस्तावेजों की सूची है।

सेटिंग्स (Settings):

सिस्टम अनुप्रयोग जैसे- कंट्रोल पैनल, प्रिन्टर, टास्कबार और स्टार्ट मेन्यू तथा नेटवर्क कनेक्शन इत्यादि की सूची है। कंट्रोल पैनल के द्वारा किसी भी हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर के सेटिंग्स में परिवर्तन कर सकते हैं।

सर्च (Search):

किसी विशेष फाइल या फोल्डर्स को ढूंढने के लिए।

हेल्प (Help)

प्रोग्राम संबंधी कोई भी सहायता प्राप्त करने के लिए।

रन (Run):

किसी प्रोग्राम को रन करने के लिए या किसी फाइल, फोल्डर या दस्तावेज को खोलने के लिए।

लॉग ऑफ (Logo):

पासवर्ड प्रोटेक्ट एक उपयोगकर्ता को लॉग ऑफ करने तथा दूसरे उपयोगकर्ता को लॉग ऑन करने की अनुमति देता है।

टर्न ऑफ या शट डाउन (Turn off or Shut down)

सिस्टम को बंद करता है या restart करता है।

विंडोज के अन्तर्गत उपयोगी प्रोग्राम Useful Programs inside Windows

विंडोज के अन्तर्गत उपयोगी प्रोग्राम निम्नलिखित है-

  • नोट पैड (Note Pad) पेंट (Paint)
  • वर्डपैड (Word Pad)
  • कैलकुलेटर (Calculator)
  • इमैजिंग (Imaging)
  • मीडिया प्लेयर (Media Player)
  • सीडी प्लेयर (CD Player)
  • ध्वनि रिकॉर्डर और वाल्यूम कंट्रोल (Sound Recorder and Volume Control)
  • खेल (Game)

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Computer Viruses

‘Computer Viruses’ Full Information- कंप्यूटर वायरस की सम्पूर्ण जानकारी

आज के इस लेख में हम जानेंगे Computer Viruses के बारे में. कंप्यूटर वायरस आज के समय मे ऐसी समस्या बन गई है उन लोगों के लिए जो कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल और टैबलेट इत्यादि का उपयोग करते हैं। तो आज हम इस में यह जानेंगे कि यह वायरस होते क्या है? और यह कितने प्रकार के होते हैं? और हमारे लिए क्या क्या समस्‍याऐ पैदा करते हैं? तो Virus को समझने से पहले हम समझते हैं Malware के बारे में.

Malware क्या है?

Malware एक तरह का कंप्यूटर सॉफ्टवेयर ही होता है जिसे हम Malicious Software भी कहते हैा यह एक तरह का दूषित सॉफ्टवेयर होता है जिसका एक ही मकसद होता है लोगो के कंप्यूटर को नुक्सान पहुचाना. malware को बनाया ही इसी मकसद के साथ जाता है की यह हमारे या किसी स्पेसिफिक यूजर के कंप्यूटर को नुक्सान पहुचाये इसके और भी कई मकसद हो सकते हैं जैसे आपका डाटा चुराना, आपका पासवर्ड चुराना, या आपके कंप्यूटर के डाटा को मिटाना यानी डिलीट कर देना. Malicious Software अपने आप नहीं बनते इनको किसी डेवलपर या हैकर द्वारा ही बनाया जाता है, जिससे वो हमारे कंप्यूटर को हानि पंहुचा सके।

Malicious Software आपके कंप्यूटर में कई तरीको से आ सकते हैं जैसे या तो आप खुद ही उन्हें गलती से डाउनलोड कर ले या किसी स्पैम ईमेल के जरिये या किसी वेबसाइट के जरिये. क्यूंकि ऐसी कई वेबसाइट हैं जिन पर malicious सॉफ्टवेयर की लिंक उपलब्ध है और एक ही दिन में लोगों को ढेरों स्पैम ईमेल आते हैं इनमे से कितने ही लोग malware डाउनलोड भी कर लेते हैं और इनका शिकार हो जाते है।

Malware के प्रकार | Types of Malicious software

Malicious software के कई प्रकार भी होते हैं जो अलग-अलग तरह से काम करते हैं या यूँ कहे की हमारे कंप्यूटर और डाटा को नुकशान पहुचाते है इनके काम करने का तरीका अलग-अलग होता है Malware के कुछ टाइप्स इस प्रकार है।

Virus (वायरस)

What is Computer Viruses ?

अब वायरस होता क्या है ? वायरस एक ऐसे प्रोग्राम होते हैं या सॉफ्टवेयर होते हैं जो हमारे कंप्यूटर, लैब टॉप, मोबाइल व टैब मैं पड़े हुए प्रोग्राम को खराब करते हैं, उन में पड़ी हुई फाइल्स को इंफेक्टेड करते हैं। वह फाइल जो हमारे लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट होती हैं जैसे डॉक्यूमेंट फाइल इमेज फाइल्स या वीडियो फाइल्स और भी बहुत सारी ऐसी फाइल्स जो हमारे लिए बहुत ही ज्यादा इंपोर्टेंट होती हैं उन फाइलों को इंफेक्टेड करती है। वायरस मनुष्य में जिस तरह से बीमारी फैलाते हैं जैसे TV का वायरस जुकाम का वायरस और भी कई अन्य तरह के वायरस से होने वाली बीमारी हम लोगों को लगती है उस तरह के लिविंग वायरस नहीं होते कंप्यूटर या लैपटॉप में जो वायरस होता है वह एक प्रोग्राम होता है जिसका नाम वायरस रख दिया गया है जो कि हमारे फाइल्स को खराब करता है।

तो यह वायरस नाम रखा था 1983 में अमेरिका के एक साइंटिस्ट ने जिनका नाम था, फ्रेड्रिक बी. कोहन, इन्होंने सबसे पहले इस तरह के सॉफ्टवेयर का नाम वायरस रखा। जिसका fulform है – Vital Information Resource Under Siege.

