कंप्यूटर का विकास [Development of Computer]

अबेकस [The Abacus]

यह एक प्राचीन गणना यंत्र है जिसका आविष्कार प्राचीन बेबीलोन में अंको की गणना के लिए किया गया था। इसे संसार का प्रथम गणक यंत्र कहा जाता है। इसमें तारों (Wires) में गोलाकार मनके (Beads) पिरोयी जाती है जिसकी सहायता से गणना को आसान बनाया गया।

संरचना –

Abacus लकड़ी का एक आयताकार ढाँचा होता है, जिसके अन्दर तारों का फ्रेम (frame of wires) लगा होता है। प्रत्येक तार में सात बीड (छेद वाले पक्की मिट्टी के गोल टुकड़े) या दानें होते हैं। अबाकस मुख्यतः दो भागों में विभाजित होता है –
1. ऊपरी भाग या हेवन(Heaven)
2. निचला भाग या अर्थ (Earth)
अबाकस के ऊपरी भाग के प्रत्येक तार में दो बीड या दानें होते हैं, जिनमें प्रत्येक का मान पाँच (5) होता है तथा निचले भाग के प्रत्येक तार में पांच बीड या दानें होते हैं, जिनमें प्रत्येक का मान एक (1) होता है।

नेपिअर बोंस [Napier Bones]

1. इस युक्ति का निर्माण हुआ – स्कॉटलैंड (1617 ई.) में।
2. इस यंत्र के आविष्कारक थे – जॉन नेपियन (महान गणितज्ञ)।
3. इस यंत्र का निर्माण हुआ था – जानवरों की हड्डियों से।
4. नेपियर बोन्स या नेपियर छड़ें विषेष रूप से उपयुक्त थी – शीघ्रता से गुणा करने में।
5. इस यंत्र का आकार था – आयताकार।

संरचना –
ये कुल दस आयताकार पट्टियाँ होती थीं, जिन पर क्रमषः 0 से 9 तक के पहाड़े इस प्रकार लिखे होते थे, कि एक पट्टी के दहाई के अंक दूसरी पट्टी के इकाई के अंक के पास आ जाते है। इनका स्वरूप कुछ इस प्रकार समझ सकते हैं, जैसे-एक तार में पिरोये हुये लूडो के कई सारे पाँसे। इन पट्टियों का विवरा और उपयोग नेपियर की मृत्यु के बाद ही संसार के सामने आया था।

स्लाइलड रूल [ Slide Rule]-

1. इस यंत्र का आविष्कार हुआ – जर्मनी (1620 ई.) में।
2. इस यंत्र के आविष्कारक थे – वलियम ऑरटेड (गणितज्ञ)।
3. इस यंत्र का प्रयोग हुआ – 20 वीं शताब्दी के 8वें दषक तक।
4. इस यंत्र की कार्य प्रणाली आधारित थी – लघुगुणक पर।

सरंचना –
इसमें दो विषेष प्रकार की चिन्हित पट्टियाँ होती थीं, जिन्हें बराबर में रखकर आगे-पीछे सरकाकर लघुगणक की क्रिया सम्पन्न होती थी। स्लाइड रूल का उपयोग वैज्ञानिक गणनाओं में कई शताब्दियों तक किया जाता रहा।

पास्कलाइन [Pascaline] –

फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (Blase Pascal) ने 1642 में प्रथम यांत्रिक गणना मषीन का आविष्कार किया। यह केवल जोड़ व घटा सकती थी। अतः इसे एडिंग मशीन  (Adding Machine)  भी कहा गया।

डिफरेंस इंजन (Difference Engine) और एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) –

ब्रिटिष गणितज्ञ चार्ल्स वैबेज (Charles Babbage) ने 1822 में डिफरेंज इंजन का आविष्कार किया जो भाप से चलता था तथा गणनाऐं कर सकता था। 1842 में चार्ल्स वैबेज ने एक स्वचलित मशीन एनालिटिकल इंजन बनाया जो पंचकार्ड के दिशा  निर्देषें के अनुसार कार्य करता था तथा मूलभूत अंक गणितीय (जोड़,घटाव, गुणा, भाग) कर सकती थी। चार्ल्स बैवेज की इस उपलब्धि के कारण उन्हें कम्प्यूटर का जन्म दाता (Father of Computer) कहा जाता है
लेडी एडा आगस्टा (Ada Augusta) ने एनालिटिकल इंजन में पहला प्रोग्राम डाला अतः इसे दुनिया का प्रथम प्रोग्राम भी कहा जाता है। उन्हें दो अंकों की संख्या प्रणाली बाइनरी प्रणाली (Binary System) के अविष्कार का श्रेय भी है।