Creepar नामक वायरस पहला ऐसा वायरस था जो ARPANET में 1970 में नेटवर्क पर फैला था। जैसे आज इंटरनेट पर कई तरह के viruses फैले हुए हैं, उसी तरह से पहले US Defence Military के लिए एक नेटवर्क बनाया गया था जिसका नाम था ARPANET Station, उसी में ये नेटवर्क वायरस फैला हुआ था।

PC में फैलने वाला सबसे पहला वायरस ELK Cloner था जो 1982 में फैला था। जिसे एक 15 वर्षिय रिचर्ड स्क्रेंटा ने ऐप्पल II (Dos 3.3) ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए यह वायरस बनाया था, जो फ्लॉपी डिस्केट्स पर Store रहता था। जब कंप्यूटर को एल्क क्लोनर से संक्रमित फ्लॉपी डिस्क से बूट किया जाता तो वायरस उस PC को Infected कर देता है। और हमारा कंप्यूटर खराब हो जाता है।

Worms (वोर्म्स)

Worms काफी हद तक कंप्यूटर वायरस (Computer Viruses) की तरह ही होतें है लेकिन इसकी ख़ास बात यह है की यह अपने आप की ही कई कॉपी बना सकता है यानी यह फैलता जाता है और आपके नेटवर्क से जुड़े सारे या किसी भी कंप्यूटर में जाकर उसे भी इन्फेक्टेड कर सकता है इसे फैलने के लिए किसी निर्देश की जरूरत नहीं पड़ती यह आपके कंप्यूटर में ईमेल, इन्टरनेट सर्फिंग, downloading के समय आ सकता है यह वायरस की तरह ही आपके डाटा को नुकशान पहुचाता है या उसे क्रेश कर देता है।

Trojan horse (ट्रोजन हॉर्स) Computer Viruses

Trojan horse की शुरुआत अभी से बल्कि बहुत ही प्राचीन काल में हुई थी जब ग्रीक के लोगो ने टर्की के एक शहर ट्रॉय पर हमला करने के लिए एक बड़ा लकड़ी का घोडा बनाया था जिसमे कई सेनिक छिप कर टर्की के अंदर गए थे और रात होते ही उन्होंने टर्की पर हमला कर दिया था इसी बड़े लकड़ी के घोड़े को Trojan horse दिया गया था। इसी तरह से कंप्यूटर के अंदर भी Trojan horse (Computer Viruses) होते हैं जो install होने के बाद हमारे कंप्यूटर पर नियंत्रण पा लेता है। बसिकली ट्रोजन हॉर्स कंप्यूटर पर नियंत्रण पाने के बाद वायरस और दुसरे malware से हमले करवाता है जिससे हमारा डाटा corrupt हो जाता है।

Ransomware (रैनसमवेयर)

Ransom ware जैसा की नाम से ही पता चलता है हमारे computer में ransom ware एक बार इनस्टॉल होने के बाद हमारे सारे डाटा को एन्क्रिप्ट कर दिया जाता है यानी उसे लॉक कर दिया जाता है या यूँ कहें किडनैप कर दिया जाता है और उसी अनलॉक या डिक्रिप्ट करने के लिए हमसे पैसे मांगे जाते हैं बिलकुल वैसे ही जैसे किसी को किडनैप करने के बाद उसे छुड़ाने के बदले फीरोती या ransom मांगी जाती है। Ransomware के ज्यादातर भुगतान Bitcoin या crypto currency के द्वारा ही होते हैं जिससे ransomware के developer को या ransomware भेजने वाले को पकड़ा ना जा सके।

Spyware (स्पाईवेयर)

Spyware का काम होता है आपके द्वारा अपने कंप्यूटर में की गयी सभी एक्टिविटीज और डाटा पर नज़र रखना और उन्हें किसी और के पास भेजना होता है बिलकुल एक जासूस की तरह यह किसी भी अनजान सॉफ्टवेयर के साथ bind हो कर इनस्टॉल हो सकते हैं क्यूंकि ये बहुत ही छोटे होते है। Spyware को किसी ख़ास व्यक्ति, जगह या किसी ख़ास कंप्यूटर को टारगेट करके बनाया जाता है और इसका काम सिर्फ आपके डाटा पर नज़र रखना होता है।

Adware (ऐडवेयर)

Adware का ख़ास मकसद आपके device या डाटा को हानि पहुचाना नहीं होता बल्कि इसके इनस्टॉल होने के बाद आपको बिना किसी app को ओपन किये ही होम स्क्रीन पर ही advertise दिखने लगते हैं यह अक्सर स्मार्टफोन में देखने को मिलता है यह तरह तरह की टेढ़ी मेढ़ी वेबसाइट से कुछ भी डाउनलोड करने की बजह से होता है।

Malware से बचने के उपाय

दोस्तों आपको malware (Computer Viruses) से बचने के लिए बस कुछ छोटी-छोटी बात का ही ध्यान रखना होता है लेकिन कभी-कभी यह बात हमें पता नहीं होती जिनकी बजह से हमें बहुत सारी समस्याए देखने या झेलने को मिलती हैं तो आइये जानते हैं इन छोटी छोटी बातों के बारे में।

सबसे पहली बात हमेशा कुछ भी डाउनलोड करने से पहले अच्छे से चेक कर लें की वेबसाइट ओरिजिनल है या कोई फेक वेबसाइट है अगर वेबसाइट इतनी पोपुलर नहीं है तो आप उस वेबसाइट पर कमेंट पड़कर पता लगा सकतें है की वह कैसी है अगर आपको उसमे कमेंट सेक्शन नहीं मिलता है तो वहां से डाउनलोड बिलकुल ना करें।

ईमेल अटैचमेंट को ठीक से देखकर ही खोलें और डाउनलोड करने के बाद उन्हें ठीक से किसी antimalware software से स्कैन कर लें।

अगर आपके कंप्यूटर पर कोई नज़र रख सकता है या उसमे कुछ जरूरी डाटा रखा हुआ है तो untrusted या अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए ईमेल अटैचमेंट्स बिलकुल ना खोलें।

सॉफ्टवेयर डाउनलोड करते समय सॉफ्टवेयर की ऑफिसियल वेबसाइट या trusted और जानी मानी वेबसाइट का ही उपयोग करें।

पायरेटेड चीज़ें जैसे फ़िल्में या पेड सॉफ्टवेयर फ्री में डाउनलोड करने के चक्कर में ना पड़ें यह गलत है और इसकी बजह से आप को और आपके कीमती डाटा को खतरे भी हो सकते हैं।

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National Song and the National Anthem

Difference between the National Song and the National Anthem

Difference between the National Song and the National Anthem (राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के अंतर ) :

किसी भी देश की धरोहर में से सबसे खास होता है उस देश का 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रीय गीत'. इनके जरिए ही हर देश की अपनी एक अलग ही पहचान होती है. 'राष्ट्रगान' और 'राष्ट्रीय गीत' में बहुत अंतर होता है लेकिन ये दोनों ही गीत मन में देशभक्ति की भावना को बढ़ा देते है।
राष्‍ट्रीय गीत और राष्‍ट्रीय गान तो हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं पर क्‍या आपने कभी सोचा है कि इन दोनों में क्‍या अंतर है जबकि दोंनों को गाया जाता है तो एक को राष्‍ट्रीय गीत और दूसरे को राष्‍ट्रगान क्‍यों कहते हैं अगर नहीं तो आइये जानें राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के अंतर के बारे में –

तो यहाँ पर सबसे पहले जानते है राष्ट्रगीत यानी National song के वारे मे

राष्‍ट्रीय गीत (National anthem):

  • भारत का राष्‍ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” है। वंदे मातरम् की रचना बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी। उन्होंने 7 नवंबर, 1876 को बंगाल के कांतल पाडा नामक गांव में इस गीत की रचना की थी। वंदे मातरम् गीत के प्रथम दो पद संस्कृत में तथा शेष पद बांग्ला में थे।
  • 1870 के दौरान अंग्रेज हुक्मरानों ने ‘गॉड सेव द क्वीन’ गीत गाया जाना अनिवार्य कर दिया था। अंग्रेजों के इस आदेश से बंकिमचंद्र चटर्जी को, जो तब एक सरकारी अधिकारी थे, बहुत ठेस पहुंची और उन्होंने 1876 में इसके विकल्प के तौर पर संस्कृत और बांग्ला के मिश्रण से एक नए गीत की रचना की और उसका शीर्षक दिया ‘वंदेमातरम्’। शुरुआत में इसके केवल दो पद रचे गए थे, जो केवल संस्कृत में थे।
  • इस गीत का प्रकाशन 1882 में बंकिमचंद्र के उपन्यास आनंद मठ में अंतर्निहित गीत के रूप में हुआ था। इस उपन्यास में यह गीत भवानंद नाम के संन्यासी द्वारा गाया गया है। इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनाई थी।
  • बंगाल में चले आजादी के आंदोलन में विभिन्न रैलियों में जोश भरने के लिए यह गीत गाया जाने लगा। धीरे-धीरे यह गीत लोगों में लोकप्रिय हो गया। ब्रिटिश हुकूमत इसकी लोकप्रियता से सशंकित हो उठी और उसने इस पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना शुरू कर दिया।
  • रवींद्रनाथ टैगोर ने इस गीत को स्वरबद्ध किया और पहली बार 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में यह गीत गाया गया। अरबिंदो घोष ने इस गीत का अंग्रेजी में और आरिफ मोहम्मद खान ने उर्दू में अनुवाद किया।
  • ‘वंदेमातरम्’ का स्थान राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर है। यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्ररेणा का स्रोत था।
  • 1901 में कलकत्ता में हुए एक अन्य अधिवेशन में चरनदास ने यह गीत पुनः गाया।
  • 1905 में बनारस में हुए अधिवेशन में इस गीत को सरला देवी ने स्वर दिया। बैठक में गीत को राष्ट्रगीत का दर्ज़ा प्रदान किया गया। बंग-भंग आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय नारा बना।
  • 1906 में ‘वंदे मातरम्’ देवनागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका संशोधित रूप प्रस्तुत किया।
  • कांग्रेस के अधिवेशनों के अलावा भी आजादी के आंदोलन के दौरान इस गीत के प्रयोग के काफी उदाहरण मौजूद हैं। लाला लाजपत राय ने लाहौर से जिस जर्नल का प्रकाशन शुरू किया, उसका नाम ‘वंदेमातरम’ रखा।
  • अंग्रेजों की गोली का शिकार बनकर दम तोड़ने वाली आजादी की दीवानी मातंगिनी हजारा की जुबान पर आखिरी शब्द ‘वंदे मातरम’ ही थे।
  • 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जब जर्मनी के स्टटगार्ट में तिरंगा फहराया तो उसके मध्य में ‘वंदे मातरम्’ ही लिखा हुआ था।
  • 1920 तक सुब्रह्मण्यम भारती तथा दूसरों के हाथों विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनूदित होकर यह गीत राष्ट्रगान की हैसियत पा चुका था।
  • 1923 में कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम् के विरोध में स्वर उठे। लोग इस गीत की मूर्ति-पूजकता को लेकर आपत्ति उठाने लगे। तब पंडित जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव की समिति ने 28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में पेश अपनी रिपोर्ट में इस राष्ट्रगीत के गायन को अनिवार्य बाध्यता से मुक्त रखते हुए कहा था कि इस गीत के शुरुआती दो पद ही प्रासंगिक हैं, इस समिति का मार्गदर्शन रवींद्र नाथ टैगोर ने किया। इस गीत के उन अंशों को छांट दिया, जिनमें बुतपरस्ती के भाव ज़्यादा प्रबल थे और गीत के संपादित अंश को राष्ट्रगान के रूप में अपना लिया।
  • 14 अगस्त 1947 की रात संविधान सभा की पहली बैठक का प्रारंभ ‘वंदे मातरम’ के साथ और समापन ‘जन गण मन’ के साथ हुआ।
  • 15 अगस्त, 1947 को प्रातः 6:30 बजे आकाशवाणी से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर का राग-देश में निबद्ध ‘वंदेमातरम’ के गायन का सजीव प्रसारण हुआ था।
  • आजादी की सुहानी सुबह में देशवासियों के कानों में राष्ट्रभक्ति का मंत्र फूंकने में ‘वंदेमातरम’ की भूमिका अविस्मरणीय थी। ओंकारनाथ जी ने पूरा गीत स्टूडियो में खड़े होकर गाया था; अर्थात उन्होंने इसे राष्ट्रगीत के तौर पर पूरा सम्मान दिया। इस प्रसारण का पूरा श्रेय सरदार बल्लभ भाई पटेल को जाता है। पंडित ओंकारनाथ ठाकुर का यह गीत ‘दि ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया’ के रिकॉर्ड संख्या STC 048 7102 में मौजूद है।
  • 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा ने निर्णय लिया कि स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदेमातरम’ गीत की उल्लेखनीय भूमिका को देखते हुए इस गीत के प्रथम दो अंतरों को ‘जन गण मन’ के समकक्ष मान्यता दी जाए। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा का यह निर्णय सुनाया।
  • ‘वंदेमातरम’ को राष्ट्रगान के समकक्ष मान्यता मिल जाने पर अनेक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसरों पर ‘वंदेमातरम’ गीत को स्थान मिला। आज भी ‘आकाशवाणी’ के सभी केंद्र का प्रसारण ‘वंदेमातरम’ से ही होता है। कई सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं में ‘वंदेमातरम’ गीत का पूरा-पूरा गायन किया जाता है।
  • 15 सितंबर 1959 को जब दूरदर्शन शुरू हुआ तो सुबह-सुबह शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से ही होती थी।
  • 2003 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस द्वारा आयोजित एक सर्वे में, जिसमें उस समय तक के सबसे मशहूर दस गीतों का चयन करने के लिए दुनिया भर से लगभग 7000 गीतों को चुना गया था और बीबीसी के अनुसार 155 देशों/द्वीप के लोगों ने इसमें मतदान किया था उसमें वन्दे मातरम् शीर्ष के 10 गीतों में दूसरे स्थान पर था!
  • 2005 में वंदेमातरम के सौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक साल के समारोह का आयोजन किया गया। 7 सितंबर, 2006 में इस समारोह के समापन के अवसर पर ‘मानव संसाधन मंत्रालय’ ने इस गीत को स्कूलों में गाए जाने पर बल दिया। हालांकि इसका विरोध होने पर उस समय के ‘मानव संसाधन विकास मंत्री’ अर्जुन सिंह ने संसद में कहा कि ‘गीत गाना किसी के लिए आवश्यक नहीं किया गया है, यह स्वेच्छा पर निर्भर करता है।

राष्‍ट्रीय गान (National Anthem)

  • भारत का राष्‍ट्रीय गान “जन-गण मन” है
  • इसकी रचना राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ टैगोर जी ने की थी
  • रविंद्रनाथ टैगोर जी ने राष्ट्रगान की रचना
  • वर्ष 1911 में की थी
  • इसके सबसे पहली बार 7 दिसंबर, 1911 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था
  • भारत के संविधान द्वारा राष्ट्रगान को 24 जनवरी, 1950 को इसे स्वीकार किया गया था
  • राष्ट्रगान के पूरे संस्करण को गाने में कुल 52 सेकेंड का समय लगता है
  • राष्ट्रगान को मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया था
  • इसके बाद में इसका अनुवाद हिंदी और अंग्रेजी में भी कर दिया गया था
  • पहले इसमें सिंध का भी नाम था लेकिन बाद में इसमें संशोधन कर सिंध की जगह सिंधु कर दिया गया
    क्योंकि देश के विभाजन के बाद सिंध पाकिस्तान का एक अंग हो चुका था
  • राष्‍ट्रगान को गाने के लिए कुछ नियम बनाये गये हैं

o नियम के अनुसार जब कहीं भी राष्‍ट्रगान बजाया या गाया जा रहा हो तो देश के प्रत्येक नागरिक का ये कर्तव्य होता है कि वो अगर कहीं बैठा हुआ है तो उस जगह पर खड़ा हो जाए
o साथ ही नागरिकों से ये भी अपेक्षा की जाती है कि वो भी राष्ट्रगान को दोहराएं

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पैसे से पैसा

पैसे से पैसा कमाने के 10 टिप्स और ट्रिक्स जो बताएँगे आप पैसों को कहाँ Invest करें

पैसे से पैसा

पैसे से पैसा कमाने के टिप्स:अक्‍सर देखा जाता है कि लोगों के पास पर्याप्‍त पैसा होता है पर वे समझ नहीं पाते कि इन पैसों से और पैसा कमाने का तरीका क्‍या है। लोग उन्‍हें अधकचरी जानकारियां देते हैं और उस पर अमल कर वे कई बार कड़ी मेहनत से कमाए गए अपने इन पैसों को गंवा भी बैठते हैं।
How do I invest my money to make money: अगर आपके पास हर महीने अपनी जरूरी आवश्‍कताओं को पूरा करने के बाद पर्याप्‍त पैसा बचता है तो आपके दिमाग में ये बात आती होगी कि अगर इस पैसे को कहीं इन्‍वेस्‍ट कर और पैसा कमाया जा सके तो मजा आ जाए।

इन्वेस्टमेंट करते वक्त भी कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है क्योंकि अनजाने में की गईं गलतियां मेहनत से कमाया पैसा डुबा सकती हैं. आइए आपको बताते हैं ऐसी ही 10 बातों के बारे में-

1. पैसे से पैसा कमाने के निवेश के उद्देश्य को लेकर हों स्पष्ट

कहीं भी पैसा लगाने से पहले यह इस बात को लेकर स्पष्ट हो जाना चाहिए कि आप किस उद्देश्य से इन्वेस्ट करना चाहते हैं। क्या यह होम लोन की जरूरत को लेकर है या फिर भविष्य के खर्चों की पूर्ति के लिए? अगर इन्वेस्टर एक बार अपने निवेश उद्देश्य को लेकर स्पष्ट हो जाए तो वह टार्गेट रिटर्न, टाइम हॉरिजन और जोखिम जैसे अन्य महत्वपूर्ण फैक्टर्स के बीच चुनाव ज्यादा अच्छे से कर सकता है ।

2. इन्वेस्टमेंट प्लान की सही समझ जरूरी

इन्वेस्टमेंट एक झटके में नहीं होता है। इसके लिए सही प्लानिंग और अनुशासन भरी कोशिश की जरूरत होती है। अच्छा रिटर्न पाने के लिए यह मायने नहीं रखता कि कोई कितना बड़ा या छोटा अमाउंट इन्वेस्ट कर रहा है। बल्कि मुख्य जरूरत होती है कि जिस प्लान में इन्वेस्ट करना चाहते हैं उसकी स्पष्ट समझ हासिल की जाए. इसलिए निवेश से पहले अच्छी तरह से रिसर्च करें और उन प्लान्स पर टिके रहें, जो आपको पूरी तरह स्पष्ट हों।

3. एक ही प्लान में न लगाएं सारा फंड

इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी के मामले में विभाजन कामयाबी का मंत्र है। किसी को भी अपना पूरा फंड एक ही प्लान में नहीं लगा देना चाहिए. इन्वेस्टर को निवेश किए जा सकने वाले विभिन्न सेक्टर्स की स्टडी करनी चाहिए और उसके बाद विभिन्न आॅप्शंस में अपने फंड का एक निश्चित हिस्सा लगाना चाहिए. डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो पूरा पैसा डूबने के जोखिम को कम कर देता है।

4. केवल सुनी हुई बातों पर यकीन कर न करें इन्वेस्ट

ट्रेडिंग मार्केट में सच से ज्यादा प्रचार चलता है। लोग दूसरों के कहे पर यकीन कर बिना पूरी रिसर्च किए प्लान्स में इन्वेस्ट कर देते हैं। जबकि सही तो यह है कि किसी के भी कहे—सुने पर यकीन करने के बजाय प्लान्स के बारे में रिसर्च की जाए और अफवाहों व प्रचारों को लेकर अलर्ट रहा जाए।

5. कोई नहीं जान सकता मार्केट की टाइमिंग

स्टॉक मार्केट अस्थिर है, इसमें उतार—चढ़ाव लगा रहता है और कोई भी इसके बारे में सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकता. हालांकि कुछ लोग सही अंदाज लगा लेते हैं लेकिन ऐसा केवल एक या दो बार सही हो सकता है, हर बार नहीं। ज्यादातर इन्वेस्टर्स मानते हैं कि वे सही समय पर मार्केट के उतार—चढ़ाव का सही और वक्त पर पता लगा सकते हें लेकिन मार्केट की टाइमिंग का पता रहना केवल एक मिथ है।

6. इन्वेस्टमेंट में भी अनुशासन जरूरी

जिस तरह जिंदगी में अनुशासन होना जरूरी है, उसी तरह इन्वेस्टमेंट में भी अनुशासन मायने रखता है। अच्छा रिटर्न देने के बावजूद स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करने वालों की कमी है, जिसकी वजह इसका उतार—चढ़ाव है. हालांकि जिन इन्वेस्टर्स ने सिस्टेमेटिक अप्रोच के साथ पैसा लगाया है, उन्हें वक्त के साथ सही रिटर्न मिला है। इसलिए जरूरी है कि लॉन्ग टर्म सिनेरियो को ध्यान में रखने के अलावा धैर्य के साथ अनुशासनात्मक इन्वेस्टमेंट अप्रोच को फॉलो किया जाए।

7. फैसलों पर इमोशंस को न होने दें हावी

स्टॉक मार्केट में इमोशंस के लिए जगह नहीं है, विशेषकर डर और लालच के लिए। ऐसे कई मामले हुए, जब इमोशंस पर कंट्रोल न कर पाने के चलते कई इन्वेस्टर्स को मोटा नुकसान उठाना पड़ा। यह सच है कि कम समय में छोटे इन्वेस्टमेंट का बड़ा रिटर्न पाने की कहानियां सुनने के बाद एक झटके में पैसा बनाने की ललक से दूर नहीं रहा जा सकता है. इसके चलते इन्वेस्टर्स बिना ज्यादा सोचे अनजान शेयरों को खरीद लेते हैं और बाद में मार्केट का रुख बदलते ही उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है.। इसलिए यह सलाह दी जाती है कि अच्छा रिटर्न पाने के लिए अटकलों को न मानकर सही रिसर्च के साथ स्टॉक चुने जाएं।

8. अव्यावहारिक रिटर्न की न रखें चाहत

निवेश से अच्छा रिटर्न पाने की चाहत गलत नहीं है लेकिन जो संभव न हो यानी अव्यावहारिक रिटर्न पाने की आशा गलत है। कई स्टॉक मार्केट स्टडीज दर्शाती हैं कि 12 फीसदी से ज्यादा रिटर्न अलार्म है कि आगे मार्केट गिरने वाला है। ऐसे में होने वाला नुकसान अर्निंग से कहीं ज्यादा होगा।

9. कभी न लगाएं जरूरत का पैसा

इन्वेस्टमेंट के लिए कभी भी अपनी जरूरत का पैसा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. हमेशा अतिरिक्त पैसे को ही इन्वेस्ट करना चाहिए. स्टॉक मार्केट के मामले में यह जरूरी नहीं है कि अगर आज नुकसान नहीं हो रहा है तो आगे भी कभी नहीं होगा। इसलिए सलाह दी जाती है कि अतिरिक्त फंड ही इन्वेस्ट करें ताकि अगर कभी नुकसान उठाना पड़े तो भी आपकी जिंदगी सही तरीके से चलती रहे। हालांकि नुकसान के बजाय प्रॉफिट भी हो सकता है, इसलिए जोखिम लें लेकिन संभलकर।

10. अपडेट रहना और मार्केट पर नजर रखना जरूरी

आज के दौर में विश्व के सभी राष्ट्रों के मार्केट अपनी-अपनी बाउंड्री तोड़कर एक साथ आ रहे हैं और मिलकर एक ग्लोबल विलेज तैयार कर रहे हैं। ऐसे में विश्व के किसी भी हिस्से में घटित कोई भी घटना या कोई भी महत्वपूर्ण ईवेंट, हर देश के फाइनेंशियल मार्केट को काफी ज्यादा प्रभावित करता है। इसलिए जरूरी है कि सभी ग्लोबल ईवेंट्स को लेकर अपडेट रहा जाए और पोर्टफोलियो को लगातार मॉनिटर किया जाए। अगर आप खुद से पोर्टफोलियो का रिव्यू नहीं कर सकते तो अच्छा रहेगा कि किसी फाइनेंशियल एडवायजर या प्लानर को हायर कर लिया जाए।

पैसे से पैसा

उम्मीद है की आपको ये लेख जरूर अच्छा लगा होगा। इसी तरह के और भी लेख आपके लिए लाता रहूँगा । लेख से संबन्धित कोई प्रश्न या सुझाव हों तो हमे कमेंट जरूर करें।

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Traffic Challan Online

How to check & Pay traffic challan online (ट्रेफिक चालान को ऑनलाइन कैसे चेक करें व चालान को ऑनलाइन कैसे भरें)?

आज के लेख का टॉपिक है की “How to Pay and check traffic challan online”

जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं ! नए मोटर व्हीकल नियम (new motor whechal rule 2019) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है ! तो अब उसे भारत सरकार को 10 गुना ज्यादा फाइन भरना होगा ! जैसा कि हम सभी लोग देख रहे हैं , कि जो पहले 500 रुपये का चालन कटता था ! आज वह 5000 रु. चालान कट रहा है ! हाल ही मे बनाए गए इन नियमों का भारत में काफी विरोध भी हो रहा है ! लेकिन भारत सरकार ने भी इस चालान प्रक्रिया को सरल करते हुये यानि आपकी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस चालान भरने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया है ! यदि आपका चालान कट जाता है ! तो आप इस चालान को ऑनलाइन भी चेक कर सकते हैं ! तथा ऐसे चालान का आप ऑनलाइन भुगतान भी कर सकते हैं !

अब चालान करने का तरीका भी काफी एडवांस हो गया है। अब अगर आप शहर मे ट्रेफिक नियमो के बिरुद्ध गाड़ी चलाते है तो चलती गाड़ी का कैमरे के माध्यम से भी चालान हो जाता है ! और आपको पता भी नहीं चलता है !

तो अगर आप रोड पर चल रहे हैं , और आप से कोई गलतीnहो जाती है ! तो आप घर आकर एक बार अपने गाड़ी का चालान जरूर चेक करें ! कहीं आपका ऑनलाइन चालान तो नहीं काट दिया गया है ! यदि काट दिया गया है , तो आप उसे ऑनलाइन भुगतान कर सकते हैं ! नहीं तो आपको भारी भरकम जुर्माना भरना पड़ सकता है या फिर जैल भी हो सकती है।

ट्रेफिक चालान को कैसे चेक करें ? अगर चालान कट गया है तो ऑनलाइन कैसे जमा करें?

ऑनलाइन चालान चेक (check traffic challan online ) करने के लिए सबसे पहले आपको इस दिए गए वेबसाइट पर जाना होगा ,यदि आप ऑनलाइन चालान जमा ((pay traffic challan online))करना चाहते हैं , तब भी आपको इसी वेबसाइट पर जाना होगा । उसके बाद आपके सामने इस तरह की विंडो खुलेगी, जिस पर आप अपना चालान नंबर ,गाड़ी नंबर, या डीइल नंबर डालकर चेक कर सकते हैं ।

इन तीन में से आपको एक चीज डालकर गेट डिटेल पर क्लिक करेंगे . यदि आपका चालान कटा होगा ,तो आपको इस तरह की विंडो दिखाई देगी जहां पर आपका चालान किसलिए काटा गया है , कितना काटा गया है , संपूर्ण जानकारी लिखी मिलेगी !

How to pay traffic challan online

विंडो पर आपको ऑनलाइन चालान जमा (submit traffic challan online)करने का ऑप्शन भी मिलेगा इसके माध्यम से आप ऑनलाइन अपना जुर्माना भर सकते हैं. जैसे ही आप ऑनलाइन चालान भरते हैं तो आपको एक slip दी जाती है जिसे आप प्रिंट करके रख सकते हैं , और समय आने पर उसे किसी भी अधिकारी को दिखा सकते हैं.

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Driving License

ड्राइविंग लाइसेंस कैसे बनवाएँ (Driving License kaise banwayen)?

अगर आप टू व्‍हीलर और फोर व्‍हीलर चलाते हैं तो आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस का होना अनिवार्य है।
आज के दौर मे ड्राइविंग Licence एक आवश्यक डॉकयुमेंट हो गया है। जिसके द्वारा न सिर्फ हम वाहन चलाने के लिए Eligible होते है, बल्कि इसे हम ID Proof के रूप मे भी स्तेमाल करते हैं।
तो आज हम आपको बाताएंगे की ये

ड्राइविंग Licence क्या होता है?
और इसको बनवाने की क्या प्रक्रिया होती है ?

ड्राइविंग Licence, भारत सरकार द्वारा जारी किया गया एक एसा दस्तावेज़ है जिससे किसी भी वाहन चालक को सार्वजनिक सड़क पर वाहन चलाने की permission मिलती है ।
बैसे आज के समय मे हम ऑनलाइन भी ड्राइविंग Licence बनवा सकते हैं। कई लोग सोचते हैं की बिना एजेंट की मदद से हम ड्राइविंग Licence नहीं बनवा सकते है । यदि हमे इसकी सही प्रक्रिया मालूम हो तो हम बिना किसी एजेंट की सहायता से ड्राइविंग Licence आसानी से बनवा सकते हैं।
- Permanent ड्राइविंग Licence बनवाने से पहले हमे एक Learning ड्राइविंग Licence बनवाना पड़ता है।

Learning ड्राइविंग Licence के लिए आवश्यक डॉक्युमेंट्स

Learning ड्राइविंग Licence कोई भी बनवा सकता है जिसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है, लेकिन उस व्यक्ती के पास निम्नलिखित डॉक्युमेंट्स का होना आवश्यक है।
आयु प्रमाणपत्र (Age Certificate), कोई भी एक -
1 जन्म प्रमाणपत्र
2 पैन कार्ड
3 पासपोर्ट
4 School की Marksheet (जिसमे जन्म तिथि लिखी हो)
Address Proof इनमे से कोई भी एक -
Voter ID Card
आधार कार्ड
राशन कार्ड
पासपोर्ट
लाइट बिल

Online learning Driving Licence बनाने की प्रक्रिया

Online learning Driving Licence बनवाने के लिए, आपके पास उपरोक्त डॉकयुमेंट स्कैन किए हुए होने चाहिये, साथ ही आपके पास पासपोर्ट सीजे के फोटो व यदि आप 40 वर्ष से अधिक आयु के है तो आपको मेडिकल सर्टिफिकेट की भी आवश्यकता होगी। यदि आपके पास यह सभी डॉकयुमेंट स्कैन किए हुए है तो आप Online learning Driving Licence आसानी से बनवा सकते हैं।

Online Driving Licence बनवाने के Steps :

सबसे पहले सड़क परिवहन मंडल की वेबसाइट पर sarathi.parivahan.gov.in/…/stateSelection.doजाएँ। आप इस वेबसाइट से ड्राइविंग लाइसेंस संबधी सभी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की सभी जानकारी इस वेबसाइट पर मौजूद है। अब आपको लर्निंग लाइसेंस बनवाना है या स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस (Permanent Driving Licence ) बनवाना है यह डिसाइड करना है। यदि आपके पास पहले से ही लर्निंग लाइसेंस है तो आप स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस भी इस वेबसाइट से बनवा सकते है। अगर नहीं है तो सबसे पहले आपको लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस ही बनवाना पडेगा।

ऑनलाइन से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस कैसे Apply करें ( How to Apply Online Learning Licence)?

Follow Steps:

Step-1

सबसे पहले आपको यहां पर दिए गए वेबसाइट पर क्लिक करना होगा|

आपसे पूछा जाएगा की आप किस स्टेट का लाइसेंस बन बनवाना चाहते हैं उस state को सेलेक्ट कीजिए|
अब आपके सामने ऑप्शन आएगा अप्लाई ऑनलाइन | अब अप्लाई ऑनलाइन लिंक पर क्लिक कर के न्यू ड्राइविंग लाइसेंस लिंक पर क्लिक करें

अब ऑनलाइन आवेदन फॉर्म खुल जाएगा जहाँ पर आपको मांगी गई सारी जानकारी सही से भरनी होगी
आवेदन के लिए फीस भी आप ऑनलाइन ही जमा कर सकते हैं
आवेदन सम्पूर्ण होने पर आवेदन संख्या नोट कर के रख लें
ऑनलाइन आवेदन संपन्न होने पर क्या करें
इसके बाद शुरु होगा आपको फिजिकल ड्राइविंग टेस्‍ट।
यानि अब आपको टू व्‍हीलर, फोर व्‍हीलर या जिस व्‍हीकल डीएल के लिए आपने एप्‍लाई किया है,
वो वाहन आपको संबंधित अधिकारी के सामने सही ढंग से चलाकर दिखाना होगा।
इस फिजिकल ड्राइविंग टेस्‍ट के लिए आपको अपना वाहन साथ लेकर जाना होगा।
ये ड्राइविंग टेस्‍ट पास करने के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि टेस्‍ट देते समय कभी भी अपनी ड्राइविंग को लेकर ओवर कॉन्‍फीडेंट न बनें।
साथ ही सामने खड़े अधिकारी के निर्देशों को मानते हुए सभी ट्रैफिक रूल्‍स फालो करते हुए गाड़ी चलाएं।
जब सम्बंधित मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर आपको ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट में पास घोषित कर देगा उसके बाद आपके आवेदन को पूर्ण रूप से स्वीकृति मिल जायेगी और कुछ ही दिनों में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त किया जा सकता है

Driving License के खोने पर आपको क्या करना चाहिए?

यदि आपका Driving License खो गया है तो घबराने की कोई जरुरत नहीं है क्यूंकि आप इसके बदले में दूसरा इसका duplicate apply कर सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ निर्देशों का पालन करना पड़ेगा.

सबसे पहले नजदीकी Police Station में जाएँ जहाँ आपका Driving License खो गया है.
वहां एक Complaint दर्ज करें और ये निस्चित करें के आपके पास उस complain (FIR) की एक copy होनी चाहिए ताकि आप बाद में उसका इस्तमाल कर सकें.
अपने शहर के Notary office में जाएँ और एक affidavit stamped paper में तैयार करें. इसके लिय आपको थोडा charges पड़ सकता है. वह affidavit एक proof के तरह काम करेगा जिसमें ये mention रहेगा की वाकई आपका Driving License खो गया है|
यह affidavit अब डुप्लीकेट लाइसेंस फॉर्म के संलग्न कर के जमा कर दें।

इंटरनेट का मालिक

इंटरनेट का मालिक कौन है (Who is the owner of the internet)?

इंटरनेट का मालिक: जिस प्रकार से आज भारत मे इंटरनेट का प्रयोग किया जाता हैं तो ऐसा लगता हैं, मानो वर्तमान समय ‘इंटरनेट क्रांति’ का है, आज के समय मे रोज नए नए आविष्कार हो रहे हैं उससे लोगों की अपने काम करने की स्पीड मे भी बदोत्तरी हुई है।

इंटरनेट की खोज किसने की?

इंटरनेट की खोज करना किसी एक व्यक्ति की बात नहीं थी इसलिए इंटरनेट का मालिक कोई एक व्यक्ति नहीं हो सकता बल्कि इसकी खोज कई वैज्ञानिकों और इंजीनियरों द्वारा की गई। 1957 में शीतकालीन युद्ध के दौरान, अमेरिका ने एक तरकीब सुझाई और एक ऐसी तकनीक बनाने का निर्णय लिया जिसके बाद आप एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर को आसानी से जोड़ने में सक्षम हो सके। जिसका सुझाव हर किसी को अच्छा लगा और उन्होंने उसे पास कर दिया अब वो सुझाव आज के समय में काम आ रहा है। 1980 उसका नाम इंटरनेट रखा गया। इसको आजकल के समय में लोगों की लाइफलाइन कहा जाता है।

इंटरनेट का मालिक कौन है (Who is the owner of the internet)?

इंटरनेट सूचना तंत्र वस्तुतः किसी व्यक्ति या संस्था के नियंत्रण से परे है। इंटरनेट पर अनेक संस्थानों, नियमों, सरकारी उपक्रमों, शिक्षण संस्थाओं, व्यक्तिगत संस्थानों तथा विभिन्न सेवा प्रदाताओं (Service Providers) का थोड़ा-थोड़ा स्वामित्व माना जा सकता है। इसलिए इंटरनेट का मालिक कोई एक व्यक्ति नहीं है।

इंटरनेट की कार्य-प्रणाली की देख-रेख करने तथा उनके अंतर्राष्ट्रीय मानक निर्धारित करने का कार्य कुछ अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं करती हैं जो इंटरनेट पर IP Address, Domain Name प्रदान करने का कार्य भी करते हैं।
कुछ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हैं-

  • National Science Foundation इंटरनेट के तकनीकी मानकों का निर्धारण करता है।
  • ICANN (Internet Corporation for Assigned Names & Numbers) – आईपी एड्रेस तथा डोमेन नेम सिस्टम का मानक निर्धारित करता है।
  • Internet Engineering Task Force
  • Internet Architecture Board.

भारत में इंटरनेट (Internet in India)-

भारत में इंटरनेट का आरंभ 80 के दशक में हुआ जब अर्नेट (ERNET-Education and Research Network) के माध्यम से भारत के पांच प्रमुख संस्थानों को जोड़ा गया। बाद में नेषनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा देश के सभी जिला मुख्यालयों को प्रशसनिक सुविधा हेतु नेटवर्क से जोड़ा गया।

भारत में जनसामान्य के लिए इंटरनेट सेवा का आरंभ 15 अगस्त 1995 को विदेष संचार निगम लिमिटेड (BSNL) द्वारा किया गया। संचार नेट नामक सार्वजनिक नेटवर्क के अंतर्गत 42 नोड की स्थापना की गई। 1999 में संचार क्षेत्र को निजी सेवा प्रदाताओं के लिए खोल देने से इंटरनेट सेवा प्रदाताओं में प्रतिस्पर्धा विकसित हुई जिसके फलस्वरूप इंटरनेट के उपभोक्ताओं में भी भारी वृद्धि हुई।

फास्टैग

फास्टैग क्या होता है? और इसके क्या लाभ हैं? | What is Fastag?

हम जानेंगे फास्टैग के बारे में कि यह फास्टैग क्या होता है? और यह कैसे काम करता है?, इसको कहां से खरीद सकते हैं और इसका यूज कहां कहां पर कर सकते हैं तथा इसको रिचार्ज कैसे कराते हैं तो आइए जानते हैं.

टोल प्लाजाओं पर टोल कलेक्शन सिस्टम से होने वाली परेशानियों का हल निकालने के लिए “राष्ट्रीय हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया” द्वारा भारत में “इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन” (ETC) सिस्टम शुरू किया गया है. इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम या फास्टैग स्कीम भारत में सबसे पहले साल 2014 में शुरू की गई थी. जिसे धीरे धीरे पूरे देश के टोल प्लाजा के ऊपर लागू किया जा रहा है. फास्टैग सिस्टम की मदद से आपको टोल प्लाजा में टोल टैक्स देने के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात मिल सकेगी. फास्टैग की मदद से आप टोल प्लाजा में बिना रुके अपना टोल प्लाजा टैक्स दे सकेंगे आपको बस अपने बाहन पर फास्टैग लगाना होगा. आप यह टैग किसी अधिकारिक टैग जारीकर्ता, जैसे पेटीएम सभी राष्ट्रीकृत बैंक्स इत्यादि से खरीद सकते हैं.

देशभर में सड़क पर टोल का इलेक्ट्रॉनिक तौर पर संग्रह तेज करने के लिए जल्द ही पेट्रोल पंपों पर फास्टैग उपलब्ध कराए जाएंगे। बाद में इनका उपयोग पेट्रोल खरीदने और पार्किंग शुल्क अदा करने में भी किया जा सकेगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, अब से फास्टैग पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध होंगे और हमारी योजना इसे देशभर में उपलब्ध कराने की है। इसके अलावा यह योजना भी है कि ग्राहक इस कार्ड का उपयोग पेट्रोल खरीदने और पार्किंग सुविधाओं का शुल्क चुकाने में कर सकें।

फास्टैग क्या है? (What is FasTag)?

फास्टैग एक उपकरण होता है जो वाहन के सामने वाले कांच पर लगाया जाता है। और इसमें रेडियो फ्रिकवेंसी आईडेंटिफिकेशन ( आर एफ आई डी) लगा होता है. जैसे ही आप की गाड़ी टोल प्लाजा के पास आ जाती है, तो टोल प्लाजा पर लगा सेंसर आपके वाहन के विंड स्क्रीन में लगे फास्टैग के संपर्क में आते ही, आपके फास्टटैग अकाउंट से उस टोल प्लाजा पर लगने वाला शुल्क काट देता है और आप बिना वहां रुके अपना प्लाजा टेक्स का भुगतान कर देते हैं . वाहन में लगा यह टैग, आपके प्रीपेड खाते के सक्रिय होते ही अपना कार्य शुरू कर देगा. वहीं जब आपके फास्टैग अकाउंट की राशि खत्म हो जाएगी, तो आपको उसे फिर से रिचार्ज करवाना पड़ेगा. फास्टैग की वैधता 5 वर्ष की होगी यानी 5 वर्ष के बाद आपको नया फास्टैग अपनी गाड़ी पर लगवाना होगा.

इसके फायदे ( Benefits of FasTag)

सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने टोल प्लाजा में टोल टैक्स देने के कारण लगने वाली गाड़ियों की लंबी लाइन और खुले पैसे होने की समस्या को हल करने के लिए Fastag सिस्टम को देश के कई टोल प्लाजा ऊपर शुरू किया है. फास्टैग की मदद से आपका समय बचने के साथ-साथ आपके पेट्रोल या डीजल की भी बचत होगी.

एस एम एस की होगी सुविधा (SMS Facilities)

जब भी आप FasTag लगे वाहन से किसी टोल प्लाजा को पार करेंगे, तो Fastag अकाउंट से आपका शुल्क कटते ही आपके पास एक एसएमएस आ जाएगा. एसएमएस के जरिए आपको Fastag Account से कितनी राशि काटी गई है उसके बारे में आपको जानकारी दी जाएगी.

इन बैंकों से होगा रिचार्ज (Bank for Recharge Fastag or Electronic Toll Collection (ETC) Account)

आप क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, आरटीजीएस और नेट बैंकिंग के माध्यम से अपने फास्टैग अकाउंट को रिचार्ज कर सकते हैं. फास्ट टैग खाते में कम से कम 100 Rs. और ज्यादा से ज्यादा 100000 रुपए तक का रिचार्ज कराया जा सकता है. आप किसी भी पॉइंट ऑफ सेल(POS) के अंदर आने वाले टोल प्लाजा और एजेंसी में जाकर अपना फास्टैग स्टीकर और फास्टैग अकाउंट खुलवा सकते हैं. राष्ट्रीय हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया की वेबसाइट में जाकर आप अपने आसपास के पॉइंट ऑफ सेल की जगह पता कर सकते हैं.

बैंक ने पूरे देश के सभी राजमार्गों पर टोल शुल्क देने को आसान बनाने के लिए पेटीएम फास्टैग को शुरू किया है।

चल रही कार कंपनियों से बात

मौजूदा समय में पेटीएम पेमेंट्स बैंक, नए वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए पेटीएम FasTag उपलब्ध कराने की खातिर कार कपंनियों के साथ बात कर रहा है. इसके लिए कार डीलर्स के साथ भी बातचीत चल रही है. इसमें मारुति, हुंडई, टाटा, मर्सिडीज, रेनॉल्ट समेत अन्य कार कंपनियां शामिल हैं.

खरीद सकते हैं ऑनलाइन (Online Purchase)

पेटीएम के मुताबिक पुराने वाहनों के लिए पेटीएम ऐप पर फास्टैग को ऑनलाइन खरीद सकते हैं। पेटीएम फास्टैग का प्रयोग करने वाले ग्राहकों को प्रत्येक टोल लेनदेन में 7.5% का कैशबैक मिलेगा। बैंक इस वित्त वर्ष के अंत तक पेटीएम फास्टैग का प्रयोग करने वाले वाहनों की संख्या 10 लाख के पार पहुंचाने की उम्मीद करता है।

आवश्यक डाक्यूमेंट्स (Documents)

अकाउंट खोलने के वक्त आपको दिए गए एक फॉर्म के साथ निम्नलिखित दस्तावेजों को भी जमा करवाने की आवश्यकता पड़ेगी, जो इस प्रकार है-

  • वाहन के पंजीकरण प्रमाण पत्र( RC)
  • वाहन मालिक का पासपोर्ट साइज के फोटो
  • वाहन मालिक के केवाईसी दस्तावेज और एड्रेस प्रूफ

वैसे आपको बता दें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सभी गाड़ी निर्माताओं कंपनी और वाहन डीलरों को यह सुनिश्चित करने को कहा है, कि खरीदे जाने वाले वाहनों पर उसके मालिक द्वारा फास्ट टैग जरूर लगवाया जाए इसीलिए अब यह आवश्यक है कि आपको फास्टैग अपने वाहन पर लगवाना होगा.

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