 

बैबे का एनालिटिकल इंजन –
1. इस यंत्र का आविष्कार हुआ – इंग्लैण्ड में।
2. इस यंत्र को कहा जाता है – आधुनिक कम्प्यूटर का प्रोटोटाइप।
3. इस यंत्र के प्रमुख भाग थे – 5
4. चार्ल्स बैबेज का एनालिटिकल इंजन पूर्ण किया गया – लेडी एडा ऑगस्टा द्वारा।

मार्क I- [Marc-I]-

1937 से 1977 के बीच आईबीएम (IBM – International business Machine) नामक कम्पनी के सहयोग तथा वैज्ञानिक हावर्ड आइकन (Hawared Aikan)  के निर्देषन में विष्व के प्रथम पूर्ण स्वचालित विद्युत यांत्रिक (Electro-Mechanical) गणना यंत्र का आविष्कार किया गया। इसे मार्क-I नाम दिया गया

एनिअक  [ENIAC – Electronic Numerical Integrator and calculator]-

1946 में अमेरिकी वैज्ञानिक जे.पी. एकर्ट(J.P. Eckert) तथा जॉन मुचली  ने सामान्य कार्यो के लिए प्रथम पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक (Fully electronic) कम्प्यूटर का आविष्कार किया जिसे एनिएक नाम दिया गया।

उनिवाक [UNIVAC – Universal Automatic Computer]-

यह प्रथम कम्प्यूटर था जिसका उपयोग व्यापारिक और अन्य सामान्य कार्यों के लिए किया गया। प्रथम व्यापारिक कम्प्यूटर यूनीवैक-(UNIVAC) का निर्माण 1954 में जी इ सी (GEC- General Electric Corporation) ने किया।

माइक्रो कंप्यूटर [Microprocessor]-

1970 में इंटेल कंपनी द्वारा प्रथम माइक्रो प्रोसेसर ‘‘इंटेल-4004’’ के निर्माण ने कम्प्यूटर के क्षेत्र में क्रांती ला दी इससे छोटे-छोटे आकार के कम्प्यूटर का निर्माण संभव हुआ जिन्हें माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer ) कहा गया ।

एप्पल-II  [Apple II]-

1977 में प्रथम व्यवसायिक माइक्रो कम्प्यूटर (First Business Micro Computer) का निर्माण किया गया जिसे एप्पल II नाम दिया गया।
वर्क स्टेशन  (Work Station) – यह एक शक्तिषाली पी.सी. है जो अधिक प्रोसेसिंग क्षमता, विषाल भण्डारण और बेहतर डिस्प्ले को ध्यान में रखकर
बनाया जाता है। इस पर एक बार में एक ही व्यक्ति कार्य कर सकता है।

उपयोग : वैज्ञानिक, इंजिनियंरिग, भवन निर्माण आदि क्षेत्रों में वास्तविक परिस्थितियों को उत्पन्न कर (Simulation)  उनका अध्ययन करने में किया जाता है।

सेंसर टेबुलेटर [ Sensor Tabulator]-

1890 में अमेरिका के वैज्ञानिक हर्मन होलेरिथ (Herman Hollerith) ने इस विद्युत चालित यंत्र का आविष्कार किया जिसका प्रयोग अमेरिका जनगणना में किया गया इन्हें पंचकार्ड के आविष्कार का श्रेय भी दिया जाता है।

ए.बी.सी.  कंप्यूटर [ABC-Atanasoff Berry Computer]-

1939 में जॉन एटनासॉफ और क्लिफोर्ड बेरी नामक वैज्ञानिक ने मिलकर संसार का पहला ‘इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर’ (Electronic Digital Computer) का अविष्कार किया इन्ही के नाम पर इसे (ABC) का नाम दिया गया।

[EDVAC- Electronic Discrete Variable Automatic Computer]-

एनिएक कम्प्यूटर में प्रोग्राम में परिवर्तन कठिन था इससे निपटने के लिए वान न्यूमेन (Van Neumann) ने संग्रहीत प्रोग्राम (Stored program) की अवधारणा दी तथा एडवैक का विकास हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *